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“जादू-टोना के शक ने ली माँ की जान — बेटे ने टंगिये से वार कर थाने में किया आत्मसमर्पण”

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Mohammed israil

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बिलासपुर। अंधविश्वास और ‘जादू-टोना’ के शक ने एक बेटे को इतना अंधा बना दिया कि उसने धारदार टंगिये से अपनी ही माँ की हत्या कर दी। घटना थाना चकरभाठा क्षेत्र की है। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी खुद थाने पहुंचा और पुलिस के सामने अपराध स्वीकार कर लिया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।थाना चकरभाठा पुलिस ने बताया कि विष्णु कैवर्त्य (38 वर्ष) पिता स्व. अमरु कैवर्त्य निवासी ग्राम सरवानी शुक्रवार को धारदार टंगिया लेकर थाने पहुँचा। उसने पुलिस को बताया कि उसके बच्चों की तबीयत लगातार खराब चल रही थी और इसके पीछे उसे अपनी माँ पर जादू-टोना करने का संदेह था। 1जादू-टोना और अंधविश्वास का सच2एक्सपर्ट व्यू 3रोकथाम के उपाय

बिलासपुर। अंधविश्वास और ‘जादू-टोना’ के शक ने एक बेटे को इतना अंधा बना दिया कि उसने धारदार टंगिये से अपनी ही माँ की हत्या कर दी। घटना थाना चकरभाठा क्षेत्र की है। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी खुद थाने पहुंचा और पुलिस के सामने अपराध स्वीकार कर लिया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।


थाना चकरभाठा पुलिस ने बताया कि विष्णु कैवर्त्य (38 वर्ष) पिता स्व. अमरु कैवर्त्य निवासी ग्राम सरवानी शुक्रवार को धारदार टंगिया लेकर थाने पहुँचा। उसने पुलिस को बताया कि उसके बच्चों की तबीयत लगातार खराब चल रही थी और इसके पीछे उसे अपनी माँ पर जादू-टोना करने का संदेह था।

आरोपी ने बताया कि कई बार समझाने के बावजूद माँ ने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। इसी से नाराज़ होकर गुस्से में उसने घर पर मौजूद टंगिये से सिर पर वार कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। हत्या करने के बाद विष्णु थाने पहुंचा और पूरा घटनाक्रम पुलिस को बताया।

पुलिस ने आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया है। प्रकरण में हत्या की धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद घटना का पूरा विवरण सामने आएगा।


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जादू-टोना और अंधविश्वास का सच

ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बीमारी, दुर्घटना या दुर्भाग्य को अक्सर जादू-टोना से जोड़ दिया जाता है। परिवार के भीतर किसी एक सदस्य पर आरोप लगाकर उसे दोषी ठहराना कई बार हिंसक घटनाओं में बदल जाता है।

  • बीमारियों का वैज्ञानिक इलाज न कराना
  • शिक्षा और जागरूकता की कमी
  • पारिवारिक विवाद और दबाव
    ये सभी अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले कारक हैं।

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एक्सपर्ट व्यू

डॉ. एस नायक

“अंधविश्वास और जादू-टोना पर आधारित सोच लोगों के डर और निराशा का परिणाम है। जब किसी परिवार को बीमारी या संकट का कारण समझ नहीं आता तो वे तर्क की जगह आरोपों का सहारा लेते हैं। इससे घरेलू विवाद बढ़कर हिंसा में बदल जाता है। ऐसे मामलों को रोकने के लिए शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ बेहद ज़रूरी हैं।”


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रोकथाम के उपाय

  • प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुँच सुनिश्चित हो।
  • गाँव-गाँव में अंधविश्वास विरोधी जागरूकता शिविर लगाए जाएँ।
  • स्कूल स्तर पर विज्ञान और स्वास्थ्य शिक्षा पर विशेष जोर दिया जाए।
  • परिवारों में विवाद की स्थिति में स्थानीय प्रशासन और पुलिस तत्काल हस्तक्षेप करें।

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