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कोटा में कोल वाशरी पर बवाल: सर्व आदिवासी समाज ने खोला मोर्चा, युवा कांग्रेस भी मैदान में; जनसुनवाई से पहले बढ़ा विरोध, पेसा कानून, पर्यावरण, खेती और स्वास्थ्य का मुद्दा गरमाया; 19 जून की जनसुनवाई स्थगित करने उठी मांग, देखिए वीडियो….

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर।
कोटा विकासखंड के ग्राम पंचायत अमाली में प्रस्तावित कोल वाशरी परियोजना को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। एक ओर सर्वआदिवासी समाज युवा प्रभाग के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष परते ने परियोजना के खिलाफ खुला मोर्चा खोलते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर 19 जून को प्रस्तावित जनसुनवाई स्थगित करने की मांग की है, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ प्रदेश युवा कांग्रेस और एनएसयूआई ने भी परियोजना की निष्पक्ष जांच और जनसुनवाई प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


मामले ने अब केवल एक औद्योगिक परियोजना का स्वरूप नहीं रखा है, बल्कि आदिवासी अधिकार, पेसा कानून, पर्यावरण संरक्षण, कृषि भूमि, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे कई संवेदनशील मुद्दे एक साथ केंद्र में आ गए हैं। जनसुनवाई से ठीक पहले विरोध के स्वर तेज होने से प्रशासन और परियोजना प्रबंधन दोनों की निगाहें अब अमाली पर टिक गई हैं।
“अमाली में कोल वाशरी नहीं चलेगी” : सुभाष परते


सर्वआदिवासी समाज युवा प्रभाग के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष परते ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि अमाली और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के भविष्य से जुड़े इस विषय पर ग्रामीणों की आशंकाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि परियोजना से कृषि, पर्यावरण और स्थानीय सामाजिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।
कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में उन्होंने कई बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि जिस भूमि पर कोल वाशरी प्रस्तावित है, वह कृषि प्रयोजन के नाम पर खरीदी गई थी और अब उसका व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है।
पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची का हवाला
सुभाष परते ने कहा कि ग्राम पंचायत अमाली पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, जहां पेसा कानून लागू है। ऐसे क्षेत्रों में ग्रामसभा को विशेष अधिकार प्राप्त हैं। ज्ञापन में दावा किया गया है कि स्थानीय ग्राम पंचायत और ग्रामीणों की सहमति के बिना जनसुनवाई प्रक्रिया न्यायोचित नहीं मानी जा सकती।
महाविद्यालय, खेती और टाइगर रिजर्व का मुद्दा
ज्ञापन में कहा गया है कि प्रस्तावित कोल वाशरी से लगभग 200 मीटर दूरी पर शासकीय महाविद्यालय संचालित है। ऐसे में धूल और प्रदूषण का असर विद्यार्थियों तथा शैक्षणिक वातावरण पर पड़ने की आशंका है।
इसके अलावा प्रस्तावित परियोजना स्थल से अचानकमार टाइगर रिजर्व क्षेत्र की हवाई दूरी लगभग 10 किलोमीटर बताई गई है। वन्यजीवों और पर्यावरण पर संभावित प्रभाव को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
सुभाष परते ने कहा कि कोल वाशरी से निकलने वाले प्रदूषित जल और वायु का असर आसपास की कृषि भूमि पर पड़ सकता है, जिससे खेती प्रभावित होने की आशंका है।
स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभावों पर भी चिंता
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि कोल वाशरी शुरू होने से बाहरी लोगों की आवाजाही बढ़ सकती है, जिससे क्षेत्र की सामाजिक संरचना और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। साथ ही धूल और प्रदूषण के कारण ग्रामीणों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने की आशंका भी व्यक्त की गई है।


युवा कांग्रेस ने भी उठाए सवाल


इस बीच छत्तीसगढ़ प्रदेश युवा कांग्रेस ने भी परियोजना को लेकर मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश महासचिव आदिल आलम खेरानी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में जनसुनवाई प्रक्रिया और परियोजना से जुड़े कई पहलुओं पर सवाल उठाए गए हैं।
युवा कांग्रेस ने मांग की है कि परियोजना के पर्यावरणीय, सामाजिक और स्वास्थ्यगत प्रभावों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार की स्वीकृति न दी जाए।
एनएसयूआई ने कहा- विद्यार्थी और किसान होंगे प्रभावित


एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष लक्की मिश्रा ने कहा कि प्रस्तावित कोल वाशरी के आसपास विद्यालय, आबादी क्षेत्र और कृषि भूमि मौजूद हैं। ऐसे में परियोजना से उत्पन्न होने वाले धूल, जल एवं वायु प्रदूषण का सीधा असर स्थानीय निवासियों, विद्यार्थियों और किसानों पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और सभी तथ्यों को सार्वजनिक किए बिना आगे बढ़ना उचित नहीं होगा।
कोयला भंडारण और परिवहन गतिविधियों पर सवाल
युवा कांग्रेस ने ज्ञापन में आरोप लगाया है कि जनसुनवाई से पहले ही परियोजना स्थल पर कोयले के भंडारण और परिवहन जैसी गतिविधियां शुरू किए जाने की शिकायतें मिल रही हैं। संगठन ने इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ईआईए रिपोर्ट और स्वीकृतियां सार्वजनिक करने की मांग
युवा कांग्रेस ने परियोजना से संबंधित पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) रिपोर्ट, पर्यावरण प्रबंधन योजना, प्रदूषण नियंत्रण उपायों और सभी आवश्यक स्वीकृतियों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
संगठन ने राजस्व, खनिज और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की संयुक्त टीम गठित कर स्थल निरीक्षण कराने तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर वैधानिक कार्रवाई की मांग भी उठाई है।
जांच पूरी होने तक मंजूरी नहीं देने की मांग
युवा कांग्रेस का कहना है कि जब तक सभी जांच पूरी नहीं हो जातीं और ग्रामीणों की आपत्तियों का संतोषजनक निराकरण नहीं हो जाता, तब तक परियोजना को किसी भी प्रकार की पर्यावरणीय अथवा अन्य स्वीकृति नहीं दी जानी चाहिए।
संगठन ने यह भी कहा है कि यदि स्थानीय लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज कर परियोजना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया तो लोकतांत्रिक और कानूनी स्तर पर व्यापक विरोध दर्ज कराया जाएगा।
अब प्रशासन के फैसले पर टिकी निगाहें
19 जून को प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले सर्वआदिवासी समाज और युवा कांग्रेस के विरोध ने अमाली की कोल वाशरी परियोजना को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ पेसा कानून, पर्यावरण और ग्रामीण हितों का सवाल उठाया जा रहा है, तो दूसरी तरफ परियोजना की प्रक्रिया और स्वीकृतियों को लेकर पारदर्शिता की मांग की जा रही है। ऐसे में अब सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम और जनसुनवाई को लेकर होने वाले निर्णय पर टिकी हुई हैं।

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