बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ में बिजली दर वृद्धि को लेकर राजनीतिक संग्राम तेज हो गया है। बिलासपुर में आयोजित प्रेसवार्ता में छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेता धनेंद्र साहू ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार बिजली के बढ़े हुए दामों और भारी-भरकम बिलों के जरिए आम जनता से वसूली कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार महंगाई से जूझ रही जनता को राहत देने के बजाय लगातार आर्थिक बोझ बढ़ा रही है।


धनेंद्र साहू ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा बिजली की दरों में की गई नई बढ़ोतरी जनता पर सीधा अत्याचार है। कांग्रेस इसका पुरजोर विरोध करती है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तथा गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक वृद्धि की है। इसके साथ ही कृषि पंपों की बिजली दरों में भी 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी कर किसानों पर अतिरिक्त बोझ डाला गया है।
‘भाजपा सरकार में पांचवीं बार बढ़े बिजली के दाम’
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद यह पांचवीं बार है जब बिजली की दरों में वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा कि पहले से ही महंगे बिजली बिलों से परेशान उपभोक्ताओं को राहत देने के बजाय सरकार लगातार नए आर्थिक भार थोप रही है। हाल ही में 12 प्रतिशत विद्युत ईंधन अधिभार (एमपीपीएस) के नाम पर भी बिजली महंगी की गई थी।
उन्होंने कांग्रेस शासनकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि पांच वर्षों में बिजली दरों में केवल दो पैसे की वृद्धि हुई थी, जबकि उस दौरान 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना लागू थी, जिससे लाखों उपभोक्ताओं को राहत मिल रही थी।
‘बिजली बिल हाफ योजना बंद, अब लगातार बढ़ रहा बोझ’
प्रेसवार्ता में साहू ने कहा कि भाजपा सरकार ने पहले बिजली बिल हाफ योजना बंद की और उसके बाद लगातार पांच बार बिजली दरों में बढ़ोतरी कर दी। उनके अनुसार सरकार जनता की परेशानियों को कम करने के बजाय आर्थिक दबाव बढ़ाने का काम कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली विभाग उपभोक्ताओं को बिलिंग प्रक्रिया के जरिए परेशान कर रहा है। पिछले कुछ महीनों से लोगों के बिजली बिल सामान्य से तीन से चार गुना तक आ रहे हैं, जिससे व्यापक असंतोष की स्थिति बन रही है।
‘एक ही महीने में अलग-अलग बिल, बिना सहमति बढ़ाया जा रहा लोड’
कांग्रेस नेता ने बिजली वितरण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। उनका आरोप है कि कई उपभोक्ताओं को एक ही माह में ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से अलग-अलग बिल भेजे जा रहे हैं। साथ ही बिना उपभोक्ता की सहमति के अनुबंध भार क्षमता (लोड) बढ़ाई जा रही है, जबकि ऐसा करने के लिए उपभोक्ता की सहमति आवश्यक होती है।
उन्होंने कहा कि बढ़े हुए लोड के आधार पर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त शुल्क और अर्थदंड भी लगाया जा रहा है, जिससे बिजली बिल और अधिक बढ़ रहे हैं।
स्मार्ट मीटर पर बड़ा सवाल, कांग्रेस ने उठाई जांच की मांग
धनेंद्र साहू ने स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं की बिजली खपत वास्तविक उपयोग से अधिक दर्ज की जा रही है। उनके मुताबिक कई स्थानों से शिकायतें मिली हैं कि स्मार्ट मीटर सामान्य मीटरों की तुलना में अधिक तेजी से चल रहे हैं, जिसके कारण बिजली बिल अप्रत्याशित रूप से बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार पहले स्मार्ट मीटर के जरिए अधिक खपत दर्ज कर रही है और फिर उसी आधार पर उपभोक्ताओं का अनुबंध भार बढ़ाकर अतिरिक्त आर्थिक दंड लगा रही है।
‘45 लाख उपभोक्ताओं को औसत से तीन गुना अधिक बिल’
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि जून माह में प्रदेश के 45 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को सामान्य औसत से कई गुना अधिक बिजली बिल प्राप्त हुए हैं। उनके अनुसार बढ़े हुए बिलों के कारण आम नागरिकों में भारी नाराजगी है और लोग आर्थिक दबाव महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक ओर बिजली कटौती की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं को भारी-भरकम बिल थमाए जा रहे हैं। सरकार चौबीस घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित नहीं कर पा रही है, लेकिन वसूली लगातार बढ़ रही है।
कांग्रेस ने गिनाए बढ़े बिजली बिल के तीन कारण
प्रेसवार्ता में धनेंद्र साहू ने बढ़े हुए बिजली बिलों के लिए तीन प्रमुख कारण गिनाए। उनके अनुसार पहला कारण बिजली दरों में लगातार वृद्धि है, दूसरा बिजली बिल हाफ योजना का बंद होना और तीसरा स्मार्ट मीटरों के कारण कथित रूप से बढ़ी हुई खपत दर्ज होना।
उन्होंने कहा कि इन तीनों कारणों का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है और यही वजह है कि प्रदेशभर में बिजली बिलों को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है।
उत्तरप्रदेश का हवाला, छत्तीसगढ़ में भी उठी मांग
स्मार्ट मीटर विवाद को लेकर कांग्रेस नेता ने उत्तरप्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की भाजपा सरकार स्मार्ट मीटरों को वापस लेने का निर्णय कर चुकी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार को स्मार्ट मीटर व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।
प्रेसवार्ता के दौरान कांग्रेस ने बिजली दर वृद्धि, बढ़े हुए बिजली बिल, स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली, बिजली कटौती और उपभोक्ताओं की शिकायतों को प्रमुख मुद्दा बनाते हुए राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। वहीं भाजपा सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



