अयोध्या तक पहुंची बेलतरा-बिलासपुर की आस्था | विजय केशरवानी ने परिवार सहित रामलला के किए दर्शन, श्रद्धालुओं के नारियल विधिवत किए समर्पित | “ये नारियल नहीं, ननिहाल की भावनाएं हैं”
अयोध्या/बिलासपुर। आंखों में रामलला के दर्शन की लालसा, मन में अपने आराध्य से जुड़ी भावनाएं और हाथों में नारियल… अयोध्या की पावन धरती पर जब बिलासपुर और बेलतरा विधानसभा की श्रद्धा पहुंची तो माहौल भक्ति और भावनाओं से भर उठा। मंदिर से जुड़ी चोरी की घटना से आहत श्रद्धालुओं ने अपनी पीड़ा को विरोध का रूप देने के बजाय श्रद्धा और समर्पण का स्वरूप दिया। तीन दिवसीय “श्रीराम श्रद्धा आस्था यात्रा” के दौरान श्रद्धालुओं से एकत्र किए गए श्रद्धा के नारियल अयोध्या पहुंचाए गए और बेलतरा विधानसभा के पूर्व विधायक प्रत्याशी एवं पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी ने परिवार सहित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के दर्शन कर इन्हें रामलला के श्रीचरणों में विधिवत समर्पित किया।
यह सिर्फ नारियल अर्पित करने का दृश्य नहीं था। इसके पीछे बिलासपुर और बेलतरा विधानसभा के उन रामभक्तों की भावनाएं थीं, जिन्होंने अपने “भांचा श्रीराम” के प्रति प्रेम, श्रद्धा और समर्पण के साथ नारियल अर्पित किए थे।
आस्था को लगी चोट, तो श्रद्धा बन गई संकल्प
अयोध्या में रामलला के धाम से जुड़ी चोरी की घटना ने श्रद्धालुओं को भावनात्मक रूप से आहत किया। रामभक्तों की भावनाओं में पीड़ा थी, लेकिन उसी पीड़ा को श्रद्धा में बदलने का भाव लेकर बिलासपुर और बेलतरा विधानसभा के श्रद्धालुओं ने रामलला के लिए नारियल अर्पित किए।
तीन दिवसीय यात्रा के दौरान अलग-अलग स्थानों पर श्रद्धालुओं से नारियल एकत्र किए गए। इन नारियलों में किसी की मनोकामना थी, किसी की प्रार्थना, किसी का आशीर्वाद और किसी के मन की वह पीड़ा, जिसे वह अपने आराध्य के श्रीचरणों तक पहुंचाना चाहता था।
यात्रा का भाव स्पष्ट था—आस्था को विरोध में नहीं, समर्पण में बदलना।
रामलला के दरबार में बिलासपुर का ननिहाल
विजय केशरवानी ने परिवार सहित अयोध्या पहुंचकर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के दर्शन किए। इसके बाद बेलतरा विधानसभा और बिलासपुर क्षेत्र के श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए नारियलों को रामलला के श्रीचरणों में समर्पित किया।
नारियल समर्पण के इस क्षण में छत्तीसगढ़ की उस आत्मीय लोकभावना की झलक भी दिखाई दी, जिसमें भगवान श्रीराम को “भांचा श्रीराम” कहकर संबोधित किया जाता है।
विजय केशरवानी ने कहा कि उनके हाथों में केवल नारियल नहीं थे, बल्कि बिलासपुर और बेलतरा विधानसभा के रामभक्तों की भावनाएं थीं।
“आज मेरे हाथों में केवल नारियल नहीं थे, बल्कि बिलासपुर सहित बेलतरा विधानसभा के उन रामभक्तों की भावनाएं थीं, जिन्होंने अपनी श्रद्धा और मन की पीड़ा के साथ इन्हें अर्पित किया था। जब इन नारियलों को रामलला के श्रीचरणों में रखा, तो लगा जैसे बिलासपुर और बेलतरा का पूरा ननिहाल अपने भांचा श्रीराम के दरबार में उपस्थित होकर प्रणाम कर रहा हो।”
राम मंदिर—आस्था, तपस्या और प्रतीक्षा का केंद्र
विजय केशरवानी ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए केवल एक भवन या धार्मिक स्थल नहीं है। यह उनकी आस्था, तपस्या, संघर्ष, प्रतीक्षा और भावनाओं से जुड़ा पवित्र केंद्र है।
उनके मुताबिक मंदिर से जुड़ी घटना ने रामभक्तों को स्वाभाविक रूप से आहत किया, लेकिन बिलासपुर और बेलतरा विधानसभा के श्रद्धालुओं ने उस पीड़ा को किसी विवाद या कटुता में बदलने के बजाय श्रद्धा और संकल्प का रूप दिया।
उन्होंने कहा—
“हमारी भावना किसी के विरोध की नहीं थी। हमारी भावना केवल इतनी थी कि जिस आस्था को ठेस पहुंची है, उसे श्रद्धा से संबल मिले। बेलतरा और बिलासपुर के ननिहाल ने अपने भांचा श्रीराम के चरणों में श्रद्धा का नारियल रखकर यही संदेश दिया है कि हमारी आस्था अटूट है।”
भांचा श्रीराम और छत्तीसगढ़ का ननिहाल—रिश्ता आस्था से भी आगे
छत्तीसगढ़ की लोकपरंपरा में भगवान श्रीराम को भांचा मानने की भावना बेहद आत्मीय है। यही कारण है कि अयोध्या से जुड़ी किसी घटना का भावनात्मक असर छत्तीसगढ़ के रामभक्तों के बीच अलग तरह से महसूस किया जाता है।
बेलतरा और बिलासपुर के श्रद्धालुओं ने भी इसी आत्मीय भाव के साथ रामलला के प्रति अपनी श्रद्धा अयोध्या तक पहुंचाई।
विजय केशरवानी ने कहा—
“भांचा और ननिहाल का रिश्ता शब्दों से नहीं, भावनाओं से समझा जाता है। छत्तीसगढ़ के लिए श्रीराम केवल आराध्य नहीं, हमारे भांचा हैं। बिलासपुर सहित बेलतरा विधानसभा की जनता ने इसी आत्मीय रिश्ते के साथ अपनी श्रद्धा अयोध्या तक पहुंचाई और रामलला के चरणों में समर्पित की है।”
अयोध्या से पहले काशी, देवघर और विंध्याचल की धार्मिक यात्रा
रामलला के दर्शन से पहले विजय केशरवानी ने परिवार सहित कई प्रमुख तीर्थस्थलों पर दर्शन और पूजा-अर्चना की।
उन्होंने देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम, काशी विश्वनाथ मंदिर, संकट मोचन हनुमान मंदिर, दुर्गा कुंड स्थित मां दुर्गा मंदिर, सारनाथ स्थित बाबा सारंगनाथ महादेव, बनारस के कैथी स्थित बाबा मार्कंडेय महादेव तथा विंध्याचल स्थित मां विंध्यवासिनी देवी के दर्शन किए।
इन सभी पवित्र धामों में उन्होंने छत्तीसगढ़, बिलासपुर, बेलतरा विधानसभा और समस्त जनमानस के लिए सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की कामना की।
इस धार्मिक यात्रा में काशी की आध्यात्मिकता, देवघर की शिवभक्ति, विंध्याचल की शक्तिसाधना और अयोध्या की रामभक्ति का भाव एक साथ दिखाई दिया।
तीन दिन तक चला श्रद्धा का संकल्प
“श्रीराम श्रद्धा आस्था यात्रा” तीन दिनों तक चली। इस दौरान बेलतरा विधानसभा सहित बिलासपुर क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं से श्रद्धा के नारियल एकत्र किए गए।
यात्रा का मूल भाव मंदिर से जुड़ी घटना से आहत श्रद्धालुओं की भावनाओं को विरोध के बजाय श्रद्धा, प्रार्थना और समर्पण के माध्यम से रामलला तक पहुंचाना था।
विजय केशरवानी ने यात्रा के अनुभव को साझा करते हुए कहा—
“तीन दिन तक हम बेलतरा विधानसभा और बिलासपुर क्षेत्र के लोगों के बीच गए। श्रद्धालुओं ने जिस भाव से नारियल अर्पित किए, उसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। किसी ने इसे अपनी मनोकामना के साथ दिया, किसी ने आशीर्वाद के रूप में और किसी ने अपने आहत मन की श्रद्धा के रूप में। आज उन सभी भावनाओं को रामलला के चरणों में समर्पित कर हमारा संकल्प पूर्ण हुआ है।”
नारियल में समाई मनोकामना, प्रार्थना और भावनाएं
इस यात्रा की सबसे खास बात यह रही कि नारियल केवल पूजा सामग्री बनकर अयोध्या नहीं पहुंचे। श्रद्धालुओं के लिए यह उनके मन के भावों का प्रतीक था।
किसी ने इसे मनोकामना के रूप में दिया, किसी ने आशीर्वाद के रूप में और किसी ने अपने मन की पीड़ा और श्रद्धा के साथ रामलला को समर्पित करने के लिए दिया।
बेलतरा से अयोध्या तक पहुंची यह श्रद्धा उस भाव को सामने लाती है, जिसमें भक्त अपने आराध्य के सामने शब्दों से ज्यादा भावनाओं के माध्यम से अपनी बात रखता है।
“अयोध्या में आज नारियल नहीं, बिलासपुर और बेलतरा का स्नेह पहुंचा”
रामलला के दर्शन और नारियल समर्पण के बाद विजय केशरवानी ने यात्रा में सहभागी सभी रामभक्तों के प्रति आभार जताया।
उन्होंने कहा—
“अयोध्या में आज केवल नारियल नहीं पहुंचे हैं। बिलासपुर सहित बेलतरा विधानसभा का स्नेह पहुंचा है, रामभक्तों की प्रार्थना पहुंची है और अपने भांचा श्रीराम के प्रति अटूट विश्वास पहुंचा है। जिन हाथों ने श्रद्धा से नारियल अर्पित किए थे, उन सभी हाथों की भावनाएं आज रामलला के चरणों तक पहुंची हैं। यही हमारी श्रद्धा है, यही हमारा समर्पण है और यही बिलासपुर सहित बेलतरा विधानसभा का अपने भांचा श्रीराम के प्रति प्रेम है।”
बेलतरा से अयोध्या तक—एक भाव, एक यात्रा, एक समर्पण
बेलतरा विधानसभा से शुरू हुई श्रद्धा की यह यात्रा अयोध्या में रामलला के श्रीचरणों तक पहुंचकर पूरी हुई। रास्ते में श्रद्धालुओं की भावनाएं जुड़ती गईं और तीन दिनों की यात्रा के बाद वही भाव राम जन्मभूमि के पावन धाम में समर्पित हुआ।
आंखों में रामलला के दर्शन की चमक, मन में भांचा श्रीराम के लिए प्रार्थना और हाथों में श्रद्धा के नारियल—बिलासपुर और बेलतरा की यह आस्था अयोध्या के रामदरबार तक पहुंची और रामलला के चरणों में समर्पित हो गई।
— विजय केशरवानी
पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक प्रत्याशी, बेलतरा विधानसभा



