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अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघिन की संदिग्ध मौत: वन विभाग ने जताई आपसी संघर्ष की आशंका

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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00 छत्तीसगढ़ में लगातार वन प्राणियों के मौतों को लेकर पनप रही है नाराजगी

बिलासपुर। : छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघों के आपसी संघर्ष के चलते एक बाघिन की मौत का मामला सामने आया है। घटना की जानकारी 23 जनवरी को गार्ड टीम द्वारा दी गई। कक्ष क्रमांक 339 आर.एफ. में मृत बाघिन मिलने की सूचना पर उप संचालक और वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। प्रारंभिक निष्कर्षों के अनुसार, घटना का कारण दो बाघों के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व के लिए हुआ संघर्ष बताया जा रहा है। यह दावा वन विभाग के उच्च अधिकारी कर रहे हैं।

क्या है मामला

23 जनवरी 2025 को गश्ती दल ने अचानकमार टाइगर रिजर्व के कक्ष क्रमांक 339 आर.एफ. में एक बाघिन को मृत अवस्था में पाया। सूचना मिलते ही उप संचालक, सहायक संचालक, और अन्य वन अधिकारियों की टीम ने क्षेत्र का निरीक्षण किया। मौके पर बाघिन के शरीर पर कई चोटों और दांत के निशान पाए गए, जो संघर्ष का स्पष्ट संकेत देते हैं।

24 जनवरी को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए, बाघिन का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम में बाघिन की गर्दन पर दांत के निशान, श्वासनली का फटना, फेफड़ों का सिकुड़ना, और पूरे शरीर पर खरोंच के गहरे निशान पाए गए। पैनल की रिपोर्ट ने यह पुष्टि की कि बाघिन की मौत दो बाघों के आपसी संघर्ष के कारण हुई।

आपसी संघर्ष: बाघों की प्रकृति का हिस्सा

बाघों के बीच आपसी संघर्ष उनकी प्राकृतिक प्रवृत्ति का हिस्सा है। खासतौर पर नर बाघों के बीच अपने क्षेत्र (टेरिटरी) पर वर्चस्व बनाए रखने के लिए ऐसे संघर्ष आम हैं। बाघ एकांतप्रिय जानवर हैं और वे अपने क्षेत्र में किसी अन्य बाघ को सहन नहीं करते। मादा बाघिन के लिए भी नर बाघों के बीच संघर्ष होता है।

क्या है  टाइगर रिजर्व की स्थिति

अचानकमार टाइगर रिजर्व छत्तीसगढ़ के सबसे प्रमुख वन्यजीव संरक्षण क्षेत्रों में से एक है। यह क्षेत्र बाघों के प्राकृतिक आवास के लिए जाना जाता है। बाघों की बढ़ती संख्या और सीमित क्षेत्र के कारण आपसी संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं।

2018 की बाघ गणना के अनुसार, भारत में बाघों की संख्या 2,967 थी, जो 2022 में बढ़कर 3,167 हो गई। हालांकि, अचानकमार टाइगर रिजर्व जैसे क्षेत्रों में सीमित संसाधन और बाघों के लिए पर्याप्त स्थान न होने के कारण, इनके बीच संघर्ष होना स्वाभाविक है।

संघर्ष क्यों होता है?

बाघों के आपसी संघर्ष के कारण):

  • टेरिटरी (क्षेत्र) का वर्चस्व:
    बाघों के पास एक निश्चित टेरिटरी होती है, जिसका आकार 20 से 100 वर्ग किमी तक हो सकता है। जब एक बाघ दूसरे के क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो यह संघर्ष का कारण बनता है।
  • मादा बाघिन का साथ:
    नर बाघ, मादा बाघिन के साथ प्रजनन के लिए संघर्ष करते हैं। यह प्रजनन प्रक्रिया का एक सामान्य हिस्सा है, लेकिन कभी-कभी यह घातक हो सकता है।
  • संसाधनों की कमी:
    जब क्षेत्र में भोजन, पानी, और स्थान की कमी होती है, तो बाघों के बीच संघर्ष बढ़ जाता है।
  • बढ़ती जनसंख्या और सीमित क्षेत्र:
    संरक्षण प्रयासों से बाघों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन उनके रहने के लिए क्षेत्र सीमित है। इससे आपसी टकराव की घटनाएं बढ़ रही हैं।

बाघिन के शरीर पर चोट के कई निशान

पोस्टमार्टम के दौरान बाघिन के शरीर पर कई चोटों के निशान पाए गए। गर्दन पर दांतों के गहरे निशान, श्वासनली का फटना, और पूरे शरीर पर खरोंचें संघर्ष की कहानी बयां कर रही थीं।

इस प्रक्रिया में वन्यजीव चिकित्सक डॉ. पी.के. चंदन और मुंगेली जिला के पशु चिकित्सकों ने भाग लिया। एनटीसीए के प्रतिनिधि, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी), और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के विशेषज्ञ भी मौके पर उपस्थित थे। पूरी प्रक्रिया एनटीसीए के मानकों के अनुसार की गई।

बाघों के संघर्ष के कुछ अन्य उदाहरण ):

  • पेंच टाइगर रिजर्व, महाराष्ट्र (2021):
    एक युवा नर बाघ ने एक पुराने बाघ के क्षेत्र में प्रवेश किया। दोनों के बीच घातक संघर्ष हुआ, जिसमें युवा बाघ की मौत हो गई।
  • कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, उत्तराखंड (2022):
    क्षेत्रीय वर्चस्व के लिए दो नर बाघों के बीच हुए संघर्ष में एक बाघ गंभीर रूप से घायल हो गया और बाद में उसकी मृत्यु हो गई।
  • कान्हा टाइगर रिजर्व, मध्य प्रदेश (2023):
    एक नर बाघ ने मादा बाघिन और उसके शावकों के क्षेत्र में घुसपैठ की। संघर्ष में बाघिन की मौत हो गई।

क्या है समाधान?

बाघों के बीच संघर्ष को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, क्योंकि यह उनके स्वाभाविक व्यवहार का हिस्सा है। हालांकि, इन घटनाओं को कम करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:

  1. आवास क्षेत्र का विस्तार:
    बाघों के आवास क्षेत्रों का विस्तार किया जाए, ताकि उनके बीच संघर्ष की संभावना कम हो।
  2. सतत निगरानी:
    वन क्षेत्रों में बाघों की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए आधुनिक तकनीकों, जैसे जीपीएस ट्रैकिंग, का उपयोग किया जाए।
  3. संसाधनों की उपलब्धता:
    बाघों के लिए भोजन और पानी के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
  4. मानव हस्तक्षेप को कम करना:
    बाघों के आवास क्षेत्रों में मानवीय गतिविधियों को सीमित किया जाए।

छत्तीसगढ़ में बाघों की घटती संख्या: शिकार और अन्य कारणों से बढ़ती मौतें

छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या में निरंतर गिरावट एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है। राज्य के गठन के 24 वर्षों के भीतर, विशेष रूप से अचानकमार टाइगर रिजर्व (एटीआर) और अन्य क्षेत्रों में बाघों की मौत के कई मामले सामने आए हैं।

बाघों की संख्या में गिरावट

2014 में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 46 बाघ थे। यह संख्या 2018 में घटकर 19 रह गई, और 2022 की गणना में यह और भी कम होकर 17 हो गई।

शिकार के मामले

बाघों की घटती संख्या के पीछे शिकार एक प्रमुख कारण है। 2021 से 2023 के बीच नारायणपुर, बस्तर, भानुप्रतापपुर, कांकेर, सूरजपुर और गरियाबंद में बाघों की खाल बरामद की गई है। 2023 में भी दो खाल जब्त की गई हैं।

अचानकमार टाइगर रिजर्व में हालिया घटनाएं

अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत के कई मामले सामने आए हैं। जनवरी 2025 में, लमनी रेंज के पास एक बाघ का शव मिला, जिसकी मौत के कारणों का पता नहीं चल सका है। इसके अलावा, एक अन्य घटना में, क्षेत्रीय संघर्ष के कारण एक बाघिन की मौत हुई।

सरकारी प्रयास और चुनौतियाँ

बाघों के संरक्षण के लिए सरकार ने पिछले तीन वर्षों में लगभग 184 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, लेकिन इसके बावजूद बाघों की संख्या में वृद्धि नहीं हो पाई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाघों की घटती संख्या और शिकार के बढ़ते मामलों को देखते हुए, यह आवश्यक है कि राज्य में बाघों के संरक्षण के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाए जाएं। शिकार पर सख्त निगरानी, बाघों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा, और जनजागरूकता बढ़ाने के प्रयासों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि राज्य में बाघों की संख्या में स्थिरता लाई जा सके।

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