Latest news

Wash & Wash Black Currency Scam का बड़ा खुलासा, अंतरराज्यीय गिरोह के 7 आरोपी गिरफ्तार, 4 करोड़ से अधिक नकदी जब्त

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
15 Min Read

देशभर में 100 से अधिक लोगों से अरबों रुपये की ठगी का पुलिस का दावा; 2005 से सक्रिय गिरोह का पर्दाफाश, पुणे के खंडाला स्थित रिसॉर्ट में करोड़ों की ठगी करते रंगे हाथों पकड़े गए आरोपी
रायपुर। राजधानी रायपुर में सामने आए 1.13 करोड़ रुपये के ठगी मामले की जांच करते हुए रायपुर कमिश्नरेट पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो कथित तौर पर “Wash & Wash/Black Currency Scam” के नाम पर लोगों को रकम दोगुनी करने का झांसा देकर लंबे समय से ठगी करता आ रहा था। एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा थाना तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गिरोह के 7 अंतरराज्यीय आरोपियों को पुणे से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से 4 करोड़ रुपये से अधिक की नगदी, 17 मोबाइल फोन, नोट के आकार का काला पेपर, कांच की प्लेट्स, अन्य सामग्री और दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
इस मामले में पुलिस पहले ही दो महिला आरोपियों को नागपुर, महाराष्ट्र से गिरफ्तार कर चुकी है। इस तरह प्रकरण में अब तक कुल 9 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस के अनुसार गिरोह के कुछ अन्य सदस्य अभी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।
1.13 करोड़ की ठगी से खुला करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का राज
मामला थाना तेलीबांधा के अपराध क्रमांक 330/2026, धारा 318(4), 61(2) बीएनएस से जुड़ा है। रायपुर में प्रार्थी को निशाना बनाकर आरोपियों ने 1.13 करोड़ रुपये की ठगी की थी। शिकायत के बाद एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और थाना तेलीबांधा पुलिस ने जांच शुरू की।
जांच के शुरुआती चरण में पुलिस ने कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय, पति शुभम पांडेय, उम्र 24 वर्ष, निवासी राजरहाट गोपालपुर थाना न्यू टाउन, हथियारा इसानपल्ली, कोलकाता तथा दीपिका पॉलीवाल, पिता उमाशंकर पालीवाल, उम्र 24 वर्ष, निवासी आनंद विहार मॉली कॉलोनी, उदयपुर, राजस्थान को नागपुर से गिरफ्तार किया था।
दोनों के कब्जे से प्रकरण से संबंधित 3 मोबाइल फोन, 26 हजार रुपये नगद, एटीएम कार्ड और आधार कार्ड, कुल लगभग 70 हजार रुपये की सामग्री जब्त की गई थी।
यहीं से पुलिस को गिरोह के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने का महत्वपूर्ण सुराग मिला।
मोबाइल चैट और डिजिटल सबूतों ने खोला पूरा नेटवर्क
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से उनके संपर्कों, गिरोह में उनकी भूमिका और अन्य संलिप्त आरोपियों के बारे में विस्तृत पूछताछ की। इसके साथ ही जब्त मोबाइल फोन में मौजूद डिजिटल सामग्री का तकनीकी परीक्षण कराया गया।
साइबर टीम ने मोबाइल में मिले चैट, संपर्क नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण किया। इस दौरान आरोपियों के बीच संपर्क और मामले में उनकी भूमिका से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं।
डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने गिरोह के अन्य सदस्यों को ट्रेस करते हुए उन्हें पुणे में लोकेट किया।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस की संयुक्त टीम तत्काल पुणे रवाना हुई और वहां करीब एक सप्ताह तक कैंप कर आरोपियों की गतिविधियों तथा संभावित ठिकानों पर निगरानी रखी।
खंडाला के रिसॉर्ट में चल रहा था करोड़ों की ठगी का खेल
पुलिस को इनपुट मिला कि आरोपी पुणे के खंडाला स्थित एक रिसॉर्ट में मौजूद हैं। टीम ने ठिकाने की निगरानी के बाद वहां रेड की।
रेड के दौरान पुलिस ने 7 आरोपियों को मौके पर पकड़ लिया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी वाराणसी निवासी एक व्यक्ति को रकम दोगुनी करने का लालच देकर रिसॉर्ट बुला चुके थे। पीड़ित अपने साथ करोड़ों रुपये लेकर वहां पहुंचा था और रकम दोगुनी होने के लालच में वह पैसा आरोपियों को सौंप चुका था।
पुलिस टीम ने आरोपियों को पीड़ित से रकम प्राप्त कर कथित तौर पर ठगी करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।
इसके बाद सभी 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
4 करोड़ से ज्यादा कैश…17 मोबाइल और काले नोट जैसे पेपर मिले
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बरामद सामग्री की सूची में 4 करोड़ रुपये से अधिक की नगदी बताई है।
इसके अलावा:
17 मोबाइल फोन
नोट के आकार का काला पेपर
कांच की प्लेट्स
अन्य सामग्री
महत्वपूर्ण दस्तावेज
जब्त किए गए हैं।
आरोपियों को पुणे से ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाकर मामले में आगे की कार्रवाई की गई।
2005 से सक्रिय होने का दावा, 100 से ज्यादा लोगों को बनाया शिकार
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने छत्तीसगढ़ के अलावा नोएडा, पुणे, बड़ौदा, उदयपुर, दिल्ली तथा देश के विभिन्न राज्यों और शहरों में इसी तरह की ठगी की घटनाओं को अंजाम देना बताया है।
पुलिस के मुताबिक, जांच में यह जानकारी भी सामने आई है कि गिरोह वर्ष 2005 से सक्रिय है और अब तक देश के अलग-अलग हिस्सों में 100 से अधिक लोगों से अरबों रुपये की ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
गिरोह खास तौर पर ऐसे लोगों को निशाना बनाता था, जो कम समय में बड़ी रकम कमाने अथवा अपनी रकम दोगुनी करने के लालच में आसानी से झांसे में आ सकते थे।
“दाऊद ग्रुप” से कनेक्शन का दावा कर बनाते थे दबदबा
पुलिस के अनुसार, आरोपियों द्वारा लोगों पर प्रभाव बनाने के लिए खुद को “डी ग्रुप कंपनी (दाऊद ग्रुप)” से जुड़ा हुआ बताया जाता था।
गिरोह के सदस्यों को उनकी कथित भूमिका के अनुसार अलग-अलग नामों से संबोधित किया जाता था। इनमें “कैप्टन” और “बड़े सर” जैसे नाम शामिल थे।
ठगी से प्राप्त रकम का कथित तौर पर सदस्यों के बीच प्रतिशत के आधार पर बंटवारा किया जाता था।
पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए आरोपी खुद को प्रभावशाली बताने के साथ बड़े नेताओं और फिल्मी कलाकारों के साथ अपनी तस्वीरें भी दिखाते थे।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के मुख्य भूमिका वाले आरोपी अपने साथ निजी गनमैन भी रखते थे, ताकि पीड़ितों पर प्रभाव और दबाव बनाया जा सके।
5 स्टार होटलों में बुलाते, फिर करोड़ों की डील
पुलिस के मुताबिक, गिरोह का नेटवर्क देश के कई बड़े शहरों तक फैला था। पीड़ितों को दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, हैदराबाद, हरियाणा, आगरा, राजस्थान, गुजरात और नागपुर सहित अलग-अलग शहरों के 5 स्टार होटलों में बुलाया जाता था।
महंगे होटल, प्रभावशाली लोगों के साथ तस्वीरें, निजी सुरक्षा और बड़े-बड़े दावों के जरिए पीड़ितों के मन में आरोपियों की मजबूत छवि बनाई जाती थी।
इसके बाद उनसे बड़ी रकम हासिल करने के लिए रकम दोगुनी करने, निवेश पर भारी फायदा दिलाने या काले नोट को असली मुद्रा में बदलने जैसे दावे किए जाते थे।
ऐसे चलता था “Wash & Wash” का पूरा खेल
पुलिस के अनुसार, आरोपियों का तरीका बेहद सुनियोजित था।
सबसे पहले वे खुद को प्रभावशाली व्यक्तियों और विदेशी निवेशकों से जुड़ा हुआ बताते थे। इसके बाद किसी कंपनी में बड़ा निवेश या फंड स्वीकृत कराने की बात कही जाती थी।
पीड़ित को विश्वास में लेने के लिए उसे बताया जाता था कि इस काम में:
बड़े अधिकारियों से बैठक
फाइल प्रोसेसिंग
सुरक्षा स्वीकृति
विदेशी परीक्षण
हाई-पावर केमिकल
विदेशी तकनीक
अन्य तकनीकी औपचारिकताएं
जरूरी हैं।
इन बहानों के जरिए पीड़ित से अलग-अलग चरणों में रकम मांगी जाती थी।
काले कागज को नोट में बदलने का नकली प्रदर्शन
गिरोह की ठगी का सबसे बड़ा हिस्सा कथित “Wash & Wash/Black Currency Scam” तकनीक से जुड़ा था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी पीड़ित को नकली केमिकल और कथित विशेष रासायनिक प्रक्रिया का प्रदर्शन दिखाते थे। दावा किया जाता था कि काले रंग से ढके नोटों को विशेष केमिकल और विदेशी तकनीक की मदद से असली भारतीय मुद्रा में बदला जा सकता है।
पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए आरोपियों द्वारा पहले से तैयार असली नोटों का इस्तेमाल कर नकली रासायनिक प्रक्रिया का प्रदर्शन किया जाता था।
यानी पूरा प्रदर्शन इस तरह तैयार किया जाता था कि पीड़ित को यह विश्वास हो जाए कि वास्तव में काले नोटों को असली नोट में बदला जा सकता है।
कभी केमिकल, कभी विदेशी टेस्ट…किश्तों में लेते थे पैसा
एक बार पीड़ित के विश्वास में आने के बाद ठगी का अगला चरण शुरू होता था।
आरोपी कभी कहते कि विदेश से केमिकल मंगाना है, कभी हाई-पावर केमिकल खरीदना है, कभी विदेशी परीक्षण कराना है, तो कभी वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति और फंड रिलीज की औपचारिकता का हवाला देते थे।
इसके बाद पीड़ित से अलग-अलग किश्तों में लगातार रकम ली जाती थी।
इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य पीड़ित को लंबे समय तक भरोसे में रखते हुए अधिक से अधिक धनराशि हासिल करना था।
गिरोह के 3 मुख्य चेहरे
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के मुख्य सरगना बताए गए हैं:
ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ “योगी”
गिरोह के प्रमुख लोगों में शामिल।
प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ “कैप्टन” उर्फ “शेट्टी” उर्फ “रेड्डी”
पुलिस के अनुसार गिरोह में “कैप्टन” की भूमिका निभाता था।
मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ “बड़े सर”
गिरोह में “बड़े सर” के रूप में भूमिका निभाने वाला आरोपी।
पुलिस के अनुसार गिरोह में अन्य सदस्यों की भी अलग-अलग भूमिकाएं निर्धारित थीं और सभी आरोपी अपनी भूमिका के अनुसार काम करते थे।
दो मुख्य आरोपी पहले भी जेल जा चुके हैं
पुलिस के अनुसार आरोपी प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन उर्फ शेट्टी उर्फ रेड्डी पूर्व में भी इसी प्रकार की ठगी के मामलों में मुंबई से जेल निरुद्ध रह चुका है।
इसी तरह आरोपी मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर भी ठगी के मामलों में मुंबई और वाराणसी से जेल निरुद्ध रह चुका है।
गिरफ्तार 7 आरोपियों के नाम
01. ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, पिता रामआश्रय श्रीवास्तव, उम्र 46 वर्ष, निवासी सेक्टर 51 समस्तपुर, गुड़गांव, हरियाणा। वर्तमान पता—फ्लैट नंबर बी/205, सीडी हाईट्स, नालासोपारा, थाना नालासोपारा, मुंबई।
02. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन उर्फ शेट्टी उर्फ रेड्डी, पिता सत्यप्रकाश श्रीवास्तव, उम्र 52 वर्ष, निवासी पाण्डेयपुर लालपुर, थाना वाराणसी, उत्तरप्रदेश।
03. मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर, पिता स्व. एस.एस. लाल श्रीवास्तव, उम्र 55 वर्ष, निवासी एसएच 8/54 बी-9, शिवपुर, थाना शिवपुर, जिला वाराणसी, उत्तरप्रदेश।
04. विवेक सिंह, पिता स्व. शिवरतन सिंह, उम्र 48 वर्ष, निवासी लहौरा वीर जगतगंज, थाना चेतगंज, जिला वाराणसी, उत्तरप्रदेश।
05. शुभम पांडेय, पिता महेंद्र पांडेय, उम्र 37 वर्ष, निवासी चंदवत, थाना चंदवत, जिला जौनपुर, उत्तरप्रदेश। वर्तमान पता—ए विंग, फ्लैट नंबर 411, रॉयल पॉम अपार्टमेंट, थाना गोरेगांव, गोरेगांव ईस्ट, मुंबई।
06. योगेन्द्र चौहान, पिता स्व. रामानंद चौहान, उम्र 48 वर्ष, निवासी ग्राम सेनापुर, पोस्ट बडनपुर, थाना केराकत, जिला जौनपुर, उत्तरप्रदेश।
07. बालमुकुंद दीक्षित, पिता वेदप्रकाश दीक्षित, उम्र 40 वर्ष, निवासी ग्राम खटारा, पोस्ट भौंरा, थाना केराकत, जिला जौनपुर, उत्तरप्रदेश।
इस मामले में पहले गिरफ्तार हुईं दो महिला आरोपी
प्रकरण में पुलिस पहले ही दो महिला आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय, पति शुभम पांडेय, उम्र 24 वर्ष, निवासी राजरहाट गोपालपुर, थाना न्यू टाउन, हथियारा इसानपल्ली, कोलकाता।
दीपिका पॉलीवाल, पिता उमाशंकर पालीवाल, उम्र 24 वर्ष, निवासी आनंद विहार, मॉली कॉलोनी, उदयपुर, राजस्थान।
दोनों को नागपुर, महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया गया था। उनके कब्जे से 3 मोबाइल फोन, 26 हजार रुपये नगद, एटीएम कार्ड और आधार कार्ड सहित करीब 70 हजार रुपये मूल्य की सामग्री जब्त की गई थी।
इस प्रकार इस प्रकरण में अब तक कुल 9 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
रायपुर से पुणे तक पुलिस की पूरी कार्रवाई
रायपुर: 1.13 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया।
जांच: तेलीबांधा पुलिस और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट ने जांच शुरू की।
पहली गिरफ्तारी: नागपुर से दो महिला आरोपी पकड़ी गईं।
डिजिटल जांच: मोबाइल चैट, संपर्क नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य डिजिटल सामग्री का विश्लेषण किया गया।
लोकेशन: जांच में गिरोह के अन्य सदस्यों का पुणे में होना सामने आया।
पुणे रवाना: संयुक्त पुलिस टीम तत्काल पुणे पहुंची।
एक सप्ताह निगरानी: संभावित ठिकानों और आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई।
खंडाला रेड: रिसॉर्ट में 7 आरोपी मिले।
रंगे हाथों गिरफ्तारी: पीड़ित से करोड़ों रुपये लेने के दौरान आरोपी पकड़े गए।
बरामदगी: 4 करोड़ रुपये से अधिक नगदी समेत 17 मोबाइल और अन्य सामग्री जब्त।
रायपुर वापसी: आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया गया।
अलग-अलग राज्यों में फैला था नेटवर्क
पुलिस पूछताछ में आरोपियों द्वारा जिन स्थानों पर इस तरह की ठगी की घटनाओं को अंजाम देना बताया गया है, उनमें छत्तीसगढ़, नोएडा, पुणे, बड़ौदा, उदयपुर, दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्य और शहर शामिल हैं।
गिरोह का नेटवर्क केवल एक शहर तक सीमित नहीं था। पीड़ितों को अलग-अलग शहरों में बुलाकर उनकी आर्थिक क्षमता और विश्वास के अनुसार कथित तौर पर ठगी की जाती थी।
पुलिस की कार्रवाई जारी, अन्य आरोपी फरार
प्रकरण में शामिल कुछ अन्य आरोपी अभी फरार बताए गए हैं। पुलिस उनकी पतासाजी कर रही है और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
थाना तेलीबांधा में अपराध क्रमांक 330/2026 के तहत धारा 318(4), 61(2) बीएनएस में मामला दर्ज है।
रायपुर कमिश्नरेट पुलिस के अनुसार, एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा थाना तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में की गई।

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।