जलडमरूमध्य खुलेगा, लेबनान में भी संघर्ष खत्म करने का रोडमैप
19 जून को स्विट्जरलैंड में होने थे हस्ताक्षर, एक दिन पहले ही समझौते पर बनी सहमति; दुनिया की नजर अब अगले 60 दिनों की वार्ता पर

वॉशिंगटन/तेहरान/पेरिस। मध्य-पूर्व में महीनों से जारी तनाव, सैन्य टकराव और वैश्विक चिंता के बीच गुरुवार को एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए अंतरिम शांति समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर हो गए हैं। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने दावा किया है कि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह करीब 5 बजे समझौते पर हस्ताक्षर किए।
IRNA की ओर से जारी तस्वीरों में ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते दिखाई दे रहे हैं, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प अपने हस्ताक्षर किए हुए दस्तावेज प्रदर्शित करते नजर आ रहे हैं। हालांकि, हस्ताक्षर के समय पजशकियान किस स्थान पर मौजूद थे, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
दूसरी ओर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें ट्रम्प को फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस में समझौते पर हस्ताक्षर करते देखा जा सकता है। इससे संकेत मिलते हैं कि समझौते की प्रक्रिया कई देशों की मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम रही है।
क्या है पूरा समझौता?
अमेरिका और ईरान के बीच हुआ यह समझौता अंतिम शांति संधि नहीं, बल्कि एक अंतरिम व्यवस्था (MoU) है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच जारी सैन्य टकराव को रोकना और व्यापक शांति समझौते के लिए रास्ता तैयार करना है।
समझौते में कुल 14 प्रमुख बिंदुओं को शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके तहत दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई रोकने, समुद्री मार्गों को बहाल करने और क्षेत्रीय स्थिरता कायम करने की दिशा में कदम बढ़ाने पर सहमति जताई है।
समझौते की प्रमुख बातें
1. तत्काल युद्धविराम
दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति दी है। युद्धविराम लागू होने के बाद हवाई हमलों, मिसाइल हमलों और सैन्य अभियानों पर रोक लगेगी।
2. लेबनान में भी संघर्ष समाप्त करने का लक्ष्य
समझौते में केवल अमेरिका और ईरान ही नहीं, बल्कि लेबनान में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में भी प्रयास करने की बात कही गई है। क्षेत्रीय स्थिरता को समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
3. होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुलेगा
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा पूरी तरह खोलने पर सहमति बनी है। यह वही मार्ग है जिससे दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
4. अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त होगी
समझौते के तहत अमेरिका ईरान के खिलाफ लागू समुद्री नाकेबंदी को समाप्त करेगा, जिससे क्षेत्र में व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है।
5. प्रतिबंधों में राहत पर चर्चा
ईरान की जमी हुई संपत्तियों और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत को लेकर अगले दौर की बातचीत में निर्णय लिया जाएगा।
6. परमाणु कार्यक्रम पर निगरानी
ईरान ने परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। इसके बदले पश्चिमी देशों से आर्थिक और कूटनीतिक राहत की उम्मीद जताई जा रही है।
7. 60 दिनों में व्यापक समझौते का लक्ष्य
दोनों पक्ष अगले 60 दिनों तक लगातार बातचीत करेंगे, ताकि स्थायी शांति समझौते को अंतिम रूप दिया जा सके।
तय कार्यक्रम से पहले क्यों हुए हस्ताक्षर?
जानकारी के मुताबिक इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा के निकट लूसर्न शहर में होने थे। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कई दौर की बातचीत के बाद दोनों देशों ने निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही समझौते को अंतिम रूप दे दिया।
कूटनीतिक सूत्रों का मानना है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव और वैश्विक दबाव के कारण दोनों देशों ने प्रक्रिया को तेज किया।
दुनिया के लिए क्यों अहम है यह समझौता?
अमेरिका और ईरान के बीच संबंध पिछले चार दशकों से तनावपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों के बीच कई बार युद्ध जैसी स्थिति बनी, लेकिन कभी पूर्ण शांति समझौता नहीं हो पाया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल रहता है तो:
मध्य-पूर्व में युद्ध का खतरा कम होगा।
वैश्विक तेल बाजार स्थिर हो सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है।
समुद्री व्यापार सामान्य होगा।
ऊर्जा संकट झेल रहे देशों को राहत मिलेगी।
अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
तेल बाजार पर क्या होगा असर?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।
संघर्ष के दौरान इस मार्ग पर खतरा बढ़ने से तेल की कीमतों में तेजी आई थी। अब समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि समुद्री मार्ग पूरी तरह सामान्य हो जाता है तो एशिया और यूरोप के कई देशों को सीधा लाभ मिलेगा।
ट्रम्प ने क्या कहा?
समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे “शांति की दिशा में बड़ा कदम” बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता कायम करना और परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना है।
ट्रम्प ने यह भी कहा कि यह समझौता अंतिम समाधान नहीं है, लेकिन भविष्य के व्यापक समझौते का मजबूत आधार बनेगा।
ईरान की क्या प्रतिक्रिया?
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने समझौते को क्षेत्रीय शांति के लिए महत्वपूर्ण बताया। ईरानी पक्ष का कहना है कि देश की संप्रभुता, सुरक्षा और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए समझौते को तैयार किया गया है।
अब आगे क्या होगा?
अगले 60 दिन सबसे महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इसी अवधि में:
प्रतिबंधों में राहत पर फैसला होगा।
परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई रूपरेखा बनेगी।
जमी हुई ईरानी संपत्तियों पर चर्चा होगी।
क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था तय की जाएगी।
स्थायी शांति समझौते का मसौदा तैयार होगा।
समझिए पूरी कहानी एक नजर में
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