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अनजान लिंक, घातक लिंक: परिवहन विभाग के नाम पर APK जाल, अस्पताल कर्मी से 5 लाख से अधिक की साइबर ठगी

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। आनंद नगर–उसलापुर में साइबर अपराध का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां अस्पताल में कार्यरत एक कर्मचारी के साथ परिवहन विभाग के नाम पर भेजे गए फर्जी APK लिंक के जरिए बड़ी ठगी की गई। यह मामला उन साइबर ठगी की घटनाओं की कड़ी में जुड़ गया है, जिनमें सरकारी विभागों की पहचान का दुरुपयोग कर आम लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, 03 फरवरी 2026 की सुबह लगभग 10 बजे पीड़ित के मोबाइल नंबर पर व्हाट्सऐप के माध्यम से एक संदेश प्राप्त हुआ। संदेश भेजने वाले नंबर की डिस्प्ले पिक्चर पर परिवहन विभाग का लोगो लगा हुआ था। मैसेज में एक APK लिंक भेजा गया था, जिसमें पीड़ित की मोटरसाइकिल का नंबर दर्ज था और यह दावा किया गया था कि उनके वाहन का ई-चालान काटा गया है
वाहन नंबर सही होने के कारण पीड़ित को यह संदेश वास्तविक प्रतीत हुआ। ई-चालान की जानकारी देखने के उद्देश्य से जैसे ही पीड़ित ने लिंक पर क्लिक किया, उसी क्षण उनके मोबाइल सिस्टम में संदिग्ध गतिविधियां शुरू हो गईं। लगभग पांच मिनट के भीतर, अलग-अलग ट्रांजैक्शन के माध्यम से कुल 5,00,199 रुपये उनके बैंक खाते से UPI के जरिए निकाल लिए गए
घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए साइबर अपराध की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है और तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। ठगी में प्रयुक्त मोबाइल नंबर, APK लिंक, डिजिटल ट्रांजैक्शन और बैंक डिटेल्स की जांच की जा रही है।
यह मामला उन बढ़ती घटनाओं को उजागर करता है, जिनमें APK फाइल के माध्यम से मोबाइल में मैलवेयर इंस्टॉल कर बैंकिंग ऐप्स और UPI एक्सेस पर नियंत्रण हासिल किया जा रहा है।
क्या है APK लिंक के जरिए होने वाली यह साइबर ठगी
APK (Android Package Kit) एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम में ऐप इंस्टॉल करने का फॉर्मेट होता है। साइबर अपराधी इसी तकनीक का दुरुपयोग कर फर्जी APK फाइल भेजते हैं।
जैसे ही यूजर APK लिंक पर क्लिक करता है, मोबाइल में छिपा हुआ मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता है।
यह मैलवेयर मोबाइल की स्क्रीन, की-पैड, ओटीपी, UPI ऐप और बैंकिंग ऐप्स तक पहुंच बना लेता है।
कई मामलों में बिना किसी अतिरिक्त अनुमति के ही ऑटो ट्रांजैक्शन शुरू हो जाते हैं।
सरकारी विभागों जैसे परिवहन, बिजली विभाग, बैंक या पुलिस के नाम और लोगो का इस्तेमाल कर भरोसा जीता जाता है।
यह तरीका देशभर में तेजी से फैल रहा है और विशेष रूप से व्हाट्सऐप मैसेज इसके लिए सबसे अधिक इस्तेमाल किया जा रहा है।
पुलिस अधीक्षक की संवेदनशीलता और साइबर अपराध पर नजर
इस प्रकरण को लेकर जिले के पुलिस अधीक्षक ने साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं पर विशेष संवेदनशीलता दिखाई है। उनके निर्देश पर साइबर सेल को तकनीकी संसाधनों के साथ सक्रिय किया गया है।
बैंक और UPI नेटवर्क से समन्वय कर ट्रांजैक्शन ट्रेल खंगाली जा रही है।
APK लिंक के सोर्स और अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच की जा रही है।
पूर्व में दर्ज समान मामलों के पैटर्न से इस घटना की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
पुलिस प्रशासन इस तरह के मामलों को सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि डिजिटल सुरक्षा से जुड़ा गंभीर अपराध मानते हुए जांच कर रहा है।
साइबर अपराध का बदलता चेहरा
यह घटना दर्शाती है कि साइबर अपराधी अब सिर्फ कॉल या फर्जी वेबसाइट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सीधे मोबाइल सिस्टम पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहे हैं। परिवहन विभाग जैसे विश्वसनीय संस्थानों के नाम पर भेजे गए APK लिंक लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।

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