00 वार्ड नंबर 18 की पार्षद अंजनी लक्ष्मी नारायण कश्यप हैं प्रमुख दावेदार, इस बार 29 महिला पार्षद हुई हैं निर्वाचित
00 भाजपा नेत्री और विभा राव चला चुकी हैं सदन
बिलासपुर। नगर निगम बिलासपुर में भाजपा नेत्री आर विभाराव के बाद एक बार फिर सभापति के लिए महिला दावेदारों के नाम उभर कर सामने आ रहे हैं, इसमें प्रमुख रूप से वार्ड नंबर 18 से दोबारा पार्षद निर्वाचित हुई अंजनी लक्ष्मी नारायण कश्यप का नाम दावेदारों की रेस में काफी आगे चल रहा है। इसके अलावा कुछ वरिष्ठ पार्षद भी सभापति बनने के लिए लॉबिंग में जुट गए हैं।


बिलासपुर नगर निगम चुनाव में इस बार महिलाओं ने दमदार प्रदर्शन किया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की एल पद्मजा पूजा विधानी महापौर पद पर निर्वाचित हुई हैं। उनके साथ 70 वार्डों में से कुल 29 महिला प्रत्याशी पार्षद के रूप में चुनी गई हैं। महिलाओं की इस बड़ी संख्या ने नगर निगम सदन में उनके प्रभाव को और बढ़ा दिया है।
सभापति पद के लिए भी महिला पार्षदों की दावेदारी मजबूत नजर आ रही है। इनमें प्रमुख रूप से पूर्व एमआईसी सदस्य अंजनी लक्ष्मी नारायण कश्यप का नाम सामने आ रहा है। वे इस बार दूसरी बार पार्षद चुनी गई हैं और उनके अनुभव तथा पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा को देखते हुए उन्हें प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। श्रीमती कश्यप इसके पहले एमआईसी मेंबर रह चुकी हैं। मालूम हो कि लक्ष्मी नारायण बबलू कश्यप, जो महापौर पद के मजबूत दावेदार थे, अंतिम समय में भाजपा ने उनकी पत्नी अंजनी कश्यप को पार्षद पद का उम्मीदवार बनाया। पार्टी का यह कदम प्रभावी साबित हुआ और अंजनी कश्यप ने शानदार जीत हासिल की।
एमआईसी में भी दिखेगा दबदबा
इस बार भाजपा से एक दर्जन से अधिक महिला उम्मीदवार पार्षद चुनकर आई हैं। बिलासपुर नगर निगम में उनकी भागीदारी को महत्वपूर्ण बनाने भारतीय जनता पार्टी जुटी हुई है। मेयर इन काउंसिल में महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी महिला पार्षदों को दी जा सकती है।
निर्णायक भूमिका में हैं महिला पार्षद
महिलाओं की इस प्रभावी उपस्थिति ने न केवल नगर निगम सदन में संतुलन स्थापित किया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि राजनीति में उनकी भागीदारी अब निर्णायक भूमिका निभा रही है। भाजपा की इस रणनीति ने बिलासपुर में महिला नेतृत्व को और मजबूत किया है।
भाजपा की पूजा विधानी का महापौर बनना और अन्य महिला पार्षदों का चुनाव जीतना महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह न केवल उनके नेतृत्व को पहचान देता है, बल्कि भविष्य में महिला सशक्तिकरण के लिए नए रास्ते खोलता है।



