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चक्रधर समारोह 2025: शास्त्रीय संगीत और लोक कलाओं का होगा संगम

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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रायपुर।

देश-विदेश में ख्यातिप्राप्त चक्रधर समारोह का शुभारंभ 27 अगस्त से होने जा रहा है। कला के विविध रूपों के साधक और कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से इस समारोह को अविस्मरणीय बनाएंगे। इस वर्ष समारोह में शास्त्रीय संगीत के साथ लोक कलाओं का अद्वितीय संगम देखने को मिलेगा। शास्त्रीय गायन और वादन के साथ-साथ विभिन्न शास्त्रीय नृत्य शैलियों एवं लोक नृत्यों की प्रस्तुतियां दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगी।
समारोह में कथक, ओडिसी, भरतनाट्यम और मोहिनीअट्टम जैसे शास्त्रीय नृत्य शैलियों की प्रस्तुतियां देश के विख्यात कलाकारों द्वारा दी जाएंगी। कथक जहां उत्तर भारत की शास्त्रीय परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, वहीं ओडिसी पूर्वी भारत की, और मोहिनीअट्टम व भरतनाट्यम दक्षिण भारत की समृद्ध नृत्य शैलियां हैं। ये नृत्य शैलियां भारत की प्राचीन सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत की जीवंत अभिव्यक्ति हैं, जो अपनी अनूठी मुद्राओं, वेशभूषा, संगीत और कथा वाचन की विशेषताओं के लिए जानी जाती हैं।
शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियों में गायन और वादन का अनूठा संगम होगा। सितार की मधुर ध्वनि, तबले की लयबद्ध थाप, संतूर के मधुर स्वर और बांसुरी की सुरीली तान दर्शकों को भाव-विभोर करेगी। समारोह के मंच पर जहां शास्त्रीय कलाओं का प्रदर्शन होगा, वहीं छत्तीसगढ़ की लोक कलाओं का भी रंग बिखरेगा। प्रदेश का प्रसिद्ध पंथी नृत्य, लोकगीत और लोकरंग की प्रस्तुतियां छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि का सशक्त परिचय देंगी।
इसके साथ ही अबूझमाड़ के सुप्रसिद्ध मलखम्ब दल की विशेष प्रस्तुति भी समारोह का आकर्षण होगी। इस दल ने वर्ष 2023 में इंडियाज गॉट टैलेंट में प्रथम स्थान प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित की थी और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी पदक हासिल किए हैं। उनके अद्वितीय योग और जिम्नास्टिक मुद्राओं का प्रदर्शन समारोह का मुख्य आकर्षण रहेगा। चक्रधर समारोह 2025 का आयोजन दर्शकों के लिए न केवल कला और संस्कृति का पर्व होगा, बल्कि भारत की शास्त्रीय और लोक परंपराओं का जीवंत उत्सव भी साबित होगा।

अबूझमाड़ के प्रसिद्ध मलखम्ब दल का होगा विशेष प्रदर्शन


छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने वाले अबूझमाड़ के श्री मनोज प्रसाद के नेतृत्व वाला मलखम्ब दल आगामी 03 सितंबर को आयोजित होने वाले 40वें चक्रधर समारोह में अपनी विशेष प्रस्तुति देगा। यह दल अपनी अद्वितीय कला, अनुशासन और कौशल के माध्यम से मलखम्ब की परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेगा।
अबूझमाड़ का यह दल केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत का गौरव बन चुका है। वर्ष 2023 में इस दल ने देश के लोकप्रिय रियलिटी शो इंडियाज गॉट टैलेंट में प्रथम स्थान प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित की थी। उनके संतुलित और कौशलपूर्ण प्रदर्शन ने न केवल दर्शकों, बल्कि निर्णायकों को भी प्रभावित किया।
सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ इस दल ने खेल जगत में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वर्ष 2023 में भूटान में आयोजित विश्व मलखम्ब चौंपियनशिप में दल के खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक अर्जित किया। इसके अलावा खेलो इंडिया गेम्स सहित विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त की हैं। सुदूर वनांचल अबूझमाड़ से निकलकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों तक का यह सफर केवल प्रतिभा ही नहीं, बल्कि कठिन परिश्रम, समर्पण और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। चक्रधर समारोह 2025 में इस दल की प्रस्तुति न केवल दर्शकों के लिए मनोरंजक अनुभव होगी, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि का अद्वितीय परिचय भी प्रस्तुत करेगी।
मलखम्ब भारत का पारंपरिक खेल है, जिसमें खिलाड़ी ऊर्ध्वाधर खंभे या रस्सी पर योगासन और जिम्नास्टिक की मुद्राएं प्रस्तुत करते हैं। यह खेल शारीरिक शक्ति, संतुलन और लचीलेपन का उत्कृष्ट प्रदर्शन है। मलखम्ब शब्द ‘मल्ल’ (पहलवान) और ‘खम्भ’ (स्तंभ) से मिलकर बना है। इसकी उत्पत्ति महाराष्ट्र में हुई और यह योग तथा कुश्ती के संयोजन से विकसित हुआ।

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