00 कलेक्ट्रेट में चस्पा की गई है चुनाव प्रतीक की जानकारी
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ नगर निगम चुनावों में इस बार निर्दलीय मेयर और पार्षद पद के प्रत्याशियों को ‘दो पत्ती’ और सीढ़ी का चुनाव चिह्न नहीं मिलेगा। स्थानीय निर्वाचन आयोग ने पार्षद पद के लिए 40 और महापौर पद के लिए 50 प्रतीक निर्धारित किए हैं। इन प्रतीकों में सिलाई मशीन, ब्लैकबोर्ड, झूला, और नारियल फार्म जैसे विकल्प शामिल हैं। आयोग का यह कदम चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। कलेक्ट्रेट में चुनाव प्रतीक की जानकारी चस्पा भी कर दी गई है।
नगरपालिका चुनाव: महापौर पद के निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए प्रतीक तय

नगरपालिका निगम, नगर पंचायत और नगरपालिकाओं में महापौर और अध्यक्ष पद के चुनावों के लिए निर्दलीय उम्मीदवारों के प्रतीकों की सूची जारी कर दी गई है। ये प्रतीक उन उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं जो बिना किसी राजनीतिक दल के चुनाव लड़ रहे हैं।
निर्दलीय उम्मीदवारों को मतदाताओं तक अपनी पहचान पहुंचाने के लिए स्लेट, कांच का गिलास, ट्यूब लाइट, स्टूल, रोड रोलर, चिमनी, बांसुरी, माइक, बटुआ, और अंगूर जैसे प्रतीकों में से एक आवंटित किया जाएगा। इस सूची में कुल 99 प्रतीकों को शामिल किया गया है, जिनमें प्रेशर कुकर, हारमोनियम, टायर, छड़ी, और इंट जैसे सामान्य प्रतीक भी हैं।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक उम्मीदवार को एक ही प्रतीक आवंटित किया जाएगा, ताकि मतदाताओं को भ्रमित होने से बचाया जा सके। निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए प्रतीक उनके अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं, क्योंकि इन्हीं के माध्यम से वे मतदाताओं के बीच अपनी पहचान बनाते हैं।
पार्षद पद के निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए 40 चुनाव चिन्ह

19 दिसंबर 2024 को जारी छत्तीसगढ़ राजपत्र के अनुसार, पार्षद पद के लिए निर्दलीय उम्मीदवारों को सिलाई मशीन, ब्लैकबोर्ड, टेलीफोन, बिजली का खंभा, हाथ गाड़ी, कढ़ाई, झूला, नारियल फार्म, चारपाई, और हेलमेट जैसे प्रतीक आवंटित किए जाएंगे। इस बार सूची में कुल 40 प्रतीकों को शामिल किया गया है।
‘दो पत्ती’ पिछले चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों की पहली पसंद मानी जाती थीं, क्योंकि ये प्रतीक मतदाताओं को आसानी से याद रह जाते थे। हालांकि, इस बार आयोग ने इन्हें हटा दिया है। इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि इन प्रतीकों का इस्तेमाल अक्सर प्रमुख राजनीतिक दलों के चिह्नों से मिलता-जुलता होने की वजह से भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है।
निर्दलीय उम्मीदवारों को अब अपनी रणनीति को इन नए प्रतीकों के आधार पर तैयार करना होगा। लोकप्रिय प्रतीकों की अनुपस्थिति में, उम्मीदवारों को सिलाई मशीन, टेलीफोन, कटहल, कढ़ाई और झूले जैसे प्रतीकों से अपनी पहचान बनाने पर जोर देना होगा।आयोग का कहना है कि प्रतीकों का चयन उम्मीदवारों को समान अवसर प्रदान करने और मतदाताओं को स्पष्ट विकल्प देने के लिए किया गया है। चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। अब देखना यह है कि उम्मीदवार इन नए प्रतीकों के साथ जनता का विश्वास कैसे जीतते हैं।





