00 यीशु मसीह का जन्मोत्सव शहर समाचार आसपास के सभी चर्चा में मनाया गया
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में क्रिसमस का पावन पर्व पूरे उत्साह, श्रद्धा और उमंग के साथ मनाया गया। यह पर्व न केवल मसीही समुदाय बल्कि हर वर्ग के लोगों के लिए प्रेम, एकता, और आनंद का प्रतीक बन गया। चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाओं से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक, हर स्थान पर यीशु मसीह के जन्मोत्सव की धूम देखने को मिली।
चमचमाती रोशनी, सजे-धजे क्रिसमस ट्री और सामूहिक भोज के बीच शहरवासियों ने न केवल आध्यात्मिकता का अनुभव किया बल्कि समाज के लिए प्रार्थना और सेवा का संकल्प भी लिया।




चर्च ऑफ क्राइस्ट: भक्ति और उल्लास का केंद्र
सीएमडी चौक स्थित चर्च ऑफ क्राइस्ट में इस पर्व को भव्य तरीके से मनाया गया। चर्च में विशेष आराधना का आयोजन किया गया, जहां पास्टर सुदेश पाल ने यीशु मसीह के जन्म और उनके जीवन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
पास्टर ने अपने प्रवचन में कहा कि यीशु मसीह मानव जाति को पापों से मुक्ति दिलाने के लिए धरती पर आए।
बाइबल पाठन प्रवीण जैसल ने किया, जबकि प्रार्थना सत्र का नेतृत्व मार्ग्रेट पॉल, पास्टर शामुएल वालेश, और शीबा लुईस ने किया।
कार्यक्रम का संचालन मुकेश पाल ने किया।
गायन समूह की प्रस्तुति ने बांधा समां
कार्यक्रम में चर्च के युवाओं और क्वायर ग्रुप ने मनमोहक गीतों की प्रस्तुति दी। गीत “अब आओ विश्वासियों, जय-जय करते आओ” और “झूमो नाचो खुशी से आज यीशु पैदा हुआ” ने सभी का मन मोह लिया।
इस गायन में रूबी कुमार, शोभा वालेश, नम्रता दास, रेणुका अब्राहम, और प्रगति सिंह जैसे युवा कलाकारों ने भाग लिया।
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पास्टर का संदेश: उद्धार का सही मार्ग
अपने प्रवचन में पास्टर सुदेश पाल ने कहा:
> “भौतिक समृद्धि, आर्थिक संसाधन, और भोग-विलास का जीवन कभी भी आत्मा की शांति और उद्धार का मार्ग नहीं बन सकते। यीशु मसीह का अनुसरण, पश्चाताप और सत्य का मार्ग ही सच्चा उद्धार है।”
उन्होंने सभी से प्रेम, दया, और भाईचारे का अनुसरण करने का आग्रह किया।
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सम्मान समारोह: सामूहिकता का प्रतीक
चर्च के वरिष्ठ सदस्यों को पुष्पहार पहनाकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान समारोह आयोजन में गरिमा और सामूहिकता का प्रतीक बना। सभी ने एक-दूसरे को क्रिसमस की शुभकामनाएं दीं और एकता का संदेश दिया।
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शहर के अन्य चर्चों में भी उत्सव की धूम
शहर के अन्य चर्च, जैसे सिविल लाइन स्थित डिसाइपल्स ऑफ क्राइस्ट चर्च, सेक्रेड हार्ट चर्च भारतमाता, और सेंट थॉमस चर्च, में भी क्रिसमस का पर्व धूमधाम से मनाया गया।
सभी चर्चों को झिलमिलाती रोशनी, सितारों और सजे-धजे क्रिसमस ट्री से सजाया गया।
इन चर्चों में आराधना के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामूहिक भोज का आयोजन हुआ।
लोगों ने एक-दूसरे को केक बांटकर और शुभकामनाएं देकर खुशी का इज़हार किया।
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घर-घर में उत्सव का माहौल
चर्च के अलावा शहर के हर घर में भी क्रिसमस का उल्लास देखने को मिला।
परिवारों ने एक साथ मिलकर यीशु मसीह के जन्म का जश्न मनाया।
बच्चों ने सैंटा क्लॉज के रूप में सजकर अपने दोस्तों और परिवार वालों को उपहार दिए।
घर आए मेहमानों और दोस्तों का मुंह मीठा कराकर शुभकामनाओं का आदान-प्रदान हुआ।
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देश और समाज के लिए विशेष प्रार्थना
इस पावन पर्व पर शहर के विभिन्न चर्चों में पास्टरों और श्रद्धालुओं ने देश की सुख-शांति, समृद्धि और भाईचारे के लिए प्रार्थना की।
पास्टरों ने आग्रह किया कि यीशु मसीह के जीवन और शिक्षाओं को आत्मसात करें।
विशेष प्रार्थना में समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों की सहायता का संकल्प लिया गया।
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क्रिसमस: समाज में प्रेम और एकता का संदेश
क्रिसमस का पर्व केवल धर्म का नहीं बल्कि मानवता, प्रेम, और सेवा का संदेश है। शहरवासियों ने इस दिन अपने व्यवहार और क्रियाकलापों से इस संदेश को प्रभावी ढंग से व्यक्त किया।
> क्रिसमस के पर्व ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया बल्कि समाज में एकता और सामूहिकता का एक नया अध्याय जोड़ा।



