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नगरीय प्रशासन सचिव सोनमणि बोरा की पहल से तेज होगी बस सेवा, बिलासपुर में जल्द पटरी पर आएगी ई-बस व्यवस्था

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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रायपुर/बिलासपुर। बिलासपुर में लंबे समय से प्रतीक्षित ई-बस सेवा को अब गति मिलने की उम्मीद है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने प्रधानमंत्री ई-बस योजना की समीक्षा करते हुए ऐसी रूट प्लानिंग तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें यात्रियों की सुविधा, शहर की जरूरत और प्रमुख संस्थानों तक बेहतर कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी जाएगी। उनकी पहल से बिलासपुर समेत प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में ई-बस संचालन की तैयारियों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की दिशा साफ हुई है। ई-बसों के रूट में स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, प्रमुख दर्शनीय स्थल और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को जोड़ने के साथ यात्री आवागमन का सर्वे कराया जाएगा। वहीं बस स्टॉप, किराया और तकनीक आधारित यात्री सुविधाओं की भी विस्तृत योजना तैयार होगी।
प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने सोमवार को मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर प्रधानमंत्री ई-बस योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं और 15वें वित्त आयोग के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमित अग्रवाल भी मौजूद रहे। बैठक में योजनाओं की व्यवहारिकता, वित्तीय पक्ष, समयबद्ध क्रियान्वयन और आम नागरिकों को मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ पर विशेष जोर दिया गया।
बिलासपुर में ई-बस के लिए रूट प्लानिंग होगी अहम
प्रमुख सचिव ने प्रधानमंत्री ई-बस योजना के तहत शहरों में बस संचालन को व्यवस्थित, सुविधाजनक और अधिक जनोपयोगी बनाने के लिए व्यापक रूट प्लान तैयार करने को कहा। रूट तय करते समय केवल प्रमुख सड़कों को आधार बनाने के बजाय स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, प्रमुख दर्शनीय स्थल और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को नेटवर्क में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसका उद्देश्य शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी तैयार करना और अधिक से अधिक लोगों को सार्वजनिक परिवहन से जोड़ना है। प्रस्तावित रूटों की व्यवहारिकता, यात्रियों की आवाजाही और कनेक्टिविटी का आकलन करने के लिए विस्तृत सर्वे प्लान भी तैयार किया जाएगा।
बस स्टॉप भी जरूरत के हिसाब से, PPP मॉडल पर जोर
ई-बस सेवा में बस स्टॉप की व्यवस्था को भी महत्वपूर्ण माना गया है। प्रमुख सचिव ने पीपीपी मॉडल के आधार पर बस स्टॉप्स की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। बस स्टॉप कहां बनाए जाएं, इसका निर्धारण केवल उपलब्ध स्थान के आधार पर नहीं बल्कि यात्रियों की वास्तविक जरूरत और सुविधा को ध्यान में रखकर करने को कहा गया है।
ई-बसों के किराए को लेकर भी आम यात्रियों की भुगतान क्षमता का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए युक्तिसंगत और सुविधाजनक किराया निर्धारित करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है, ताकि आधुनिक सार्वजनिक परिवहन सेवा आम नागरिकों की पहुंच में रहे।
तकनीक से जुड़ेंगी बस और यात्री सुविधाएं
प्रमुख सचिव ने ई-बस योजना को आधुनिक और नागरिक केंद्रित बनाने के लिए नवीन तकनीकों के प्रभावी इस्तेमाल पर जोर दिया। बस रूट, बस स्टॉप, बसों की उपलब्धता और यात्री सुविधाओं से जुड़ी व्यवस्थाओं को तकनीक आधारित बनाने की कार्ययोजना तैयार होगी। उद्देश्य यात्रियों को सुगम, सुरक्षित और बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है।
30 सितंबर तक पूरे करने होंगे पीएम आवास के अधूरे मकान
बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के निर्माणाधीन आवासों को लेकर भी कड़ा निर्देश दिया गया। प्रमुख सचिव ने कहा कि मिशन अवधि की अंतिम निर्धारित तिथि 30 सितंबर 2026 तक सभी प्रगतिरत आवासों को पूरा कराया जाए।
इसके लिए नगरीय निकायों में शेष और निर्माणाधीन आवासों की संख्या के आधार पर साप्ताहिक लक्ष्य निर्धारित कर विशेष ड्राइव चलाने और निर्माण कार्य को मिशन मोड में पूरा करने के निर्देश दिए गए। प्रत्येक नगरीय निकाय में आवास निर्माण की प्रगति की नियमित समीक्षा होगी। जहां काम धीमी गति से चल रहा है, वहां संबंधित विभागों के बीच समन्वय कर निर्माण में तेजी लाई जाएगी।
कलेक्टरों को भी तय करना होगा लक्ष्य
जिला कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में शेष आवासों को पूरा कराने के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने और लगातार समीक्षा करने को कहा गया है। जिला प्रशासन और नगरीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से लंबित आवासों को तय समय में पूरा कराया जाएगा।
आवास निर्माण में आने वाली तकनीकी, प्रशासनिक और अन्य समस्याओं की समयबद्ध पहचान कर उनका निराकरण करने के निर्देश भी दिए गए। वहीं हितग्राही के आवास निर्माण की वास्तविक प्रगति के आधार पर योजना के प्रावधानों के अनुसार किस्त की राशि समय पर जारी करने को कहा गया, ताकि आर्थिक सहायता मिलने में देरी न हो और निर्माण की गति बनी रहे।
कचरे से बिजली बनाने की योजना में पहले देखेंगे आर्थिक व्यवहार्यता
स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना को लेकर भी बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। चिन्हित क्लस्टरों, उनकी तकनीकी व्यवहार्यता और वित्तीय पक्ष का परीक्षण किया गया।
प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि कचरे से ऊर्जा उत्पादन की परियोजनाएं ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक और प्रभावी प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं, लेकिन इनके लिए तकनीकी व्यवहार्यता के साथ लंबी अवधि की वित्तीय स्थिरता भी सुनिश्चित करनी होगी।
परियोजनाओं से राज्य सरकार और नगरीय निकायों पर पड़ने वाले संभावित वित्तीय दायित्व का समग्र आकलन करने के निर्देश दिए गए। भविष्य में संचालन और अन्य आवश्यकताओं के लिए कितने वित्तीय संसाधनों की जरूरत होगी, इसका यथार्थपरक अनुमान तैयार किया जाएगा। परियोजना आगे बढ़ाने से पहले राज्य सरकार पर पड़ने वाले संभावित दीर्घकालिक वित्तीय भार का स्पष्ट आकलन करने पर जोर दिया गया, ताकि वित्तीय मॉडल व्यवहारिक और टिकाऊ हो।
PPP मॉडल में निजी कंपनियों की क्षमता और निवेश रुचि भी जांचेंगे
वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल के तहत निजी क्षेत्र की संभावित भागीदारी पर भी चर्चा हुई। प्रमुख सचिव ने सक्षम और अनुभवी निजी भागीदारों की उपलब्धता, परियोजना में निवेश को लेकर उनकी रुचि और उनकी अपेक्षाओं का विस्तृत आकलन करने के निर्देश दिए।
राज्य सरकार, नगरीय निकाय और निजी क्षेत्र के बीच जिम्मेदारियों और वित्तीय सहभागिता का संतुलित निर्धारण करने पर जोर दिया गया, ताकि परियोजना केवल शुरू ही न हो बल्कि लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ भी बनी रहे। प्रस्ताव को जल्द अंतिम रूप देकर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
15वें वित्त आयोग की राशि से बिखरे नहीं, योजनाबद्ध विकास पर जोर
बैठक में 15वें वित्त आयोग से प्राप्त राशि के इस्तेमाल को लेकर भी प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों में उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय जरूरतों का आकलन कर प्राथमिकता के आधार पर कार्यों की योजना बनाई जाए, ताकि सीमित राशि का अधिकतम और प्रभावी उपयोग हो सके।
सड़कें टुकड़ों में नहीं, पूरे शहर की जरूरत देखकर बनें
प्रमुख सचिव ने विशेष रूप से सड़कों की प्लानिंग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण और उन्नयन के कार्य अलग-अलग और बिखरे हुए तरीके से करने के बजाय शहर की समग्र अधोसंरचना और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजनाबद्ध तरीके से किए जाएं।
सड़क से जुड़े कामों में क्षेत्र की आवश्यकता, यातायात दबाव, कनेक्टिविटी और वर्तमान स्थिति का आकलन कर प्राथमिकता तय करने को कहा गया है।
हर वार्ड की जरूरत का होगा गैप एनालिसिस
नगरीय निकायों में सैचुरेशन आधारित विकास पर भी बैठक में जोर दिया गया। इसका मतलब यह है कि किसी क्षेत्र में नागरिकों को जरूरी मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध हैं या नहीं, इसका आकलन कर शेष कमियों को दूर करने की योजना बनाई जाएगी।
इसके लिए गैप एनालिसिस तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और अन्य आवश्यक शहरी अधोसंरचना की कमियों को चिन्हित किया जाएगा। इसके बाद जरूरत और प्राथमिकता के आधार पर कार्यों का चयन होगा।
अधिकारियों को योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा में पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में साफ किया गया कि विकास योजनाओं में जनसुविधा, समग्र प्लानिंग, समयबद्धता, वित्तीय व्यवहार्यता और दीर्घकालिक स्थिरता को प्राथमिकता दी जाए। बिलासपुर में ई-बस सेवा को लेकर रूट, सर्वे, बस स्टॉप, किराया और तकनीकी व्यवस्था पर शुरू हुई यह कवायद आने वाले समय में शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई दिशा दे सकती है।

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