चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जारी किया आदेश, 8 मेडिकल कॉलेजों में पदस्थ डॉक्टरों को नई जिम्मेदारी; पदोन्नति के साथ कई डॉक्टरों का तबादला
रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ शासन के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने राज्य के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में कार्यरत 55 सहायक प्राध्यापकों को सह प्राध्यापक के पद पर पदोन्नत किया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 25 अगस्त 2026 को इसका आदेश जारी किया। पदोन्नति के साथ बड़ी संख्या में डॉक्टरों की नई पदस्थापना भी की गई है। वहीं बिलासपुर के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से जुड़े कई डॉक्टरों को पदोन्नति के बाद भी बिलासपुर में ही पदस्थ रखा गया है।
शासन के आदेश के मुताबिक पदोन्नत किए गए सहायक प्राध्यापकों को वेतनमान लेवल-18, 1,23,900-2,17,100 रुपये में सह प्राध्यापक के पद पर पदोन्नत किया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी पदोन्नतियां आगामी आदेश तक दर्शाए गए पदस्थापना स्थल पर प्रभावी रहेंगी।
बिलासपुर के इन डॉक्टरों को पदोन्नति
बिलासपुर के लिए जारी सूची में विभिन्न विभागों के कई डॉक्टरों के नाम शामिल हैं। इनमें फार्माकोलॉजी विभाग की डॉ. मोनिका साहू, मेडिसिन विभाग के डॉ. नवनीत कुमार अग्रहरी, निश्चेतना विभाग के डॉ. यश तिवारी, चर्म एवं रतिज रोग विभाग की डॉ. संगीता सिंह, शिरोरोग विभाग की डॉ. अमिता चंद्राकर तथा रेडियोथेरेपी विभाग के डॉ. हेम टंडन शामिल हैं। इसके अलावा सर्जरी विभाग के डॉ. विनोद ताम्रकार को भी पदोन्नति दी गई है।
इनमें कुछ डॉक्टरों की पदोन्नति के बाद पदस्थापना बिलासपुर में ही रखी गई है, जबकि कुछ डॉक्टरों को राज्य के अन्य शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में नई जिम्मेदारी दी गई है।
अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में नई पदस्थापना
आदेश में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, कांकेर, महासमुंद, जगदलपुर, राजनांदगांव, अंबिकापुर और रायगढ़ सहित शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में पदोन्नत डॉक्टरों की पदस्थापना की गई है। विभागवार सूची में फॉरेंसिक, फार्माकोलॉजी, एनाटॉमी, माइक्रोबायोलॉजी, फिजियोलॉजी, पैथोलॉजी, मेडिसिन, स्त्री एवं प्रसूति रोग, ईएनटी, सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, निश्चेतना, चर्म एवं रतिज रोग, शिरोरोग, बायोकेमिस्ट्री, रेडियोथेरेपी, टीबी एवं चेस्ट तथा प्लास्टिक सर्जरी विभाग के चिकित्सक शामिल हैं।
आदेश की प्रमुख शर्तें
शासन ने पदोन्नति आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि पदोन्नति आदेश जारी होने की तारीख से 10 दिनों के भीतर कार्यभार ग्रहण नहीं करने की स्थिति में पदोन्नति स्वतः निरस्त मानी जाएगी। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी को आगामी एक वर्ष के लिए पदोन्नति से डिबार किया जाएगा।
इसके अलावा पदोन्नति का विषय उच्च न्यायालय में लंबित आरक्षण संबंधी याचिकाओं में पारित निर्णय के अधीन रहेगा। आदेश में WP(PIL) No. 91/2019, WPs No. 9778/2019 सहित अन्य संबंधित याचिकाओं का उल्लेख किया गया है।
विभागवार पदोन्नति से बढ़ेगी विशेषज्ञ सेवाओं की क्षमता
चिकित्सा शिक्षा विभाग के इस आदेश को राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सहायक प्राध्यापकों को सह प्राध्यापक के पद पर पदोन्नति मिलने से मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक कार्य, रेजिडेंट डॉक्टरों के प्रशिक्षण और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
शासन ने सभी संबंधित कलेक्टरों, शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों के अधिष्ठाताओं और जिला कोषालय अधिकारियों को आदेश की जानकारी देते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।







