Latest news

बिलासपुर की हाउसिंग सोसायटियों में बड़ा खुलासा, 90% कॉलोनियां अब तक नहीं हुईं हैंडओवर, रहवासी अधिकारों और सुविधाओं के लिए परेशान

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
6 Min Read


आवासीय सहकारी समिति मंच ने उठाए सवाल, कहा- बिल्डर्स वर्षों से बनाए हुए हैं नियंत्रण; नए उपविधियों को लागू करने की मांग
बिलासपुर। शहर में तेजी से विकसित हुई आवासीय कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स में रहने वाले हजारों परिवार आज भी मूलभूत सुविधाओं और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह दावा पंजीकृत आवासीय सहकारी समिति मंच ने बुधवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान किया। मंच के पदाधिकारियों ने बिल्डर्स, प्रशासन और सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आवासीय सहकारी समितियों को मजबूत बनाने तथा नए उपविधियों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की।
प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए मंच के संयोजक सुजीत कुमार मित्रा, सह-संयोजक जी. वाय. फड़के, सदस्य पी.सी. दास, राजीव कुमार और अजय बाटवे ने कहा कि बिलासपुर की अधिकांश हाउसिंग सोसायटियां आज भी अपनी वैधानिक शक्तियों और अधिकारों का पूर्ण उपयोग नहीं कर पा रही हैं। इसके पीछे बिल्डर्स द्वारा कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स का समय पर हैंडओवर नहीं किया जाना सबसे बड़ा कारण है।
RTI में सामने आईं कई विसंगतियां
मंच के पदाधिकारियों ने बताया कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त दस्तावेजों और जानकारियों के अध्ययन में कई विसंगतियां सामने आई हैं। उनका कहना है कि शहर की अनेक कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स का संचालन निर्धारित नियमों और प्रावधानों के अनुरूप नहीं हो रहा है।
मंच के अनुसार, आवासीय परियोजनाओं के विकास के दौरान रहवासियों को उनके अधिकारों, सहकारी समितियों की भूमिका और हैंडओवर प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं दी गई, जिसका खामियाजा आज हजारों परिवार भुगत रहे हैं।
90 प्रतिशत से अधिक कॉलोनियां अब तक नहीं हुईं हैंडओवर
प्रेसवार्ता में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया कि वर्ष 2006 से लेकर अब तक बिलासपुर में विकसित 90 प्रतिशत से अधिक आवासीय कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स का विधिवत हैंडओवर नहीं किया गया है।
संयोजक सुजीत कुमार मित्रा ने कहा कि कई बिल्डर्स जमीन और फ्लैट बेचने के बाद भी परिसरों पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न विभागों में प्रभाव और संपर्कों के कारण कई मामलों को वर्षों तक लंबित रखा जाता है, जिससे सोसायटियों को उनका वैधानिक अधिकार नहीं मिल पाता।
उन्होंने कहा कि हैंडओवर नहीं होने के कारण रहवासी अपने परिसर में मंदिर निर्माण, सौर ऊर्जा संयंत्र (सोलर सिस्टम) लगाने, सामुदायिक भवन विकसित करने अथवा अन्य विकास कार्य स्वतंत्र रूप से नहीं कर पा रहे हैं।
सहकारिता विभाग की भूमिका पर भी उठे सवाल
मंच के पदाधिकारियों ने सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उनका आरोप है कि रहवासियों द्वारा लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद समस्याओं का प्रभावी समाधान नहीं हो रहा है।
प्रेसवार्ता में कहा गया कि शिकायतों के निस्तारण के बजाय कई मामलों में विभागीय स्तर पर बिल्डर्स के पक्ष में झुकाव दिखाई देता है, जिससे विवाद और जटिल होते जा रहे हैं। मंच ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
अधूरी सुविधाओं के बीच हैंडओवर का आरोप
मंच के सदस्य अजय बाटवे ने आरोप लगाया कि कुछ बिल्डर्स फायर सेफ्टी, सुरक्षा मानकों और अन्य अनिवार्य व्यवस्थाओं को पूरा किए बिना ही कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स को सोसायटी के हवाले करने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में संबंधित बिल्डर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कॉलोनाइजर लाइसेंस निरस्त करने जैसी कार्रवाई की जानी चाहिए।
मेंटेनेंस शुल्क के बावजूद सुविधाओं का अभाव
मंच के सदस्य राजीव कुमार ने कहा कि अधिकांश रहवासी नियमित रूप से मेंटेनेंस शुल्क, यूजर चार्ज और अन्य करों का भुगतान करते हैं। इसके बावजूद कई कॉलोनियों में साफ-सफाई, पेयजल आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए लोगों को परेशान होना पड़ रहा है।
उनका कहना है कि रहवासी आर्थिक रूप से सभी दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
नए उपविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग
प्रेसवार्ता के दौरान मंच ने राज्य सरकार द्वारा सहकारी समितियों के लिए बनाए गए नए उपविधियों को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग भी उठाई। पदाधिकारियों का कहना है कि यदि नए नियमों का सही तरीके से पालन कराया जाए तो आवासीय सहकारी समितियां अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बन सकेंगी।
आंदोलन की चेतावनी
मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि आवासीय सोसायटियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं किया गया तो शहर के विभिन्न आवासीय परिसरों में रहने वाले लोग व्यापक आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए रहवासियों के हित में ठोस कदम उठाने की मांग की।

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।