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तीन ट्रैक्टरों में भरकर कलेक्टोरेट पहुंचे ग्रामीण, खदानों की ब्लास्टिंग से दहशत; घरों में 5 इंच तक दरारें, महिलाओं ने खोला मोर्चा

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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कनेरी में पत्थर खदानों के खिलाफ चौथे दिन उग्र हुआ आंदोलन, पुलिस पर टेंट-कुर्सियां जब्त करने का आरोप; कलेक्टोरेट घेरकर प्रशासन और खनिज विभाग से मांगा जवाब


बिलासपुर। मस्तूरी विकासखंड के कनेरी गांव में पत्थर खदानों में लगातार हो रही ब्लास्टिंग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सड़कों पर उतर आया है। बुधवार को तीन ट्रैक्टरों में सवार होकर बड़ी संख्या में ग्रामीण, विशेषकर महिलाएं, कलेक्टोरेट पहुंचीं और खदान संचालकों, प्रशासनिक व्यवस्था तथा जिम्मेदार विभागों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि खदानों में किए जा रहे विस्फोटों ने उनके घरों को खतरनाक स्थिति में पहुंचा दिया है। कई मकानों की दीवारों में चार से पांच इंच तक चौड़ी दरारें पड़ चुकी हैं, छतों का प्लास्टर झड़ रहा है और कुछ मकानों में दरारें इतनी गहरी हो गई हैं कि आरपार देखा जा सकता है।


ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
चौथे दिन धरना, फिर पुलिस कार्रवाई से भड़का गुस्सा
कनेरी गांव में खदानों के खिलाफ ग्रामीण लगातार चौथे दिन धरने पर बैठे थे। इसी दौरान पुलिस द्वारा धरना स्थल से टेंट और कुर्सियां जब्त किए जाने की कार्रवाई ने ग्रामीणों के गुस्से को और बढ़ा दिया। ग्रामीणों ने इसे आंदोलन को दबाने की कोशिश बताते हुए विरोध जताया और इसके खिलाफ कलेक्टोरेट का घेराव करने का निर्णय लिया।


दोपहर होते-होते कलेक्टोरेट परिसर के बाहर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए। महिलाओं ने मोर्चा संभाला और प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शन को देखते हुए पूरे कलेक्टोरेट परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने ग्रामीणों को परिसर के भीतर जाने से रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।
विशाल स्टोन क्रशर और हरिकृपा मिनरल्स पर गंभीर आरोप
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने महामाया विशाल स्टोन क्रशर और हरिकृपा मिनरल्स क्रशर के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए। ग्रामीणों का कहना है कि खदानों में नियमों की अनदेखी करते हुए लगातार ब्लास्टिंग की जा रही है, जिसके कंपन से गांव के कच्चे और पक्के मकान प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार केवल मकान ही नहीं, बल्कि कुएं, बोरवेल और अन्य जल स्रोत भी प्रभावित हुए हैं। कई स्थानों पर जलस्तर और जलस्रोतों की स्थिति पर असर पड़ा है, जिससे खेती-किसानी और घरेलू उपयोग के लिए पानी की समस्या बढ़ रही है।
घरों की दीवारों में दरारें, छतों से झड़ रहा प्लास्टर
ग्रामीणों ने प्रशासन को बताया कि कई मकानों में दीवारों पर चौड़ी दरारें साफ दिखाई दे रही हैं। लगातार हो रही ब्लास्टिंग के कारण कंपन सीधे मकानों तक पहुंच रहा है। कुछ घरों की छतों का प्लास्टर गिर रहा है, जबकि कई परिवारों ने अपने घरों में रहना तक असुरक्षित बताया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन मकानों में दरारें आई हैं, वहां बारिश के मौसम में खतरा और बढ़ सकता है।
महिलाओं ने संभाली आंदोलन की कमान
कलेक्टोरेट घेराव के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद रहीं। महिलाओं ने आरोप लगाया कि वर्षों से खदानों की समस्या झेलने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा से ज्यादा महत्व खदान संचालन को दिया जा रहा है।
प्रदर्शन में दिलेश धृतलहरे, सोना कोशले, नारायण रात्रे, सरपंच पति अनिल कुमार, पंच अमित कुमार, सुनील विशाल, अनंत, संजू यादव, मुन्ना यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं शामिल रहीं।
कलेक्टर से मुलाकात, पुलिस कार्रवाई की शिकायत
घेराव के दौरान ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से मुलाकात की। ग्रामीणों ने पुलिस द्वारा टेंट और कुर्सियां जब्त किए जाने की शिकायत करते हुए इसे अनुचित कार्रवाई बताया।
इस पर कलेक्टर ने कहा कि बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन आयोजित नहीं किया जा सकता। हालांकि उन्होंने पूरे मामले में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
कलेक्टर से मुलाकात के बाद ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। अब वे एसडीएम से अनुमति लेकर और संबंधित थाने को सूचना देकर नियमानुसार धरना-प्रदर्शन करेंगे।
हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
ग्रामीणों ने कहा कि यदि प्रशासनिक स्तर पर समाधान नहीं निकला तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। आंदोलनकारियों ने जरूरत पड़ने पर हाईकोर्ट जाने की बात कही है।
संयुक्त सर्वे और मुआवजे की मांग
प्रदर्शनकारियों ने राजस्व, खनिज और तकनीकी विभाग की संयुक्त जांच टीम गठित करने की मांग उठाई। उनका कहना है कि क्षतिग्रस्त मकानों, कुओं, बोरवेल और कृषि भूमि का विस्तृत सर्वे कराया जाए।
ग्रामीणों ने प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग करते हुए कहा कि नुकसान का वास्तविक आकलन किए बिना समस्या का समाधान संभव नहीं है।


पर्यावरण स्वीकृति से लेकर विस्फोटक लाइसेंस तक जांच की मांग
आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने खदानों और क्रशरों की वैधता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पर्यावरण स्वीकृति, खनन पट्टा, विस्फोटक लाइसेंस और संचालन संबंधी दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सभी नियमों का पालन किया जा रहा है तो फिर गांवों में इस स्तर का नुकसान कैसे हो रहा है।
रोजगार, सुरक्षा और धूल नियंत्रण भी बड़ा मुद्दा
प्रदर्शनकारियों ने केवल ब्लास्टिंग का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग भी रखी। साथ ही सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने और धूल नियंत्रण के प्रभावी उपाय लागू करने की मांग की गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि खदानों और क्रशरों से उड़ने वाली धूल का असर लोगों के स्वास्थ्य और खेती दोनों पर पड़ रहा है।
25 खदानें, एक लाख लोगों पर असर का दावा
ग्रामीणों के अनुसार मस्तूरी क्षेत्र में 35 से अधिक खदानें और क्रशर संचालित हो रहे हैं। कोसमडीह, मोहतरा, खैरा, भदौरा और आसपास के गांवों के पांच किलोमीटर के दायरे में करीब 25 खदानें और क्रशर मौजूद हैं।
ग्रामीणों का दावा है कि इन गतिविधियों से लगभग एक लाख लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। लगातार ब्लास्टिंग, कंपन और धूल के कारण मकान, खेती और लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है।
2048 तक की लीज, इसलिए स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि कई खदानों की लीज वर्ष 2048 तक स्वीकृत है। ऐसे में यदि अभी स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से केवल अस्थायी कार्रवाई नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और स्थायी समाधान की मांग की है।
पहले भी हुई थी कार्रवाई
स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब दो वर्ष पहले क्षेत्र में संचालित 12 क्रशरों को विभिन्न कारणों से सील किया गया था। इसके बावजूद क्षेत्र में खनन और क्रशर संचालन को लेकर विवाद लगातार सामने आते रहे हैं।
अब कनेरी गांव से शुरू हुआ यह आंदोलन मस्तूरी क्षेत्र के अन्य प्रभावित गांवों तक भी पहुंचता दिखाई दे रहा है, जहां लोग खदानों की ब्लास्टिंग, धूल और कंपन को लेकर लंबे समय से शिकायत करते रहे हैं।

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