
00 छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में मसीही समाज ने मणिपुर हिंसा पीड़ितों की सहायता का लिया संकल्प
बिलासपुर,जशपुरनगर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में प्रभु यीशु के जन्म का पर्व क्रिसमस इस बार सादगी और परोपकार के अद्भुत संगम के साथ मनाया गया। आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र में 24 दिसंबर की शाम से ही गांव-गांव और शहर में पर्व की रौनक दिखाई देने लगी। चर्च और घर प्रभु यीशु के जन्म की खुशी में सजाए गए, लेकिन इस बार का उत्सव भव्यता से अधिक संवेदनशीलता पर केंद्रित रहा। मणिपुर में हुई हिंसा के पीड़ितों की सहायता के लिए मसीही समाज ने सादगीपूर्ण तरीके से क्रिसमस मनाने और बचत की राशि को उनकी मदद के लिए दान करने का निर्णय लिया।
क्रिसमस की तैयारियां और सजीव झांकियां
जशपुर जिले के कुनकुरी स्थित एशिया के दूसरे सबसे बड़े चर्च, रोजरी की महारानी महागिरजाघर, में इस पर्व की तैयारियां एक महीने पहले ही शुरू हो गई थीं। जिले के 15-16 गांवों को झांकियां बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। ये झांकियां क्रिसमस की रात खास आकर्षण का केंद्र बनीं। प्रत्येक झांकी ने न केवल प्रभु यीशु के जन्म का दृश्य प्रस्तुत किया, बल्कि समाज को महत्वपूर्ण संदेश भी दिए।
महागिरजाघर के अंदर और बाहर विशेष सजावट की गई थी। चर्च के प्रांगण में एक प्रमुख चरनी बनाई गई, जहां प्रभु यीशु के जन्म का सजीव दृश्य प्रस्तुत किया गया। इस चरनी को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। चरनी के साथ-साथ चर्च के अन्य हिस्सों में भी छोटी-छोटी चरनियां सजाई गईं, जो भक्तों के लिए श्रद्धा का केंद्र बनीं।
प्रार्थना और पूजा समारोह
क्रिसमस की पूर्व संध्या पर कुनकुरी महागिरजाघर में आधी रात से पहले विशेष प्रार्थना और पूजन आरंभ हुआ। जशपुर धर्मप्रांत के बिशप एमानुएल केरकेट्टा के नेतृत्व में पुरोहितों के समूह ने प्रार्थना कराई। प्रभु यीशु के आगमन के समय उन्हें चरनी में रखकर पूजा संपन्न की गई। इसके बाद आशीर्वाद और प्रार्थना का क्रम शुरू हुआ। पूरे चर्च परिसर में “मेरी क्रिसमस” की गूंज सुनाई दी और लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देने लगे।
मणिपुर हिंसा पीड़ितों के लिए समाज का कदम
इस वर्ष क्रिसमस पर जशपुर के मसीही समाज ने मणिपुर में हुई हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और सहायता के लिए बचत राशि दान करने का निर्णय लिया। बिशप एमानुएल केरकेट्टा ने कहा, “इस बार क्रिसमस को सादगीपूर्ण तरीके से मनाने का निर्णय लिया गया है ताकि जो धन बचाया जाए, उसे मणिपुर के हिंसा पीड़ितों की सहायता में लगाया जा सके। यह पर्व केवल खुशियां मनाने का नहीं, बल्कि दूसरों की मदद करने का संदेश भी देता है।”
जिले भर में उमंग और एकता
जशपुर जिले के विभिन्न गांवों और छोटे चर्चों में भी विशेष प्रार्थना सभाओं का आयोजन किया गया। 24 दिसंबर की दोपहर से ही लोग गिरजाघरों में एकत्र होने लगे थे। हर स्थान पर प्रभु यीशु के जन्म का उल्लास मनाया गया। इस अवसर पर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों ने समान रूप से भाग लिया और समाज की एकता का परिचय दिया।
समाज को संदेश और प्रेरणा
इस बार के आयोजन ने न केवल धार्मिक उत्साह को बढ़ावा दिया, बल्कि यह भी सिखाया कि उत्सवों का असली उद्देश्य दूसरों की मदद करना और समाज में शांति और सद्भाव का संदेश फैलाना है। जशपुर जिले में मसीही समाज का यह प्रयास पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है।
क्रिसमस का यह पर्व न केवल धार्मिक आयोजन के रूप में, बल्कि सच्चे मानवीय मूल्यों और सेवा भावना के प्रतीक के रूप में याद किया जाएगा।



