00 लूट का प्लान फेल न हो, इसलिए कोरबा के व्यापारी को मार डाला
00 मुख्य आरोपी को पुलिस ने मुंबई से किया गिरफ्तार, दो पहले से ही पकड़े जा चुके
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक हाई-प्रोफाइल मर्डर ने सनसनी फैला दी, जब सराफा कारोबारी गोपाल राय की उनके घर पर बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस अपराध की साजिश का मास्टरमाइंड उनका पूर्व ड्राइवर सूरज पूरी गोस्वामी निकला, जिसने आर्थिक तंगी से परेशान होकर लूट की योजना बनाई थी। क्राइम पेट्रोल से प्रेरणा लेकर बनाई गई इस योजना ने कारोबारी की जान ले ली। पुलिस ने 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की मदद से आरोपियों को गिरफ्तार किया और साजिश का खुलासा किया।
साजिश और कैसे रची गई योजना
पूर्व ड्राइवर सूरज पूरी गोस्वामी लंबे समय से आर्थिक तंगी का सामना कर रहा था। जब नौकरी जाने के बाद परिवार की हालत और खराब हो गई, तो उसने एक खतरनाक साजिश रचने का फैसला किया। सूरज ने अपने छोटे भाई आकाश और दोस्त मोहन मिंज को इसमें शामिल किया।
साजिश की शुरुआत क्राइम पेट्रोल जैसे टीवी शो से मिली प्रेरणा से हुई। सूरज को लगा कि रात में कारोबारी के घर और दुकान से जेवर लूटने की योजना अंजाम तक पहुंचाई जा सकती है। उनका मकसद था कि घर की चाबी चुराकर दुकान में घुसें और करोड़ों के जेवरात लेकर फरार हो जाएं।
क्या हुआ वारदात की रात: लूट ने लिया हत्या का रूप
5 जनवरी की रात सूरज और मोहन ने योजना के तहत कारोबारी गोपाल राय के घर के पास छिपकर इंतजार किया। आकाश ने कारोबारी को उनके घर तक छोड़ा और चाबी का लोकेशन अपने साथियों को बता दी।
जब सूरज और मोहन घर में घुसे, तो कारोबारी ने सूरज को पहचान लिया। सूरज को यह डर सताने लगा कि पहचान उजागर होने पर पकड़ा जाएगा। इस डर ने उसे हत्या जैसा घातक कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। उसने चाकू से गोपाल राय पर हमला किया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
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भागने की कोशिश और साक्ष्य मिटाने की रणनीति
हत्या के बाद तीनों ने भागने की कोशिश की। उन्होंने कारोबारी की क्रेटा कार बालको बस्ती में छोड़ दी। अपने बचाव के लिए उन्होंने सबूत मिटाने की योजना बनाई।
अटैची, फोन, और सीसीटीवी डीवीआर को दर्री डैम में फेंक दिया। सूरज गिरफ्तारी से बचने के लिए मुंबई भाग गया, लेकिन उसकी किस्मत ने साथ नहीं दिया।
कैसे हुआ साजिश का खुलासा
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने अपनी जांच शुरू की। 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों को खंगाला गया और 80 पुलिसकर्मियों को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई। कार और घटनास्थल पर मिले खून के धब्बों और फिंगरप्रिंट से पुलिस को सुराग मिले।
पुलिस ने आकाश से पूछताछ शुरू की, जिसने शुरुआत में घटना की जानकारी होने से इनकार किया। लेकिन मोहन के हाथ पर चोट के निशान से शक बढ़ा। जब ब्लड सैंपल और फिंगरप्रिंट का मिलान हुआ, तो सच्चाई सामने आ गई।पुलिस ने पहले आकाश और मोहन को गिरफ्तार किया। इसके बाद सूरज को मुंबई के पनवेल इलाके से पकड़ा गया। पूछताछ में सूरज ने अपराध कबूल किया और बताया कि यह साजिश लालच और आर्थिक तंगी के कारण रची गई थी।



