Mohammed israil
बिलासपुर/बीजापुर। छत्तीसगढ़ में रविवार का दिन तीन अलग-अलग जल हादसों का गवाह बना। बिलासपुर और बीजापुर जिलों से सामने आई घटनाओं में मासूम बच्चों की जिंदगी अचानक पानी की लहरों में समा गई। इन हादसों में अब तक तीन बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि तीन बच्चों की तलाश अब भी जारी है। प्रशासन, नगर सेना और गोताखोरों की टीम लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है, लेकिन परिवारों की उम्मीदें टूटती जा रही हैं।
खोंगसरा में मरही माता मंदिर दर्शन के दौरान हादसा

बिलासपुर जिले के खोंगसरा इलाके में रविवार दोपहर बड़ा हादसा हुआ। बलौदाबाजार-भाटापारा से मरही माता मंदिर दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं के साथ अचानक आई बाढ़ ने कहर बरपा दिया। पानी के तेज बहाव में एक ही परिवार के चार बच्चे बह गए।
इनमें से तीन बच्चों – गौरी ध्रुव (13), मुस्कान ध्रुव (13) और नितांश ध्रुव (5) की मौत हो गई है। चौथे बच्चे की तलाश अब भी जारी है। ये सभी बच्चे परिवार के अन्य सदस्यों के साथ बस से दर्शन करने पहुंचे थे। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में मातम पसरा है। प्रशासन और बचाव टीम ने रातभर सर्च ऑपरेशन जारी रखा।
लीलागर नदी में एक और बच्चा बहा



इसी दिन बिलासपुर जिले की ही लीला गर नदी स्थित एनीकट में भी हादसा हुआ। यहां नहाने के दौरान एक बच्चा अचानक तेज बहाव में बह गया। बचाव दल उसकी तलाश कर रहा है, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिल पाई है।
बीजापुर में डोंगी पलटने से दो बच्चियां लापता
तीसरा बड़ा हादसा बीजापुर जिले में हुआ। इंद्रावती नदी पार कर नलगोंडा जा रही डोंगीनुमा नाव अचानक पलट गई। नाव में नारायणपुर के तीन ग्रामीण और कुछ स्कूली बच्चियों सहित कुल 11 लोग सवार थे। हादसा सुबह करीब 11:30 बजे उस समय हुआ जब तेज बहाव में नाव अनियंत्रित होकर हिलने लगी और अचानक पलट गई।
कुल 9 लोग किसी तरह तैरकर सुरक्षित बाहर आ गए, लेकिन मनीषा (10) और शर्मिला उज्जी (11) नदी में डूब गईं। दोनों अपनी मां के साथ मिलिंग के लिए नलगोंडा जा रही थीं। नगर सेना और गोताखोरों की टीम ने करीब 10 किलोमीटर तक सर्च किया, लेकिन बच्चियों का कोई सुराग नहीं मिला। अंधेरा होने पर रेस्क्यू रोकना पड़ा, जिसे सोमवार सुबह फिर से शुरू किया जाएगा।
हर साल डोंगी पलटने के हादसे
इंद्रावती नदी का एहकेली से नलगोंडा घाट तक का हिस्सा करीब 500 मीटर चौड़ा है। इस इलाके के 13 गांवों के लिए नदी पार करने का यही एकमात्र साधन है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल डोंगी पलटने से हादसे होते हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। रविवार को हुई दुर्घटना ने फिर से इन गांवों की दुश्वारियों को सामने ला दिया है।
👉 तीनों हादसों के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। प्रशासन का कहना है कि पूरी ताकत के साथ सर्च ऑपरेशन चल रहा है। हालांकि, घटनाओं ने पानी से जुड़े सुरक्षा इंतजामों और ग्रामीण इलाकों में सुरक्षित परिवहन साधन की कमी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छत्तीसगढ़ में पानी से जुड़े हादसों का डरावना पैटर्न
- इस साल अब तक : इंद्रावती, आगर, अरपा और शिवनाथ नदी में दर्जनों लोग डूबने से मौत के शिकार।
- सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके : बस्तर, बीजापुर, नारायणपुर और बिलासपुर के ग्रामीण क्षेत्र।
- सुरक्षा इंतजाम नाकाफी : न तो नाव पर लाइफ जैकेट, न ही सुरक्षा कर्मियों की तैनाती।
- ग्रामीणों की मजबूरी : कई गांवों में पुल या पक्का घाट नहीं, केवल डोंगी ही नदी पार करने का जरिया।
- प्रशासन की चुनौती : हर साल दोहराए जाने वाले हादसों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं।
- विशेषज्ञों की राय : ग्रामीण इलाकों में सुरक्षित नाव संचालन, पुल निर्माण और तैराकी सुरक्षा शिक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।



