‘हमर पहुना’ में बेबाक बोले उद्योगपति—हक के लिए जरूरत पड़ी तो सड़क पर उतरेंगे; एयरपोर्ट विस्तार को बताया विकास की पहली शर्त, कहा- शांत हैं, कमजोर नहीं
बिलासपुर। “छापे की चिंता नहीं है… सरकार किसी की भी हो, बिलासपुर की उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं करेंगे।” उद्योगपति एवं समाजसेवी प्रवीण झा ने सोमवार को बिलासपुर प्रेस क्लब के प्रतिष्ठित संवाद कार्यक्रम ‘हमर पहुना’ में यह बात कहकर शहर के विकास को लेकर अपनी बेबाक राय सामने रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बिलासपुर के लोग शांत हैं, लेकिन कमजोर नहीं। यदि शहर को उसका हक नहीं मिला तो अब सिर्फ ज्ञापन और मांगों तक बात सीमित नहीं रहेगी, जरूरत पड़ी तो हक की लड़ाई सड़क पर उतरकर लड़ी जाएगी।
प्रवीण झा का यह बयान ऐसे समय में सामने आया, जब बिलासपुर के विकास की तुलना लगातार प्रदेश की राजधानी रायपुर से की जाती रही है। उन्होंने माना कि बिलासपुर में विकास हुआ है, लेकिन जिस रफ्तार से होना चाहिए था, उस गति से विकास नहीं हुआ। उनके मुताबिक अब शहर के पास बड़ा अवसर है और यदि इस अवसर का लाभ नहीं उठाया गया तो आने वाले वर्षों में इसकी कीमत शहर को चुकानी पड़ सकती है।
‘हमर पहुना’ में उन्होंने सिर्फ अपने कारोबारी सफर की कहानी नहीं सुनाई, बल्कि बिलासपुर के एयरपोर्ट, उद्योग, रोजगार, पर्यावरण, युवाओं, समाजसेवा, धर्म, शहर की सुरक्षा और भविष्य की राजनीति तक पर खुलकर बात की। कई सवालों पर उनका अंदाज सीधा और बेबाक रहा।
‘सरकार चाहे किसी की भी हो, अपना हक लेकर रहेंगे’
बिलासपुर के विकास को लेकर प्रवीण झा ने कहा कि शहर के लोग लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी जरूरतें और मांगें रखते आए हैं। लेकिन अब समय आ गया है कि शहर अपने अधिकारों को लेकर मजबूती से आवाज उठाए।
उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी दल की हो, बिलासपुर के हित से समझौता नहीं किया जा सकता।
उनका कहना था कि बिलासपुर की जनता मिल-जुलकर रहने वाली और शांतिप्रिय है, लेकिन इस शांति को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। यदि शहर के विकास के लिए सड़क पर उतरना पड़ा तो वे पीछे नहीं हटेंगे।
यही वजह रही कि कार्यक्रम में उनका सबसे चर्चित संदेश यही रहा कि बिलासपुर अब चुप बैठने वाला नहीं है।
एयरपोर्ट विस्तार—बिलासपुर के विकास की पहली जरूरत
प्रवीण झा ने बिलासपुर के विकास का अपना विजन बताते हुए एयरपोर्ट को सबसे पहली प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि बेहतर हवाई कनेक्टिविटी के बिना शहर में उद्योग, व्यापार, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार को उस स्तर तक नहीं ले जाया जा सकता, जिसकी बिलासपुर क्षमता रखता है।
उनके मुताबिक बिलासपुर में संभावनाओं की कमी नहीं है। जरूरत है तो सिर्फ बेहतर कनेक्टिविटी और मजबूत बुनियादी ढांचे की।
उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट का विस्तार होने से सिर्फ यात्रियों को सुविधा नहीं मिलेगी, बल्कि निवेशकों के लिए शहर आकर्षक बनेगा, उद्योगों को गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
‘रायपुर की तुलना में बिलासपुर की विकास गति कम रही’
शहर के विकास की तुलना रायपुर से करते हुए प्रवीण झा ने कहा कि बिलासपुर में विकास हुआ है, लेकिन रायपुर जिस गति से आगे बढ़ा, उसके मुकाबले बिलासपुर की रफ्तार अपेक्षित नहीं रही।
उन्होंने इसे सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी मानने के बजाय शहर के लोगों की भूमिका से भी जोड़ा। उनका कहना था कि बिलासपुर के लोगों को अपने शहर के अधिकार और भविष्य को लेकर ज्यादा मुखर होना होगा।
उनके मुताबिक अब बिलासपुर के पास विकास का बड़ा अवसर है और इस अवसर को हाथ से जाने नहीं देना चाहिए।
गांव में अभाव से शुरू हुआ सफर, किताब-कपड़े मांगकर पढ़े
प्रवीण झा ने ‘हमर पहुना’ में अपने निजी जीवन के संघर्ष को भी सामने रखा।
उन्होंने बताया कि उनका बचपन बिहार के एक छोटे से गांव में बेहद आर्थिक अभाव के बीच गुजरा। परिस्थितियां ऐसी थीं कि किताबें और कपड़े तक मांगकर इस्तेमाल करने पड़ते थे।
दसवीं के बाद शहर आने पर उन्होंने पहली बार बिजली देखी। पढ़ाई के लिए कई किलोमीटर पैदल जाना पड़ता था। बरसात के दिनों में नदी और नाले पार करके स्कूल पहुंचते थे।
उन्होंने कहा कि संघर्ष सफल लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा होता है। ईश्वर पहले परीक्षा लेता है और जो उस परीक्षा में सफल होता है, उसे आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
1993 में एक हजार रुपये की नौकरी, आज उद्योग जगत में पहचान
वर्ष 1993 में छत्तीसगढ़ आने के बाद प्रवीण झा ने जिंदल स्टील्स में करीब एक हजार रुपये मासिक वेतन पर नौकरी शुरू की।
बिलासपुर पहुंचने के समय उनके पास साइकिल तक नहीं थी। रेलवे स्टेशन से चार रुपये प्रतिदिन किराए पर साइकिल लेकर वे शहर में काम करते थे।
लेकिन नौकरी के शुरुआती दिनों में ही उन्होंने तय कर लिया था कि जिंदगीभर नौकरी नहीं करनी है। वे ऐसा काम करना चाहते थे जिससे सिर्फ उनका नहीं, बल्कि दूसरे लोगों का भी रोजगार खड़ा हो।
इसी सोच ने उन्हें उद्योग की ओर बढ़ाया और धीरे-धीरे उनका कारोबारी सफर आगे बढ़ता गया।
‘उद्योग सिर्फ पैसा कमाने का जरिया नहीं’
उद्योगों की भूमिका पर उन्होंने कहा कि किसी भी उद्योग का उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना नहीं होना चाहिए।
जिस गांव या क्षेत्र में उद्योग स्थापित होता है, वहां के लोगों, उनके स्वास्थ्य और पर्यावरण की जिम्मेदारी भी उद्योग संचालक की होती है।
उन्होंने कहा कि उद्योग ऐसा होना चाहिए जो स्थानीय लोगों को रोजगार दे, क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत करे और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी उद्योग के लिए स्थानीय लोगों का विश्वास और सहयोग बेहद जरूरी है।
‘समाज से लिया है तो समाज को देना भी पड़ेगा’
समाजसेवा को लेकर प्रवीण झा ने कहा कि व्यक्ति समाज से बहुत कुछ हासिल करता है। इसलिए समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारी भी होती है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने बिलासपुर और समाज से बहुत कुछ पाया है और अब समाज के लिए काम करना अपना कर्तव्य मानते हैं।
युवाओं को धर्म और संस्कार से जोड़ने पर उन्होंने कहा कि धर्म को केवल पर्व-त्योहार और रैलियों तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। 365 दिन अपने धर्म, संस्कार और समाज से जुड़े रहना चाहिए।
युवाओं को संदेश—‘हर व्यवसाय सम्मानजनक है’
युवाओं के भविष्य पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में युवा डॉक्टर, इंजीनियर और अधिकारी बनने की तैयारी करते हैं, लेकिन व्यवसाय और उद्योग की तरफ जाने की इच्छा कम दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में व्यवसायियों और उद्योगपतियों की बड़ी भूमिका है।
उन्होंने युवाओं से धैर्य और मेहनत के साथ आगे बढ़ने की अपील करते हुए कहा कि व्यवसाय छोटा या बड़ा नहीं होता। पान का ठेला लगाने वाला भी व्यवसायी है और उद्योग चलाने वाला भी।
उनके अनुसार सफलता के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है—मेहनत, लगन और धैर्य।
रामलला दर्शन यात्रा हर साल जारी रहेगी
प्रवीण झा ने बताया कि वे हर वर्ष बड़ी संख्या में लोगों के साथ अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करते हैं।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा आगे भी जारी रहेगी। पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने अगले वर्ष प्रेस क्लब के पत्रकार साथियों को भी रामलला दर्शन के लिए ले जाने का आश्वासन दिया।
आलोचना पर बोले—‘अच्छा काम करते रहिए’
आलोचनाओं को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि लोगों का काम बोलना है। व्यक्ति को अपने काम और कर्तव्य से भटकना नहीं चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति ईमानदारी से अच्छा काम करता रहेगा तो आलोचना करने वाले लोग भी एक दिन उसके काम को स्वीकार करेंगे।
राजनीति? अभी नहीं… लेकिन बिलासपुर के लिए जरूरत पड़ी तो मैदान में उतरेंगे
राजनीति में आने के सवाल पर प्रवीण झा ने कहा कि फिलहाल राजनीति उनका विषय नहीं है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बिलासपुर के विकास की उनकी कल्पना पूरी नहीं होती और उन्हें लगता है कि शहर के हित में राजनीति के माध्यम से काम करना जरूरी है, तो वे भविष्य में राजनीति में आने से पीछे नहीं हटेंगे।
यानी उन्होंने राजनीति के दरवाजे को पूरी तरह बंद नहीं किया है।
ऑपरेशन त्रिमित्र पर भी अपडेट—अगले महीने टेंडर की उम्मीद
शहर की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन त्रिमित्र को लेकर भी प्रवीण झा ने जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि योजना काफी आगे बढ़ चुकी है और आगामी महीने टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
आधुनिक सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से शहर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उनका कहना था कि तकनीक आधारित निगरानी से शहर में सुरक्षा व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकेगा।
सावन के अंतिम सोमवार ने रोका रास्ता, कार्यक्रम में पहुंचने में हुई देरी
कार्यक्रम में निर्धारित समय से कुछ विलंब से पहुंचने पर प्रवीण झा ने पत्रकार साथियों से क्षमा मांगी। उन्होंने बताया कि सावन के अंतिम सोमवार के अवसर पर उनके घर में रुद्राभिषेक चल रहा था, जिसके कारण उन्हें कार्यक्रम में पहुंचने में देरी हुई।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथि के स्वागत और सम्मान के साथ हुई। इसके बाद पत्रकारों ने उनके जीवन, संघर्ष, उद्योग, रोजगार, समाजसेवा, धर्म, युवाओं, बिलासपुर के विकास, एयरपोर्ट और शहर की सुरक्षा सहित विभिन्न मुद्दों पर सवाल किए।
प्रवीण झा ने सभी सवालों का बेबाकी से जवाब दिया।
‘हमर पहुना’ में उद्योगपति का सियासी संदेश भी साफ दिखा
प्रेस क्लब का ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम सोमवार को सिर्फ एक उद्योगपति के संघर्ष और सफलता की कहानी सुनने तक सीमित नहीं रहा। संवाद के दौरान बिलासपुर के विकास और अधिकारों को लेकर प्रवीण झा का आक्रामक तेवर चर्चा का केंद्र रहा।
छापे की चिंता नहीं, सरकार किसी की भी हो; शहर की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं— इस संदेश के साथ उन्होंने साफ कर दिया कि बिलासपुर के विकास का सवाल अब उनके लिए केवल चर्चा का विषय नहीं है।
एयरपोर्ट विस्तार से लेकर उद्योग और रोजगार तक उन्होंने शहर के विकास की अपनी प्राथमिकताएं सामने रखीं और यह भी संकेत दिया कि यदि जरूरत पड़ी तो वे सड़क से लेकर राजनीति तक, बिलासपुर के हित में किसी भी मोर्चे पर खड़े होने से पीछे नहीं हटेंगे।
कार्यक्रम के अंत में बिलासपुर प्रेस क्लब परिवार की ओर से प्रवीण झा का आभार व्यक्त किया गया। ‘हमर पहुना’ ने उद्योग जगत, समाज और पत्रकारिता के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच प्रस्तुत किया।



