Latest news

रामगढ़ पर्वत पर संकट! केते कोल ब्लॉक विस्तार पर संग्राम

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
3 Min Read

Mohammed israil


सरगुजा में फिर छिड़ा हसदेव विवाद, 5 लाख पेड़ों की बलि का खतरा

रायपुर/बिलासपुर,सरगुजा। हसदेव अरण्य और सरगुजा की धरोहर रामगढ़ पर्वत एक बार फिर कोल खनन के विवाद में घिर गया है। परसा क्षेत्र में केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को हरी झंडी दिए जाने के बाद राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने सरकार पर हमला तेज कर दिया है।
पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने सरकार पर आंकड़ों में हेरफेर कर स्वीकृति दिलाने का आरोप लगाया है, वहीं छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन और हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति ने इसे प्रदेश की सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और आदिवासी अस्तित्व पर सबसे बड़ा खतरा बताया है।


रामगढ़ पर्वत पर संकट क्यों?

रामगढ़ का रामगिरी पर्वत न केवल विश्व स्तरीय सांस्कृतिक धरोहर है, बल्कि यहाँ सीता बेंगरा गुफा, जोगीमारा गुफा और प्राचीन नाट्यशाला जैसी ऐतिहासिक धरोहरें हैं, जो भगवान राम और सीता के वनवास काल से जुड़ी मानी जाती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्व में संचालित खदानों से पर्वत में पहले ही दरारें पड़ चुकी हैं। अब पर्वत के बिल्कुल बगल में नई खदान खुलने से स्थिति और गंभीर होगी।


🔹 टीएस सिंहदेव, पूर्व उप मुख्यमंत्री

“प्रदेश सरकार ने कार्पोरेट स्वार्थ के लिए सरगुजा की प्रकृति और सांस्कृतिक धरोहर दांव पर लगा दी है। 2020-21 में वन विभाग की रिपोर्ट ने साफ कहा था कि रामगढ़ पर्वत खदान के 10 किमी दायरे में है, इसी वजह से हमने इसे खारिज किया था। अब इसे 11 किमी दिखाकर स्वीकृति दी गई है।”


🔹 आलोक शुक्ला, संयोजक – छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन

“वन विभाग का यह फैसला न केवल भारतीय वन्यजीव संस्थान की सिफारिशों के खिलाफ है, बल्कि विधानसभा के उस सर्वसम्मति प्रस्ताव का भी उल्लंघन है जिसमें हसदेव अरण्य में खनन रोकने की बात कही गई थी।”


क्या है पूरा मामला?

  • परियोजना क्षेत्र: 1742 हेक्टेयर घना जंगल
  • पेड़ कटाई: लगभग 5 लाख पेड़ काटने का प्रस्ताव
  • हाथी संकट: लेमरू हाथी रिजर्व से महज 3 किमी दूरी
  • खतरा: हाथी-मानव द्वंद बढ़ने की आशंका, जलस्रोत और जैव विविधता पर असर
  • राजनीतिक पृष्ठभूमि: अगस्त 2020 और जनवरी 2021 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पर्यावरण, हाथी संरक्षण और आदिवासी जीवन पर संकट बताते हुए अनुमति रोकी थी।

हसदेव में जारी पेड़ों की कटाई

  • हाल ही में 98 हजार से ज्यादा पेड़ों की कटाई की रिपोर्ट सामने आई।
  • स्थानीय ग्रामीणों के विरोध पर कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
  • पर्यावरणविदों का दावा—यह प्रक्रिया जंगल और जल संरक्षण दोनों को तबाह कर देगी।


खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।