Mohammed israil
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (DMF) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बड़ी कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। बीते 3 और 4 सितंबर को रायपुर जोनल ऑफिस की टीम ने रायपुर, दुर्ग, भिलाई और गरियाबंद समेत 28 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इस दौरान एजेंसी के हाथ करीब 4 करोड़ रुपए नकद और 10 किलो चांदी की ईंटें लगी हैं। साथ ही संदिग्ध दस्तावेज़ और कई डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए हैं, जिनसे बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और अवैध लेन-देन की परतें खुल रही हैं।
क्या है पूरा मामला?

जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड (Beej Nigam) से जुड़ा हुआ है।
👉 कृषि उपकरण, पल्वराइज़र, मिनी दाल मिल और बीज सप्लाई जैसे कामों के नाम पर टेंडर जारी किए गए।
👉 इन टेंडरों पर 40 से 60 फीसदी तक कमीशन वसूला जाता था।
👉 यह मोटी रकम बिचौलियों के जरिए अफसरों और नेताओं तक पहुंचाई जाती रही।
👉 ED के मुताबिक, करीब 350 करोड़ रुपए की DMF राशि का दुरुपयोग इसी प्रक्रिया से हुआ है।
ED का छापा
- तारीख: 3 और 4 सितंबर
- स्थान: रायपुर, दुर्ग, भिलाई, गरियाबंद
- कब्जा: 4 करोड़ कैश, 10 किलो चांदी, संदिग्ध दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस
- कानूनी आधार: PMLA 2002 के तहत कार्रवाई
पहले भी आया था मामला सुर्खियों में
- इससे पहले EOW ने 6000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर 9 आरोपियों को नामजद किया था, जिसमें एक वरिष्ठ IAS अधिकारी भी शामिल है।
- हाईकोर्ट ने हाल ही में कोरबा के पूर्व कलेक्टर और डिप्टी सेक्रेटरी की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।
- ED की यह कार्रवाई अब इस घोटाले को और गहराई तक ले जा रही है।
असर और सियासी गर्मी
DMF राशि का मकसद खनिज प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्य करना था, लेकिन अफसर-ठेकेदार-बिचौलियों के गठजोड़ ने इसे लूट का जरिया बना डाला। ED की कार्रवाई के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। अब निगाहें आगे की कार्रवाई और बड़ी गिरफ्तारियों पर टिकी हैं।
घोटाले की रकम: अनुमानित 350 करोड़
- जब्त नकदी: 4 करोड़
- चांदी की जब्ती: 10 किलो
- मुख्य एजेंसी: ED (PMLA 2002 के तहत जांच)
- पहला खुलासा: EOW ने की थी, 6000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल



