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“अमाली में कोल वाशरी नहीं चलेगी”: सर्वआदिवासी समाज युवा प्रभाग के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष परते ने खोला मोर्चा, जनसुनवाई स्थगित करने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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पेसा कानून, पर्यावरण और ग्रामीणों के भविष्य का सवाल; 19 जून की जनसुनवाई रोकने उठी जोरदार मांग
बिलासपुर। कोटा विकासखंड के ग्राम पंचायत अमाली में प्रस्तावित कोल वाशरी परियोजना को लेकर विरोध तेज हो गया है। सर्वआदिवासी समाज युवा प्रभाग के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष परते ने इस मुद्दे पर खुलकर मोर्चा खोल दिया है। मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अमाली और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के भविष्य, पर्यावरण, कृषि भूमि और आदिवासी अधिकारों को प्रभावित करने वाली इस परियोजना पर बिना व्यापक सहमति के आगे बढ़ना उचित नहीं होगा।

उन्होंने 19 जून 2026 को प्रस्तावित जनसुनवाई को तत्काल स्थगित करने की मांग करते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।
सुभाष परते ने कहा कि यह केवल एक औद्योगिक परियोजना का मामला नहीं है, बल्कि आदिवासी क्षेत्र के अधिकारों, पर्यावरणीय संतुलन और ग्रामीणों के जीवन से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ग्रामीणों की आपत्तियों और संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित जनसुनवाई को स्थगित किया जाए।
कृषि भूमि पर व्यवसायिक गतिविधि का आरोप
ज्ञापन में कहा गया है कि जिस भूमि पर कोल वाशरी प्रस्तावित है, वह जमीन कृषि उपयोग के नाम पर खरीदी गई थी। अब उसी भूमि का व्यवसायिक उपयोग किए जाने की तैयारी की जा रही है, जो नियमों के विपरीत बताया जा रहा है। इस बिंदु को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है।
पेसा कानून का हवाला, ग्रामसभा के अधिकारों का मुद्दा
सुभाष परते ने कहा कि ग्राम पंचायत अमाली पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, जहां पेसा कानून लागू है। ऐसे क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों और विकास परियोजनाओं से जुड़े निर्णयों में ग्रामसभा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ज्ञापन में दावा किया गया है कि इस स्थिति में प्रस्तावित जनसुनवाई न्यायोचित नहीं है और ग्राम पंचायत के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।
महाविद्यालय से महज 200 मीटर दूरी पर प्रस्तावित वाशरी
विरोध का एक बड़ा आधार यह भी है कि प्रस्तावित कोल वाशरी स्थल से लगभग 200 मीटर की दूरी पर शासकीय महाविद्यालय संचालित है। ज्ञापन में आशंका जताई गई है कि कोल वाशरी शुरू होने के बाद धूल, प्रदूषण और अन्य गतिविधियों का सीधा असर विद्यार्थियों और शैक्षणिक वातावरण पर पड़ सकता है।
अचानकमार टाइगर रिजर्व पर भी जताई चिंता
सर्वआदिवासी समाज ने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया है कि प्रस्तावित परियोजना स्थल से अचानकमार टाइगर रिजर्व क्षेत्र की हवाई दूरी लगभग 10 किलोमीटर बताई जा रही है। ऐसे में परियोजना के संचालन से वन्यजीवों और पर्यावरण पर संभावित प्रभाव को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
खेती, पानी और हवा पर असर की आशंका
सुभाष परते ने कहा कि कोल वाशरी से निकलने वाले अपशिष्ट जल और वायु प्रदूषण का असर अमाली सहित आसपास के गांवों की कृषि योग्य भूमि पर पड़ सकता है। ज्ञापन में आशंका जताई गई है कि प्रदूषण बढ़ने की स्थिति में खेती-किसानी प्रभावित हो सकती है और ग्रामीणों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
बाहरी लोगों की आवाजाही और कानून-व्यवस्था पर सवाल
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि कोल वाशरी खुलने के बाद बाहरी लोगों की आवाजाही बढ़ सकती है, जिससे क्षेत्र की सामाजिक संरचना और शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। ग्रामीणों के बीच इस मुद्दे को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है।
स्वास्थ्य पर प्रभाव का मुद्दा भी उठाया
सुभाष परते ने कहा कि कोयला आधारित औद्योगिक गतिविधियों से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने की आशंका रहती है। ज्ञापन में दावा किया गया है कि यदि परियोजना शुरू होती है तो अमाली और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को स्वास्थ्यगत दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
जनसुनवाई स्थगित करने की मांग
सर्वआदिवासी समाज युवा प्रभाग के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष परते ने प्रशासन से मांग की है कि ज्ञापन में उठाई गई आपत्तियों और ग्रामीणों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाए तथा 19 जून 2026 को प्रस्तावित जनसुनवाई को स्थगित किया जाए। इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज है और ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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