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सिम्स में नी-आर्थ्रोस्कोपी और सी-आर्म मशीनों का विधिवत शुभारंभ15 अगस्त को अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने की थी घोषणा, अब पूजा-पाठ के साथ शुरू हुई आधुनिक सुविधा

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर में मरीजों को आधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। सिम्स में नी-आर्थ्रोस्कोपी मशीन एवं सी-आर्म मशीनों का विधिवत पूजा-पाठ के साथ शुभारंभ किया गया। सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने विधिवत पूजा-अर्चना कर मशीनों का शुभारंभ किया। नई नी-आर्थ्रोस्कोपी मशीन को इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर में स्थापित किया गया है।


दरअसल, 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने घोषणा की थी कि सिम्स में शीघ्र ही दूरबीन द्वारा जोड़ की सर्जरी की अत्याधुनिक सुविधा शुरू की जाएगी। घोषणा के बाद निर्धारित समय में मशीन उपलब्ध कराकर अब इसका विधिवत शुभारंभ कर दिया गया है। इससे सिम्स में आधुनिक जोड़ सर्जरी की सुविधा का रास्ता साफ हो गया है।
छत्तीसगढ़ शासन की ओर से लगभग 1 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि से सिम्स को दो सी-आर्म मशीन तथा एक अत्याधुनिक नी-आर्थ्रोस्कोपी मशीन प्राप्त हुई है। नई मशीनों के उपलब्ध होने के बाद सिम्स में कुल तीन सी-आर्म मशीनें हो गई हैं। इनसे प्रतिमाह लगभग 90 से 120 ऑपरेशन किए जा सकेंगे। वहीं नी-आर्थ्रोस्कोपी मशीन से प्रतिमाह लगभग 20 से 30 ऑपरेशन किए जाने की क्षमता होगी।


घुटने की सर्जरी में मिलेगी दूरबीन तकनीक की सुविधा
नी-आर्थ्रोस्कोपी आधुनिक दूरबीन आधारित शल्य तकनीक है। इसमें घुटने के जोड़ में छोटे छिद्र के माध्यम से कैमरा और विशेष उपकरण पहुंचाकर अंदर की स्थिति को हाई-डेफिनिशन मॉनिटर पर देखा जाता है। इसके माध्यम से लिगामेंट, मेनिस्कस और कार्टिलेज से संबंधित समस्याओं का सटीक उपचार किया जा सकता है। बड़े चीरे की आवश्यकता कम होने के कारण मरीज को कम दर्द, कम रक्तस्राव और अपेक्षाकृत जल्दी रिकवरी का लाभ मिलता है।
मरीजों को दूसरे शहर जाने से मिलेगी राहत
अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि 15 अगस्त को की गई घोषणा को अब धरातल पर उतार दिया गया है। सिम्स में नी-आर्थ्रोस्कोपी सुविधा शुरू होने से घुटने और जोड़ से संबंधित जटिल मामलों के मरीजों को आधुनिक उपचार के लिए निजी अस्पतालों अथवा दूसरे शहरों में जाने की आवश्यकता कम होगी। सिम्स का प्रयास है कि मरीजों को शासकीय संस्थान में ही आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जाए।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि नई मशीनों के शुरू होने से सिम्स में ऑपरेशन की क्षमता बढ़ेगी और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध होगा। विशेष रूप से इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर में सी-आर्म और नी-आर्थ्रोस्कोपी जैसी आधुनिक तकनीक उपलब्ध होने से गंभीर एवं आपातकालीन मरीजों के उपचार में चिकित्सकों को काफी सहायता मिलेगी।
इस अवसर पर डॉ मधुमिता मूर्ति, डॉ. भावना रायजादा, डॉ. प्रमोद जायसवाल, डॉ. तरुण सिंह, डॉ संजय गिल्ले, डॉ सोमेश शुक्ला डॉ रौनक चौबे, डॉ हिमांशु राजपूत आशुतोष शर्मा, अर्जुन सिदार, गरिमा पाण्डेय सहित सिम्स के चिकित्सक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
सिम्स में इन अत्याधुनिक मशीनों का विधिवत शुभारंभ संस्थान में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। 15 अगस्त को की गई घोषणा के बाद अब मशीनों के शुरू होने से संभाग के मरीजों को सरकारी अस्पताल में ही आधुनिक ऑपरेशन सुविधा मिलने लगेगी।

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