00 प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने क्या जिला संगठन को बड़े पदाधिकारी को भी पार्टी से निकालने जिला संगठन को किया क्या फ्री हैंड
00 पार्षद पद के प्रत्याशियों की शिकायत पर सीधे हो रही निष्कासन की कार्रवाई से हड़कंप
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनावों के परिणामों से पहले ही कांग्रेस में निष्कासन की राजनीति गर्मा गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के प्रवक्ता अभय नारायण राय के निष्कासन को लेकर जिला अध्यक्ष की कार्रवाई विवाद का केंद्र बन गई है। इस मामले में प्रदेश नेतृत्व और अनुशासन समिति की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।



दरअसल, राय के निष्कासन को जिला संगठन के भीतर चल रहे अंतर्विरोधों और गुटबाजी से जोड़ा जा रहा है। राय पर लगे आरोपों और कार्रवाई के तरीके को लेकर कांग्रेस के भीतर ही असंतोष पनप रहा है। पार्टी के नियमों के अनुसार, अनुशासन से जुड़े मामलों को पहले अनुशासन समिति के पास भेजा जाना चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। इससे प्रदेश कांग्रेस में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब जिला संगठनों को “भीतरघात” और “खुला घात” की शिकायतों पर सीधे निष्कासन का अधिकार दे दिया गया है। पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित किए गए श्री राय का कहना है कि उन्हें प्रदेश संचार विभाग ने कंट्रोल रूम सहित अन्य जिम्मेदारियां सौंप थी। महापौर पद के प्रत्याशी प्रमुख नायक के लिए भी लगातार काम कर रहे थे। जिस पर शाद पद के प्रत्याशी किसी शिकायत पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है वह आरोप सरासर गलत है। उसकी वजह उन्होंने ना तो निर्दलीय चुनाव लड़ा है और ना ही वे उस क्षेत्र के मतदाता है। वह प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता के तौर पर पार्टी की सेवा कर रहे थे। उनके खिलाफ कोई शिकायत का मामला प्रदेश कांग्रेस कमेटी में जाना था। जहां पार्टी के अनुशासन समिति अपना फैसला लेती। मालूम हूं कि महिला कांग्रेस की पूर्व शहर अध्यक्ष सीमा पांडे सहित 6 लोगों को जिला संगठन ने भीतर और खुलाघात के आरोपों पर पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है
गुटबाजी और राजनीतिक समीकरण
कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि इस कार्रवाई के पीछे गुटबाजी और आगामी चुनावों से जुड़ी राजनीति हो सकती है। अभय नारायण राय को हाल के दिनों में पार्टी के महत्वपूर्ण आयोजनों में सक्रिय देखा गया था, और उनका निष्कासन कई लोगों के लिए अप्रत्याशित है। यह घटनाक्रम पार्टी के भीतर चल रही अंतर्कलह को उजागर करता है, जो आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की तैयारियों को प्रभावित कर सकता है।
नेतृत्व की चुप्पी
प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की इस मुद्दे पर चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। जहां एक ओर इस कार्रवाई से जिला संगठन को मजबूत संदेश देने की कोशिश हो सकती है, वहीं दूसरी ओर यह पार्टी के भीतर असंतोष को बढ़ाने का कारण भी बन सकता है।
चुनावी प्रभाव
नगरीय निकाय चुनावों के परिणामों से पहले उठे इस विवाद का असर पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। कांग्रेस जहां एक ओर प्रदेश में सत्ता बरकरार रखने के लिए संघर्षरत है, वहीं ऐसे विवादों से पार्टी की छवि और संगठनात्मक एकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विवादों से कैसे निपटेगी पार्टी
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में इस घटना ने नेतृत्व और अनुशासन प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आगामी चुनावों में पार्टी के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वह इन आंतरिक विवादों से कैसे निपटती है और संगठनात्मक एकता बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाती है।



