

Mohammed israil
रायपुर, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में हृदय चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि दर्ज की गई, जहां एक 58 वर्षीय महिला का एक साथ कोरोनरी बाईपास और हृदय के तीनों प्रमुख वॉल्व (माइट्रल, एओर्टिक व ट्राइकस्पिड) का जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया। लेकिन वहीं, राज्य गठन के 25 वर्षों बाद भी बिलासपुर जैसे प्रमुख संभागीय शहर में अब तक हृदय रोग के लिए समुचित उपचार की व्यवस्था नहीं हो पाई है। करोड़ों रुपये की लागत से बने सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में हृदय रोग विशेषज्ञ व आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर का आज भी अभाव है, जिसके चलते मरीजों को रायपुर या नागपुर जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। यह समस्या खासकर मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए आर्थिक बोझ और इलाज में देरी की वजह बनती जा रही है, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाया गया है।

यह सर्जरी मेडिकल साइंस की दृष्टि से इसलिए विशेष मानी जा रही है क्योंकि इसमें ऑफ-पंप बीटिंग हार्ट बाईपास सर्जरी तकनीक अपनाई गई, जिसमें हृदय की धड़कन रोके बिना ब्लॉकेज को हटाया गया। इसके बाद हार्ट-लंग मशीन की मदद से माइट्रल वॉल्व को मेटालिक कृत्रिम वॉल्व से बदला गया, एओर्टिक वॉल्व को विशेष तकनीक से रिपेयर किया गया और ट्राइकस्पिड वॉल्व को रिंग लगाकर दुरुस्त किया गया।
जांच में पता चला था ब्लॉकेज
मरीज की जांच में यह सामने आया कि मरीज की कोरोनरी आर्टरी में 95% ब्लॉकेज है तथा हृदय के तीन प्रमुख वाल्व :- माइट्रल, एओर्टिक और ट्राइकस्पिड क्षतिग्रस्त हैं। ईकोकार्डियोग्राफी और कोरोनरी एंजियोग्राफी के बाद डॉक्टरों ने सर्जरी का निर्णय लिया। इसमें पहले ऑफ पंप बीटिंग हार्ट बाईपास सर्जरी की गई, जिसमें हृदय के धड़कन को बंद किये बिना हार्ट के कोरोनरी आर्टरी की बायपास सर्जरी की गई। इसके बाद हार्ट-लंग मशीन की सहायता से हृदय और फेफड़ों को अस्थायी रूप से रोका गया। आपरेशन के दौरान हृदय के चैम्बर्स को खोलकर माइट्रल वाल्व को मेटालिक कृत्रिम वाल्व से बदला गया, एओर्टिक वाल्व को विशेष तकनीक से रिपेयर किया गया और ट्राइकस्पिड वाल्व को रिंग लगाकर सुधारा गया।
सर्जरी की ख़ास बातें
यह एक उच्च जोखिम वाली सर्जरी थी, क्योंकि मरीज की ई.एफ. (ejection fraction) कम तो थी ही एवं एक ही साथ बहुत सारी अन्य सर्जरी भी शामिल थी। इस बाईपास में आर्टेरियल ग्राफ्ट का प्रयोग किया गया, जो अधिक टिकाऊ होता है। एओर्टिक वाल्व रिपेयर केवल चुनिंदा चिकित्सा संस्थानों में संभव होता है। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है और वे शीघ्र ही अस्पताल से डिस्चार्ज लेकर घर लौटने वाली हैं।
मेडिकल कालेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी एवं अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने डॉ. डॉ. कृष्णकांत साहू और उनकी टीम को इस सफल सर्जरी की उपलब्धि के लिए बधाई दी है। गौरतलब है कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग को सतत् उत्कृष्ट कार्य, नवाचार एवं मरीजों की सेवा के लिए जाना जाता है।
सर्जरी की प्रमुख बातें:
- मरीज की कोरोनरी आर्टरी में 95% ब्लॉकेज पाया गया था।
- ईकोकार्डियोग्राफी व एंजियोग्राफी के आधार पर लिया गया ऑपरेशन का निर्णय।
- ई.एफ. (Ejection Fraction) कम होने से सर्ज



