दिल्ली। 7 जनवरी 2025 की सुबह नेपाल में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका प्रभाव भारत के बिहार, दिल्ली, सिक्किम, उत्तर बंगाल और तिब्बत तक महसूस किया गया। भूकंप का केंद्र नेपाल-तिब्बत सीमा के पास लोबुचे से 93 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था, जिसकी गहराई लगभग 10 किलोमीटर थी।

भारत में, विशेषकर बिहार के मोतिहारी, समस्तीपुर, पटना, दरभंगा और उत्तर प्रदेश के लखनऊ सहित कई क्षेत्रों में सुबह 6:40 बजे के आसपास झटके महसूस किए गए, जिससे लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की सूचना नहीं मिली है।
नेपाल में भूकंप के झटकों से लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए, लेकिन तत्काल किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है। 2015 में नेपाल में 7.8 तीव्रता के भूकंप ने लगभग 9,000 लोगों की जान ली थी और व्यापक विनाश हुआ था, जिससे लोग अभी भी उबर रहे हैं।
तिब्बत में भी भूकंप की तीव्रता 6.8 दर्ज की गई, जहां भूकंप का केंद्र समुद्र तल से लगभग 4,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित था। क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और कम जनसंख्या घनत्व के कारण नुकसान की संभावना कम है, लेकिन अधिकारियों ने सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
भूकंप के बाद के झटकों (आफ्टरशॉक्स) की संभावना बनी रहती है, इसलिए प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने और आपातकालीन सेवाओं के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। भारत सरकार की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने भूकंप के दौरान और बाद में सुरक्षा उपायों के बारे में दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान घबराहट से बचना और सही जानकारी के साथ उचित कदम उठाना महत्वपूर्ण है। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां स्थिति पर नजर रख रही हैं और आवश्यकतानुसार राहत कार्यों के लिए तैयार हैं।
भूकंप के कारणों और बचाव के तरीकों के बारे में जानकारी नीचे प्रस्तुत है:
भूकंप के कारण और बचाव के तरीके
भूकंप पृथ्वी की सतह के नीचे टेक्टोनिक प्लेटों की गतियों के कारण उत्पन्न होते हैं। मुख्य कारणों में प्लेटों का टकराना, खिसकना या अलग होना शामिल है। इसके अतिरिक्त, ज्वालामुखीय गतिविधियां और मानवजनित क्रियाएं, जैसे खनन या भू-जल का अत्यधिक दोहन, भी भूकंप का कारण बन सकती हैं।
बचाव के तरीके:
भूकंप-रोधी निर्माण: भवन निर्माण में भूकंप-रोधी तकनीकों का उपयोग करें, जिससे संरचनाएं भूकंप के झटकों को सह सकें।
आपातकालीन योजना: परिवार के साथ आपातकालीन योजना बनाएं, जिसमें सुरक्षित स्थानों की पहचान और आपातकालीन किट तैयार रखना शामिल है।
भूकंप के दौरान:
अंदर रहें: यदि आप इमारत के अंदर हैं, तो मजबूत फर्नीचर के नीचे छुपें और सिर व गर्दन की सुरक्षा करें।
बाहर रहें: यदि आप बाहर हैं, तो इमारतों, पेड़ों और बिजली की लाइनों से दूर खुले स्थान पर रहें।
वाहन में: यदि आप वाहन चला रहे हैं, तो सुरक्षित स्थान पर रुकें और वाहन के अंदर ही रहें।
भूकंप के बाद:
सुरक्षा जांच: अपने और आसपास के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
आपातकालीन सेवाएं: आवश्यक होने पर आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करें।
आफ्टरशॉक्स के लिए तैयार रहें: भूकंप के बाद आने वाले झटकों के प्रति तैयार रहें और सुरक्षित स्थानों पर रहें।
भूकंप के दौरान सही कदम उठाकर जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है। सुरक्षा निर्देशों का पालन और पूर्व तैयारी महत्वपूर्ण है।



