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छत्तीसगढ़ : ईसा मसीह पर की विवादित टिप्पणी, कोर्ट के आदेश पर भाजपा विधायक रायमुनि भगत के खिलाफ fir

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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00 10 जनवरी को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय ने भगत को पक्ष रखने कहा

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर क्षेत्र की बीजेपी विधायक, रायमुनि भगत, ने कुछ  दिनों पहले  ईसा मसीह पर विवादास्पद टिप्पणी करने का आरोप लगा था, जिससे व्यापक आक्रोश उत्पन्न हुआ। उनकी टिप्पणी के बाद, विभिन्न धार्मिक संगठनों और समुदायों ने विरोध प्रदर्शन किए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की, लेकिन पुलिस ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इसे लेकर 10 दिसंबर 2024 को कोर्ट में याचिका लगाई, जिसपर कोर्ट ने उनके खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया। इसके बाद उनके खिलाफ स्थानी थाने में प्राथमिक की दर्ज की गई है। साथी भगत को कोर्ट ने 10 जनवरी को अपना पक्ष रखने का समय दिया है।

पुलिस ने इस मामले में विधायक भगत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। उन पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने और समाज में अशांति फैलाने के आरोप लगाए गए हैं। विधायक ने अपने बयान पर खेद व्यक्त किया है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।

इस घटना ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। विपक्षी दलों ने विधायक की टिप्पणी की निंदा की है और उनके इस्तीफे की मांग की है। वहीं, सत्तारूढ़ दल ने मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।

धार्मिक नेताओं ने शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं और सभी को अपने शब्दों के प्रति सतर्क रहना चाहिए।

विधायक भगत के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और सभी संबंधित पक्षों से बयान ले रही है। इस बीच, जनता में इस घटना को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ लोग विधायक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि अन्य उनके माफी मांगने के बाद मामले को समाप्त करने के पक्ष में हैं।यह घटना एक महत्वपूर्ण अनुस्मारक है कि सार्वजनिक जीवन में व्यक्तियों को अपने शब्दों के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए और समाज की विविधता का सम्मान करना चाहिए। धार्मिक भावनाओं का सम्मान और सामाजिक सद्भाव बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

बयान समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं

विधायक  भगत की विवादास्पद टिप्पणी के बाद, छत्तीसगढ़ में धार्मिक सद्भाव पर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान समाज में विभाजन को बढ़ावा दे सकते हैं। धार्मिक नेताओं ने सभी समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की है। इस घटना ने राजनीतिक दलों को भी आत्ममंथन करने पर मजबूर किया है कि वे अपने नेताओं के बयानों पर कैसे नियंत्रण रखें। आम जनता में इस घटना को लेकर जागरूकता बढ़ी है और वे अपने प्रतिनिधियों से जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा कर रहे हैं।

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