00 सरकारी जमीन में होने के साथ-साथ जर्जर स्थिति में पहुंच चुका था भवन
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में प्रशासन और नगर निगम ने मिलकर एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 100 साल पुराने मिशन अस्पताल के जर्जर भवन को गिराने की कार्रवाई की। यह भवन अस्पताल का हिस्सा था और सरकारी जमीन पर बने होने के साथ-साथ जर्जर स्थिति में था।
20वीं सदी की शुरुआत में बना था
मिशन अस्पताल का यह भवन 20वीं सदी की शुरुआत में बनाया गया था। एक समय यह शहर की स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र था। हालांकि, समय के साथ भवन की स्थिति बिगड़ती चली गई और इसे उपयोग के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया गया।
कार्रवाई के मुख्य कारण:
1. सरकारी जमीन पर अतिक्रमण:
भवन सरकारी जमीन पर बना था और इसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था।
2. लीज समाप्ति:
कमिश्नर कोर्ट ने लीज समाप्ति को सही ठहराया, जिससे कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ।
3. जर्जर स्थिति:
सुरक्षा कारणों से भवन को जर्जर घोषित किया गया, जो नागरिकों के लिए खतरा बन सकता था।
10 बुलडोजर लगे हैं भवन गिराने में
संयुक्त अभियान: जिला प्रशासन और नगर निगम ने मिलकर 10 बुलडोजर की मदद से भवन गिराने का कार्य शुरू किया।
संवेदनशील हिस्से: अस्पताल के ओपीडी, आईसीयू और अन्य हिस्सों को पहले खाली कराया गया।
भारी सुरक्षा: कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया।
क्या कहना है लोगों का
स्थानीय जनता: कुछ लोगों ने इस कार्रवाई को सही ठहराया, जबकि अन्य ने इसे ऐतिहासिक महत्व को नुकसान पहुंचाने वाला कदम बताया।
विरासत विशेषज्ञ: ऐतिहासिक भवन को बचाने और इसके पुनरुद्धार की संभावना तलाशने की मांग की गई थी।
और भी जर्जर भवन है निशाने पर
100 साल पुराने मिशन अस्पताल भवन को गिराने की कार्रवाई ने शहर में एक बड़ा संदेश दिया है।
यह घटना प्रशासनिक सख्ती का उदाहरण तो है ही, साथ ही यह सवाल भी उठाती है कि क्या ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण पर पर्याप्त ध्यान दिया जा रहा है। साथी सरकारी कब्जे में बने अवैध जर्जर भवनों को गिराने की आगे भी कार्रवाई होगी।इस ऐतिहासिक भवन को गिराने से बिलासपुर शहर ने अपनी विरासत का एक हिस्सा खो दिया। हालांकि, सुरक्षा और कानूनी जरूरतों के आधार पर यह कार्रवाई अपरिहार्य मानी जा रही है।



