Mohammed israil
बिलासपुर। कुड़मी समाज के आंदोलन और उत्तर पूर्व रेलवे में तीसरी लाइन कमीशनिंग के कारण किए जा रहे नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य का असर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के परिचालन पर भी गहराई से पड़ा है। चक्रधरपुर, खड़गपुर और धनबाद मंडलों में कई स्टेशनों पर आंदोलन से ट्रेनों का परिचालन बाधित हुआ, वहीं गोरखपुर-डोमिंगढ़ स्टेशन पर निर्माण कार्य की वजह से दुर्ग–नौतनवा एक्सप्रेस की कई फेरे रद्द कर दिए गए हैं। रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए खानपान, पेयजल और उद्घोषणाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की है।
आंदोलन से प्रभावित गाड़ियाँ (नियंत्रण आदेश – बुलेटिन 1)
दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर एवं खड़गपुर मंडलों में कुड़मी समाज द्वारा विभिन्न स्टेशनों और लेवल क्रॉसिंग गेट्स पर आंदोलन किए जाने के कारण कई ट्रेनों का संचालन बाधित हुआ। इस कारण दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे सिस्टम में चल रही गाड़ियों को नियंत्रित किया गया, जिनमें शामिल हैं –
- गाड़ी संख्या 22357 (लोकमान्य तिलक टर्मिनस–गया) — रायगढ़ स्टेशन में नियंत्रित।
- गाड़ी संख्या 13287 (दुर्ग–आरा) — खरसिया स्टेशन में नियंत्रित।
- गाड़ी संख्या 18110 (इतवारी–टाटानगर) — सक्ती स्टेशन में नियंत्रित।
- गाड़ी संख्या 07256 (चेरलापल्ली–पटना) — बिलासपुर स्टेशन में नियंत्रित।
- गाड़ी संख्या 17321 (वास्को-डि-गामा–जसीडीह) — भाटापारा स्टेशन में नियंत्रित।
- गाड़ी संख्या 12129 (पुणे–हावड़ा) — रायपुर स्टेशन में नियंत्रित।
इसके अलावा 12101 (लोकमान्य तिलक टर्मिनस–शालीमार), 12949 (पोरबंदर–संतरागाछी) और 12809 (सीएसएमटी–हावड़ा) को मध्य रेलवे के विभिन्न स्टेशनों पर नियंत्रित किया जाएगा।
रेल प्रशासन ने बताया कि जिन स्टेशनों पर ट्रेनें नियंत्रित हैं, वहाँ खानपान और पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। यात्रियों को असुविधा न हो, इसके लिए लगातार उद्घोषणाएँ की जा रही हैं।
परिवर्तित मार्ग से चलने वाली ट्रेनें (बुलेटिन 2)
धनबाद मंडल के पारसनाथ, छपरा, प्रधानखंटा और दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर एवं खड़गपुर मंडलों के विभिन्न स्टेशनों पर आंदोलन के कारण कुछ ट्रेनों को परिवर्तित मार्ग से संचालित किया जा रहा है –
- 12949 (पोरबंदर–शालीमार) — ईब–झारसुगुड़ा रोड–कटक–भद्रक–खड़गपुर मार्ग से।
- 12809 (सीएसएमटी–हावड़ा) — ईब–झारसुगुड़ा रोड–कटक–भद्रक–खड़गपुर मार्ग से।
- 18029 (एलटीटी–शालीमार) — ईब–झारसुगुड़ा रोड–कटक–भद्रक–खड़गपुर मार्ग से।
- 20971 (उदयपुर सिटी–शालीमार) — ईब–झारसुगुड़ा रोड–कटक–भद्रक–खड़गपुर मार्ग से।
नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य से प्रभावित गाड़ियाँ
उत्तर पूर्व रेलवे के गोरखपुर–डोमिंगढ़ स्टेशन में तीसरी लाइन कमीशनिंग हेतु नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य किया जा रहा है। इसके चलते दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से गुजरने वाली दुर्ग–नौतनवा एक्सप्रेस की कई फेरे रद्द कर दी गई हैं –
- 24 सितंबर 2025 को दुर्ग से चलने वाली 18201 दुर्ग–नौतनवा एक्सप्रेस रद्द।
- 26 सितंबर 2025 को नौतनवा से चलने वाली 18202 नौतनवा–दुर्ग एक्सप्रेस रद्द।
- 25 सितंबर 2025 को दुर्ग से चलने वाली 18205 दुर्ग–नौतनवा एक्सप्रेस रद्द।
- 27 सितंबर 2025 को नौतनवा से चलने वाली 18206 नौतनवा–दुर्ग एक्सप्रेस रद्द।
रद्द/आंशिक रद्द गाड़ियाँ (बुलेटिन 3)
धनबाद मंडल, चक्रधरपुर और खड़गपुर मंडलों में आंदोलन के कारण रेलवे ने कुछ गाड़ियों की सेवाएँ रद्द या आंशिक रद्द कर दी हैं –
- गाड़ी संख्या 18114 (बिलासपुर–टाटानगर) — 20.09.2025 को रद्द।
- गाड़ी संख्या 12222 (हावड़ा–पुणे) — 20.09.2025 को घाटशिला तक आंशिक रद्द, घाटशिला से पुणे के मध्य पूर्ण रद्द।
- गाड़ी संख्या 18113 (टाटानगर–बिलासपुर) — 20.09.2025 को रद्द।
रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पूर्व अपनी गाड़ी की स्थिति की जानकारी आधिकारिक वेबसाइट, NTES ऐप या रेलवे हेल्पलाइन से प्राप्त कर लें।
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यात्रियों की सुविधा पर रेलवे की विशेष व्यवस्था
- नियंत्रित स्टेशनों पर खानपान व पेयजल की पर्याप्त उपलब्धता।
- लगातार उद्घोषणाएँ ताकि यात्रियों को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिलती रहे।
- हेल्पलाइन नंबर व NTES ऐप से जानकारी लेने की अपील।
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आंदोलन और रेलवे परिचालन
कुड़मी समाज के आंदोलन ने दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर और खड़गपुर मंडलों में यातायात को प्रभावित किया है। प्रदर्शनकारियों ने स्टेशनों और लेवल क्रॉसिंग गेट्स को जाम किया, जिससे कई ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ। रेलवे ने वैकल्पिक मार्ग और नियंत्रण की व्यवस्था कर यात्रियों की असुविधा कम करने की कोशिश की।
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नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य क्या है?
रेलवे लाइनों की क्षमता बढ़ाने और सुरक्षित संचालन के लिए जब नई लाइनें जोड़ी जाती हैं, तो सिग्नलिंग और ट्रैक बदलने का तकनीकी कार्य होता है। इस प्रक्रिया को नॉन-इंटरलॉकिंग (NI) कार्य कहते हैं।
- इस दौरान ट्रेनों का संचालन सीमित या बंद रहता है।
- कार्य पूरा होने के बाद लाइन पर ट्रेनों की गति और सुरक्षा दोनों में सुधार होता है।



