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शिक्षा का मंदिर फिर शर्मसार…छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षिकाओं से छेड़छाड़ के मामले बढ़े, दो प्राचार्य गिरफ्तार

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Mohammed israil


रायपुर/बिलासपुर/जशपुर।छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों में महिला कर्मचारियों और शिक्षिकाओं के साथ छेड़छाड़ के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। जशपुर और बिलासपुर जिले से सामने आए दो अलग-अलग मामलों ने शिक्षा विभाग की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


जशपुर: प्राचार्य की हरकत से महिला स्टाफ परेशान, दो FIR दर्ज

जशपुर जिले के बगीचा थाना क्षेत्र के शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल बिमड़ा के प्राचार्य सुधीर कुमार बरला (52) पर महिला कर्मचारी और व्याख्याता ने यौन शोषण और छेड़छाड़ का आरोप लगाया है।

महिलाओं का कहना है कि प्राचार्य लंबे समय से स्कूल में अकेला पाकर छेड़छाड़ करता था, फोन पर अश्लील बातें करता था और अशोभनीय कमेंट करता था। 15 अगस्त को छुट्टी के बाद स्कूल में महिला कर्मचारी को कमरे में बंद कर अश्लील हरकत की और धमकाया।

महिला व्याख्याता ने यह भी बताया कि बाल दिवस (14 नवंबर) पर भी प्राचार्य ने उनके साथ अभद्रता की थी।
👉 आरोपी प्राचार्य के खिलाफ पुलिस ने बीएनएस की धारा 74, 75(1)(iv) और 79 के तहत दो FIR दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।


बिलासपुर: प्रभारी प्राचार्य ने शिक्षिकाओं से की मारपीट व अभद्रता

शासकीय हाई स्कूल जोगीपुर (कोटा थाना क्षेत्र) में प्रभारी प्राचार्य मनीष वर्मा पर शिक्षिकाओं से छेड़छाड़, मारपीट और धमकी देने का आरोप लगा है।

पीड़िता शिक्षिका ने शिकायत में बताया कि प्राचार्य छोटी-छोटी बातों को लेकर गाली-गलौज करता है, हाथ पकड़ने का प्रयास करता है और बेड टच करता है। विरोध करने पर उन्होंने शिक्षिकाओं के साथ मारपीट कर दी।

कोटा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


अधिकारी का बयान

जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद भटनागर (जशपुर) ने कहा—
“प्राचार्य की हरकत बेहद गंभीर और निंदनीय है। विभागीय कार्रवाई के लिए संभागीय आयुक्त को पत्र भेजा गया है।”

एएसपी अनिल कुमार सोनी (जशपुर) ने बताया—
“आरोपी सुधीर कुमार बरला को गिरफ्तार कर लिया गया है, मामले की जांच जारी है।”


स्कूलों में छेड़छाड़ की घटनाएँ

  • छत्तीसगढ़ के कई जिलों में महिला शिक्षिकाओं के साथ छेड़छाड़ की शिकायतें सामने आई हैं।
  • अक्सर लोकलाज और भय की वजह से पीड़िताएं लंबे समय तक चुप रहती हैं।
  • शिक्षा विभाग द्वारा समय-समय पर काउंसलिंग और सतर्कता समिति बनाने की बात कही जाती है, लेकिन प्रभावी कदम अब तक नजर नहीं आते।
  • ताजा घटनाओं ने महिला स्टाफ की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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