बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को गिरफ्तार कर लिया है। ईडी ने अपने बयान में कहा है कि लखमा के खिलाफ अवैध शराब बिक्री से कमीशन प्राप्त करने और धन शोधन में शामिल होने के ठोस सबूत मिले हैं।
ईडी ने 28 दिसंबर को रायपुर, धमतरी और सुकमा जिलों में सात स्थानों पर छापेमारी की थी, जहां से नकद लेन-देन और पीओसी (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) के उपयोग से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए थे। इसके साथ ही कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए, जिनसे घोटाले की गहरी परतें उजागर हुईं।
कवासी लखमा की गिरफ्तारी से पहले ईडी ने रायपुर के पूर्व महापौर एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर, आबकारी विभाग के अधिकारी एपी त्रिपाठी और अन्य तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। ईडी का दावा है कि लखमा घोटाले के केंद्र में थे और अवैध शराब की बिक्री से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा उन्हें कमीशन के रूप में मिलता था।
ईडी के मुताबिक, लखमा के सहयोगी सुशील ओझा, जो कांग्रेस के प्रदेश प्रतिनिधि हैं, का भी इस घोटाले में नाम आया है। ओझा फिलहाल विदेश यात्रा पर हैं, लेकिन उनके घर पर ईडी की छापेमारी में अहम सुराग मिले हैं।
लखमा ने गिरफ्तारी से पहले कहा था कि वह ईडी के समक्ष 3 जनवरी को पेश होंगे और जांच में सहयोग करेंगे। लेकिन अब उनकी गिरफ्तारी राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल ला सकती है।
यह घोटाला छत्तीसगढ़ में राजनीतिक और प्रशासनिक भ्रष्टाचार की गंभीरता को उजागर करता है और आने वाले दिनों में इस पर और खुलासे होने की संभावना है।



