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छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘हॉफ बिजली बिल’ योजना में की कटौती, अब सिर्फ 100 यूनिट तक ही मिलेगा लाभ

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Mohammed israil


मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं पर असर, कांग्रेस ने फैसले को बताया जनविरोधी

रायपुर, बिलासपुर। राज्य सरकार ने जनता को राहत देने वाली हॉफ बिजली बिल योजना में बड़ा फेरबदल करते हुए इसकी सीमा में भारी कटौती कर दी है। पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना के तहत पहले तक 400 यूनिट तक की मासिक खपत पर बिजली बिल का आधा भुगतान उपभोक्ताओं को करना होता था। अब यह सीमा घटाकर सिर्फ 100 यूनिट कर दी गई है

इस निर्णय से लाखों मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं को झटका लगा है। जिन उपभोक्ताओं की मासिक खपत 100 यूनिट से अधिक है, उन्हें अब पूरे बिल का भुगतान करना होगा और उन्हें 100 यूनिट तक की छूट भी नहीं मिलेगी।


🔹 क्या था पहले और अब क्या है?

पहलू पहले की स्थिति अब की स्थिति योजना का लाभ 400 यूनिट तक खपत पर आधा बिल अब सिर्फ 100 यूनिट तक खपत पर आधा बिल खपत 100 यूनिट से ऊपर होने पर पूरे 400 यूनिट पर लाभ मिलता था अब कोई भी छूट नहीं मिलेगी मुख्य लाभार्थी मध्यम वर्ग, शहरी उपभोक्ता सिर्फ अत्यल्प खपत वाले उपभोक्ता


🔹 कांग्रेस ने साधा निशाना

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि:

“साय सरकार ने हॉफ बिजली बिल योजना को लगभग बंद कर दिया है। पहले जहां लाखों उपभोक्ता इससे लाभान्वित हो रहे थे, अब केवल 100 यूनिट तक खपत करने वाले सीमित लोगों को ही लाभ मिलेगा। यह फैसला गरीब और मध्यम वर्गीय उपभोक्ताओं के खिलाफ है।”

दीपक बैज ने आगे कहा कि “प्रदेश में पहले लगभग 65 लाख परिवार योजना के तहत लाभ ले रहे थे, लेकिन अब इनकी संख्या बेहद कम रह जाएगी।”


🔹 क्या कहती है सरकार?

वर्तमान सरकार की ओर से कहा गया है कि इस बदलाव का उद्देश्य “सतत राजकोषीय प्रबंधन” और लक्ष्यित लाभ सुनिश्चित करना है। सरकार के अनुसार, अब 31 लाख परिवार ही इस योजना का लाभ ले पाएंगे, जिनमें मुख्य रूप से गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले उपभोक्ता शामिल हैं।

वहीं सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पहले चार वर्षों में योजना पर ₹3,236 करोड़ से अधिक की सब्सिडी खर्च की गई थी।


🔹 योजना की पृष्ठभूमि

  • योजना की शुरुआत: वर्ष 2019 में भूपेश बघेल सरकार द्वारा की गई थी।
  • उद्देश्य: घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को राहत देना, खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग को।
  • वित्तीय प्रावधान: पहले वर्ष में ₹400 करोड़, बाद में बढ़ाकर ₹1274 करोड़
  • साय सरकार का यह दावा
  • छत्तीसगढ़ की पुनरीक्षित हॉफ बिजली बिल योजना से 31 लाख सामान्य और कमजोर वर्ग के उपभोक्ताओं को मिलेगा पूर्ववत लाभ
    15 लाख बीपीएल परिवारों को मिलती रहेगी मुफ्त बिजली की सुविधा, सौर ऊर्जा से आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम
    बिलासपुर, 4 अगस्त 2025/छत्तीसगढ़ सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने वाली हॉफ बिजली बिल योजना के अंतर्गत दी जाने वाली 400 यूनिट की मासिक छूट की सीमा में युक्तियुक्त संशोधन करते हुए अब 100 यूनिट तक की मासिक खपत पर 50 प्रतिशत की रियायत देने का निर्णय लिया है।
    वर्तमान में राज्य में लगभग 45 लाख घरेलू उपभोक्ता परिवार हैं, जिनमें से 31 लाख परिवारों की मासिक खपत 100 यूनिट से कम है। यह लगभग 70 प्रतिशत उपभोक्ताओं का प्रतिनिधित्व करता है। अतः इस संशोधन के बावजूद, इन 31 लाख जरूरतमंद सामान्य एवं कमजोर वर्ग के उपभोक्ताओं को योजना का लाभ पूर्ववत मिलता रहेगा। इन 31 लाख परिवारों में 15 लाख बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) परिवार भी शामिल हैं, जिन्हें पूर्ववत 30 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलती रहेगी। इसके साथ ही वे हॉफ बिजली बिल योजना के तहत अन्य सभी लाभों से भी यथावत लाभान्वित रहेंगे।
    राज्य सरकार प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना को भी तेज़ी से लागू कर रही है, जिसके अंतर्गत उपभोक्ताओं को रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित करने पर केंद्र और राज्य सरकारों से अधिकतम ₹1,08,000/- तक की सब्सिडी दी जा रही है।इस योजना के तहत 1 किलोवॉट क्षमता के सोलर प्लांट से प्रतिमाह औसतन 120 यूनिट बिजली उत्पादन होता है, जिस पर ₹30,000 केंद्र से व ₹15,000 राज्य से, कुल ₹45,000 की वित्तीय सहायता दी जाती है। उपभोक्ता को लगभग ₹15,000 स्वयं वहन करने होते हैं।
    इसी प्रकार 2 किलोवॉट प्लांट के लिए प्रतिमाह औसतन 240 यूनिट उत्पादन संभव है, जिस पर ₹90,000 तक कुल सब्सिडी (₹60,000 केंद्र + ₹30,000 राज्य) मिलती है। उपभोक्ता को केवल ₹30,000 खर्च करना होता है।
    3 किलोवॉट क्षमता के प्लांट से प्रतिमाह औसतन 360 यूनिट उत्पादन संभव है, और इसमें ₹78,000 केंद्र + ₹30,000 राज्य यानी कुल ₹1,08,000 की सहायता मिलती है। उपभोक्ता को ₹72,000 वहन करना पड़ता है, जो ऋण पर भी उपलब्ध है।
    उल्लेखनीय है कि 2 किलोवॉट या अधिक क्षमता वाले प्लांट लगाने वाले उपभोक्ता प्रतिमाह 200 यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन 25 साल तक कर सकते हैं, जो हॉफ बिजली योजना से मिलने वाली अधिकतम छूट (400 यूनिट पर 200 यूनिट रियायत) से भी ज्यादा है। ऐसे उपभोक्ता अपने घर में सौर ऊर्जा से उत्पन्न विद्युत का उपयोग कर न सिर्फ बिजली खर्च से मुक्ति पा सकते हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में प्रवाहित कर आय भी अर्जित कर सकते हैं।
    प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली, स्थायी बचत और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित करेगी। साथ ही, पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व निभाने की दिशा में भी यह एक बड़ा कदम साबित होगा। इससे छत्तीसगढ़ के उपभोक्ता हॉफ बिजली बिल से मुफ्त बिजली बिल योजना की ओर स्वाभाविक रूप से अग्रसर होंगे। उपभोक्ता किसी भी योजना पर निर्भर न रहते हुए स्वयं अपनी छत पर ऊर्जा उत्पादन कर “उर्जादाता” बनेंगे। यह रणनीतिक पहल राज्य को स्वच्छ ऊर्जा, आर्थिक बचत और ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में आगे बढ़ाएगी।

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