

भोजली महोत्सव… छत्तीसगढ़िया फ्रेंडशिप डे के रूप में मिलेगी सदियों पुरानी मितान परंपरा को नई पहचान
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की सदियों पुरानी भोजली लोकपरंपरा को नई पहचान देने और मितान-गोंया जैसे आत्मीय रिश्तों के सांस्कृतिक संदेश को देश-दुनिया तक पहुंचाने के उद्देश्य से बिलासपुर में इस बार भोजली महोत्सव का आयोजन बड़े स्तर पर किया जा रहा है। अगुवाही जन कल्याण समिति, बिलासपुर की ओर से 29 अगस्त 2026, शनिवार को शनिचरी रपटा चौक, चांटीडीह स्थित अरपा नदी तट पर भव्य भोजली महोत्सव एवं प्रतियोगिता होगी। आयोजन दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक चलेगा, जबकि सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक प्रस्तावित है।
आयोजकों ने भोजली को केवल एक पारंपरिक पर्व के बजाय छत्तीसगढ़ की अपनी ‘Friendship Day’ परंपरा के रूप में देश के सामने रखने की पहल की है। उनका कहना है कि दुनिया में दोस्ती के लिए एक दिन निर्धारित है, लेकिन छत्तीसगढ़ में मितान और गोंया बनने की परंपरा पीढ़ियों से सामाजिक जीवन का हिस्सा रही है। भोजली के माध्यम से बनने वाला यह रिश्ता सामान्य मित्रता से आगे बढ़कर विश्वास, आत्मीयता और जीवनभर साथ निभाने की भावना का प्रतीक माना जाता है।
भोजली से जुड़ेंगे दोस्ती, संस्कृति और सामाजिक समरसता के तार
भोजली महोत्सव का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता कराना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना भी है। आयोजन में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवतियां और युवा पारंपरिक वेशभूषा में भोजली लेकर शामिल होंगे। लोकगीतों, पारंपरिक नृत्य, बाजे-गाजे और सामूहिक सहभागिता के बीच भोजली विसर्जन किया जाएगा।
आयोजकों के मुताबिक इस आयोजन के जरिए सामाजिक एकता, आपसी भाईचारा, प्रकृति के प्रति सम्मान और छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया जाएगा। साथ ही लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक पहनावा और मितान परंपरा को बड़े सांस्कृतिक मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास होगा।
‘छत्तीसगढ़िया Friendship Day’ का दिया जाएगा संदेश
आयोजन के संयोजक एवं संस्थापक विष्णु यादव, जो पूर्व पार्षद, नगर निगम बिलासपुर और जिला योजना समिति बिलासपुर के सदस्य भी हैं, ने कहा कि भोजली छत्तीसगढ़ की मिट्टी में रची-बसी दोस्ती और सामाजिक समरसता की परंपरा है।
उन्होंने कहा कि दुनिया ‘Friendship Day’ मनाती है, लेकिन छत्तीसगढ़ में मितान और गोंया की दोस्ती पीढ़ियों से निभाई जाती रही है। इसी अनूठी परंपरा को ‘छत्तीसगढ़िया Friendship Day’ के सांस्कृतिक संदेश के साथ देश और दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि महोत्सव के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने के साथ छत्तीसगढ़ की लोककला और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास है।
प्रतियोगिता में परंपरा के साथ प्रस्तुति भी होगी कसौटी
महोत्सव में भोजली प्रतियोगिता विशेष आकर्षण रहेगी। इसमें अलग-अलग टोलियां अपनी भोजली लेकर शामिल होंगी। प्रतियोगिता में कुल 50 अंकों के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा।
प्रतियोगिता के लिए प्रमुख मापदंड इस प्रकार रखे गए हैं—
भोजली पारंपरिक ढंग से तैयार की गई हो तथा उसकी ऊंचाई और स्वरूप निर्धारित मानकों के अनुरूप हो।
टोली में 15 या उससे अधिक महिलाएं शामिल हों।
भोजली के पारंपरिक गीत छत्तीसगढ़ी भाषा में प्रस्तुत किए जाएं।
टोली में बाजे-गाजे और नृत्य के साथ प्रस्तुति हो।
प्रतिभागी पारंपरिक श्रृंगार और वेशभूषा में हों।
भोजली पहुंचने के बाद ही प्रतियोगिता से संबंधित मूल्यांकन किया जाएगा; आयोजकों के अनुसार इसके लिए अलग से किसी अतिरिक्त प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी।

विजेताओं पर होगी पुरस्कारों की बारिश
भोजली महोत्सव में प्रतिभागियों को आकर्षित करने के लिए आकर्षक पुरस्कार रखे गए हैं। आयोजकों द्वारा घोषित पुरस्कारों में प्रथम पुरस्कार ₹21,000, द्वितीय पुरस्कार ₹17,000 और तृतीय पुरस्कार ₹15,000 शामिल हैं। इसके अलावा अन्य पुरस्कारों और सांत्वना पुरस्कारों की भी व्यवस्था की गई है।
आयोजन सामग्री में अलग-अलग श्रेणियों के लिए ₹12,000, ₹10,000, ₹7,000, ₹5,000, ₹3,000, ₹2,000, ₹1,500 और ₹1,000 तक के पुरस्कारों का उल्लेख किया गया है।
युवाओं के लिए भोजली का नया अंदाज : राखी यादव
इस बार महोत्सव में युवाओं को जोड़ने के लिए पारंपरिक कार्यक्रमों के साथ आधुनिक गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। आयोजन में ‘Youth Engagement Zone’ विशेष आकर्षण रहेगा। इसके तहत युवाओं के लिए—
डिजिटल मिलान मीट
‘परंपरा भी, ट्रेंड भी’
Live Music & Dance – ‘भोजली वाइब्स’
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स एवं कंटेंट क्रिएटर्स मीट
गेम जोन
ट्रेंड हंट
भोजली लुक्स, रील्स एवं प्रस्तुतियां
‘मितान ऑफ द ईयर’
जैसी गतिविधियां प्रस्तावित हैं।
इस पहल के जरिए आयोजकों का लक्ष्य है कि भोजली केवल बुजुर्गों या ग्रामीण अंचलों तक सीमित पारंपरिक पर्व न रह जाए, बल्कि मोबाइल, सोशल मीडिया और डिजिटल दौर की युवा पीढ़ी भी इससे जुड़े और अपनी लोकसंस्कृति को आधुनिक माध्यमों से आगे बढ़ाए।
अरपा तट पर दिखेगा छत्तीसगढ़ी संस्कृति का रंग : राखी यादव
शनिचरी रपटा चौक और अरपा नदी तट पर होने वाले इस आयोजन में एक ओर पारंपरिक भोजली, लोकगीत और नृत्य का रंग देखने मिलेगा तो दूसरी ओर युवाओं के लिए आधुनिक गतिविधियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। आयोजकों की कोशिश है कि महोत्सव के जरिए परंपरा और आधुनिकता को एक मंच पर लाया जाए
आयोजकों ने इसे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर भोजली पर्व को बचाए रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास बताया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की सोच के अनुरूप यह आयोजन लोकपरंपरा को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है।
आयोजन एक नजर में
आयोजन: भोजली महोत्सव एवं प्रतियोगिता-2026
दिनांक: 29 अगस्त 2026, शनिवार
समय: दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक
सांस्कृतिक कार्यक्रम: सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक
स्थान: शनिचरी रपटा चौक, चांटीडीह, अरपा नदी तट, बिलासपुर
आयोजक: अगुवाही जन कल्याण समिति, बिलासपुर
संयोजक/संस्थापक: विष्णु यादव



