
‘हमर पहुना’ में अमर अग्रवाल ने कहा—पहले शहर के अधूरे काम पूरे करना प्राथमिकता, अरपा पार क्षेत्र के विकास पर भी रहेगा फोकस
बिलासपुर। अरपा नदी के पार अलग नगर निगम बनाने की मांग को लेकर बिलासपुर विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री अमर अग्रवाल ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा कार्यकाल में अरपा पार क्षेत्र के लिए अलग नगर निगम बनाना संभव नहीं है, लेकिन भविष्य में इस पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल प्राथमिकता शहर के अधूरे विकास कार्यों को पूरा कराने और बिलासपुर के विस्तार के अनुरूप बुनियादी सुविधाएं मजबूत करने की है।
बिलासपुर प्रेस क्लब के परंपरागत संवाद कार्यक्रम ‘हमर पहुना’ में रविवार को पहुंचे अमर अग्रवाल ने पत्रकारों से शहर के विकास, अरपा नदी, ट्रैफिक व्यवस्था, बाईपास, ओवरब्रिज, एयरपोर्ट, जल निकासी और एजुकेशन हब समेत कई मुद्दों पर खुलकर बातचीत की। उन्होंने कहा कि शहर के विकास की कई योजनाओं का परिणाम तत्काल दिखाई नहीं देता, लेकिन आने वाले वर्षों में उनका असर सामने आएगा।
अरपा पार के लिए अलग निगम का सवाल, बोले—अभी संभव नहीं
कार्यक्रम में अरपा पार क्षेत्र के लिए अलग नगर निगम बनाए जाने के सवाल पर अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि इस कार्यकाल में यह संभव नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि शहर के विस्तार और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इस तरह के विकल्पों पर आगे विचार किया जा सकता है। उनका कहना था कि फिलहाल उपलब्ध संसाधनों और मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था के तहत अधूरे कामों को पूरा करना अधिक जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बिलासपुर का विस्तार लगातार हो रहा है और आने वाले समय में शहर की जरूरतें भी बढ़ेंगी। इसलिए विकास की योजनाएं तत्काल जरूरतों के साथ दीर्घकालीन दृष्टि से भी तैयार करनी होंगी।
‘ड्रीम प्रोजेक्ट नहीं, पहले अधूरे काम पूरे करना जरूरी’
अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के सवाल पर अग्रवाल ने कहा कि शहर के विकास में केवल एक बड़ी योजना को प्राथमिकता देना पर्याप्त नहीं है। सड़क, बिजली और पानी जैसी जरूरतें तत्काल पूरी करनी होती हैं, जबकि यातायात व्यवस्था, शहर का विस्तार और शिक्षा जैसी योजनाओं के परिणाम आने में वर्षों लगते हैं।
उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान जिन अधूरे कार्यों को पूरा कराने का संकल्प लिया था, उनमें से कई कार्य पूरे किए जा चुके हैं। एजुकेशन हब सहित कई योजनाओं को आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि दीर्घकालीन योजनाओं को बजट में शामिल कराने के साथ विभागीय स्तर पर उनकी लगातार समीक्षा भी की जा रही है।
मंत्री से विधायक बने, लेकिन काम करने की इच्छा वही
अग्रवाल ने कहा कि पद से ज्यादा महत्वपूर्ण काम करने की इच्छाशक्ति है। मंत्री रहते हुए प्रशासनिक सुविधा अधिक होती है, लेकिन विधायक के रूप में भी विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा सकते हैं।
उन्होंने बिलासपुर में प्रस्तावित ओवरब्रिज, बाईपास, अरपा नदी के विकास, जल निकासी, एयरपोर्ट और शिक्षा से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि शहर के लिए ऐसी योजनाओं पर काम हो रहा है, जिनका प्रभाव आने वाले वर्षों में दिखाई देगा।
‘राजनीति में आया नहीं, राजनीतिक माहौल में पैदा हुआ’
अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए अग्रवाल ने कहा कि उनका परिवार लंबे समय से सार्वजनिक जीवन और राजनीति से जुड़ा रहा है। उनके पिता स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल जनसंघ और बाद में भाजपा की राजनीति में सक्रिय रहे। उन्होंने बताया कि उनका जन्म 1963 में हुआ और बचपन से ही घर में राजनीतिक माहौल रहा।
छात्र जीवन में खरसिया में हाईस्कूल के दौरान उन्होंने छात्र संघ का चुनाव लड़ा और एक वर्ष अध्यक्ष भी रहे। हालांकि उस समय राजनीति में उनकी विशेष रुचि नहीं थी। उन्होंने बताया कि शुरुआत में डॉक्टर बनने की इच्छा थी और उन्होंने बायोलॉजी विषय लिया था, लेकिन बाद में बीकॉम की पढ़ाई की और बिलासपुर के सीएमडी कॉलेज से शिक्षा पूरी की।
पिता और कुशाभाऊ ठाकरे से मिली राजनीतिक सीख
अग्रवाल ने बताया कि करीब 1990 के आसपास उन्होंने अपने पिता के साथ सहायक के रूप में काम करना शुरू किया। घर में अटल बिहारी वाजपेयी, कुशाभाऊ ठाकरे सहित कई वरिष्ठ नेताओं का आना-जाना रहा। उन्होंने कहा कि कुशाभाऊ ठाकरे ने उन्हें सक्रिय राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में पिता के साथ-साथ वरिष्ठ नेताओं से संगठन, व्यवहार और सार्वजनिक जीवन की बहुत सी बातें सीखने को मिलीं।
पहली फाइल समझने में लगा समय, फिर बना सीखना मूलमंत्र
2003 में विधायक बनने और सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी मिलने का अनुभव साझा करते हुए अग्रवाल ने कहा कि शुरुआत में उनके लिए कई चीजें नई थीं। वित्त मंत्री बनने के बाद पहली फाइल को समझने में काफी समय लगा। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों से सवाल पूछने और व्यवस्था को समझने में कभी संकोच नहीं किया।
उन्होंने कहा, “जो चीज मैं नहीं जानता, उसे पूछने में मुझे कभी संकोच नहीं हुआ। सीखने की आदत मेरे बहुत काम आई।”
लगातार अध्ययन और अनुभव के साथ उनकी कार्यक्षमता बढ़ी और वे बड़ी संख्या में फाइलों का तेजी से निपटारा करने लगे।
विदेश गए तो व्यवस्था समझी, संजीवनी एक्सप्रेस की मिली प्रेरणा
स्वास्थ्य मंत्री के रूप में अपने अनुभव बताते हुए अग्रवाल ने कहा कि विदेश यात्राओं का उद्देश्य केवल घूमना नहीं था, बल्कि वहां की व्यवस्थाओं को समझना था। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित विभिन्न संस्थाओं और देशों की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का अध्ययन किया।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की सोच भी इसी तरह के अध्ययन से विकसित हुई और संजीवनी एक्सप्रेस जैसी व्यवस्था के लिए प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा कि उस समय प्रदेश में संस्थागत प्रसव की स्थिति काफी कम थी। इसके बाद महतारी एक्सप्रेस सहित विभिन्न व्यवस्थाओं के माध्यम से अस्पतालों में प्रसव को बढ़ावा दिया गया।
स्वास्थ्य और स्वच्छता में समाज की भागीदारी जरूरी
अग्रवाल ने कहा कि स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण और यातायात जैसी समस्याओं का समाधान केवल सरकार के भरोसे नहीं किया जा सकता। सामाजिक संस्थाओं, धार्मिक संगठनों और आम नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित ब्लड प्रेशर जांच, स्वच्छ पानी और जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलावों को गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए महत्वपूर्ण बताया।
‘व्यवस्थित जीवन में समय की कमी नहीं होती’
अपने व्यक्तिगत जीवन पर पूछे गए सवालों के जवाब में अग्रवाल ने कहा कि वे जीवन को एक सिस्टम के तहत चलाने में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा, “अगर जीवन व्यवस्थित है तो व्यक्ति नहीं, सिस्टम काम करता है। सभी के पास 24 घंटे होते हैं। जरूरत है समय का सही प्रबंधन करने की।”
उन्होंने बताया कि वे शाकाहारी हैं और घर के सामान्य भोजन के अलावा विभिन्न प्रकार के वेजिटेरियन व्यंजन पसंद करते हैं। हल्के अंदाज में उन्होंने कहा कि समोसा, वड़ा और भजिया जैसी तली हुई चीजें हर किसी की कमजोरी होती हैं।
विकसित भारत में युवाओं की भूमिका निर्णायक
युवाओं की भूमिका पर अग्रवाल ने कहा कि भारत 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने नई शिक्षा नीति, स्किल डेवलपमेंट, इनोवेशन, स्टार्टअप और स्टैंड-अप जैसी पहलों का उल्लेख किया।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं, जानकारी हासिल करें, स्वयं विचार करें और अपने निर्णय खुद लें। अनुशासन, शिक्षा, कौशल और जागरूकता को उन्होंने युवाओं की सबसे बड़ी ताकत बताया।



