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2010 में पिछड़ी जाति की सूची में ओडिया जाति राजपत्र अधिसूचना पर आया, तो जाति प्रमाण पत्र 2005 में कैसे बन गया : अभय नारायण राय

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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00 प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता का आरोप

00 कठपुतली बने निर्वाचन अधिकारी, एसडीएम ने अपने इशारों पर नचाकर कांग्रेस का आपत्ति निरस्त कराया

Bilaspur बिलासपुर। भाजपा प्रत्याशी एल. पद्मजा के नामांकन पत्र में अनेकों आपत्तियां हैं मगर निर्वाचन अधिकारी मौन होकर उनका खुलेआम समर्थन कर रहे हैं। स्कूटनी के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद नायक ने जाति प्रमाण पत्र पर आपत्ती जताते हुए लिखित आवेदन प्रस्तुत किया तो निर्वाचन अधिकारी द्वारा लगातार उनके बात को शासन-प्रशासन के दबाव में काटने की कोशिश किया गया। कांग्रेस प्रत्याशी के वकील ने दबाव बनाया तो शाम 5:00 बजे तक समय दिया गया। शाम को भाजपा सरकार के दबाव में आकर निर्वाचन अधिकारी द्वारा यह बोलकर आपत्ति को खारिज कर दिया गया कि एल. पद्मजा का जाति प्रमाण पत्र जिसमें उड़िया जाती लिखा हुआ है वह सही है और मान्य है। आपत्ती निरस्त करने के लिए निर्वाचन अधिकारी मूकदर्शक जैसे बैठे रहे और एडीएम ने आपत्ती निरस्त करने का आदेश डिक्टेट कराया जिसपर निर्वाचन अधिकारी ने चुपचाप हस्ताक्षर किया। इससे यह पता चलता है कि किस स्तर पर एल. पद्मजा के जाति प्रमाण पत्र को सही साबित करने के लिए शासन और प्रशासन द्वारा निर्वाचन अधिकारी पर दबाव बनाया जा रहा है।

आपको यह भी बता दें कि कांग्रेस उम्मीदवार प्रमोद नायक द्वारा दो बार आवेदन लगाया गया कि भाजपा प्रत्याशी एल. पद्मजा के नामांकन की पूरी सत्यापित प्रतिलिपि उन्हें उपलब्ध कराया जाए जिसमें पहले आवेदन 27 जनवरी 2025 को और दूसरा आवेदन 29 जनवरी 2025 को लगाया गया था परंतु जाति प्रमाण पत्र को छोड़कर बाकी चीज उपलब्ध कराई गई इससे साफ जाहिर होता है कि सिर्फ एल. पद्मजा ही नहीं शासन भी अपने पद के दुरुपयोग और गलतियों को लीपा पोती करना चाहती है।

बड़ा सवाल : 2010 में जब उड़िया जाति को राजपत्र द्वारा शामिल किया गया तो तहसीलदार 2005 में कैसे उड़िया जाती पर जाति प्रमाण पत्र जारी कर सकता है।

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