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नि कम्मे  नौ कर शाह…14 करोड़ मंजूर… फिर भी जमीन पर शून्य, बृहस्पति बाजार बना प्रशासनिक सुस्ती और अव्यवस्था का सबसे बड़ा प्रतीक

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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सभी फोटो फाइल।


एक साल से “शिफ्टिंग-शिफ्टिंग” खेलता रहा प्रशासन, बाजार वहीं जाम में फंसा रहा… अब मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा
बृहस्पति बाजार को आधुनिक मल्टी लेवल सब्जी बाजार बनाने का दावा करने वाला जिला प्रशासन पिछले एक साल से ज्यादा समय से सिर्फ बैठकों, नोटिसों और घोषणाओं में उलझा दिखाई दे रहा है। करोड़ों की योजना, डीएमएफ से 14 करोड़ की स्वीकृति, नगर निगम की सामान्य सभा में प्रस्ताव पारित होने और बड़े-बड़े दावों के बावजूद जमीनी हकीकत अब भी अव्यवस्था, जाम, गंदगी और प्रशासनिक ढिलाई की कहानी बयां कर रही है।
शहर के सबसे व्यस्त और पारंपरिक बाजारों में शामिल बृहस्पति बाजार आज भी उसी अव्यवस्थित हालात में सांस ले रहा है, जहां ट्रैफिक जाम, सड़कों पर पसरा अतिक्रमण, बदबू और अव्यवस्था आम लोगों की रोज की मजबूरी बनी हुई है। प्रशासनिक मशीनरी लगातार “जल्द शुरू होगा निर्माण” का रटा-रटाया बयान देती रही, लेकिन एक साल बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।
फाइलों में दौड़ता रहा प्रोजेक्ट, सड़क पर फंसा रहा शहर
जिला प्रशासन बिलासपुर और नगर निगम बिलासपुर ने बाजार को आधुनिक स्वरूप देने का खाका तो तैयार कर लिया, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था तय करने में ही महीनों गंवा दिए। यही वजह रही कि बाजार विस्थापन का मामला अब छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय तक पहुंच गया है।
प्रशासन की योजना में शुरुआत से ही समन्वय और तैयारी की कमी दिखाई दी। व्यापारियों के पुनर्वास, अस्थायी बाजार, पार्किंग, सुरक्षा और आधारभूत सुविधाओं को लेकर स्पष्ट रोडमैप नहीं बन पाया। नतीजा यह हुआ कि करोड़ों की परियोजना कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी।
“242 चबूतरे और आधुनिक बाजार” का सपना… लेकिन व्यापारी अब भी असमंजस में
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने दावा किया है कि निर्माण पूरा होने के बाद 242 पक्के चबूतरे, व्यवस्थित पार्किंग और आधुनिक सुविधाओं से लैस बाजार तैयार होगा। प्रशासन के मुताबिक 217 व्यापारियों ने दस्तावेज भी जमा कर दिए हैं।
लेकिन दूसरी तरफ व्यापारी अब भी अस्थायी विस्थापन को लेकर आशंकाओं से घिरे हुए हैं। निर्माण कार्य के दौरान बाजार को शनिचरी मार्ग स्थित गोंड़पारा के मुन्नूलाल शुक्ला स्कूल मैदान में शिफ्ट करने की योजना बनाई गई है। नोटिस जारी होने के बाद व्यापारियों में बेचैनी बढ़ गई है।
व्यापारियों का कहना है कि खुले मैदान में धूल, बारिश, शेड की कमी, सुरक्षा व्यवस्था और ग्राहकों की आवाजाही जैसी बुनियादी समस्याओं पर प्रशासन ने अभी तक स्पष्ट तैयारी नहीं दिखाई है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब एक साल से अधिक समय प्रशासन को मिला, तब भी वैकल्पिक बाजार की मुकम्मल व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी?
जाम से कराहता शहर… और कार्रवाई सिर्फ कागजों में
बृहस्पति बाजार की अव्यवस्था का सबसे बड़ा असर शहर की यातायात व्यवस्था पर पड़ रहा है। मुख्य मार्गों पर घंटों जाम लगना अब आम बात हो चुकी है। बाजार क्षेत्र में पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन हर कुछ महीनों में कार्रवाई और विस्थापन की बात करता है, लेकिन हालात जस के तस बने रहते हैं। सड़कें संकरी होती गईं, बाजार फैलता गया और जिम्मेदार विभाग सिर्फ सर्वे और बैठकों में उलझे रहे।
हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला, प्रशासनिक तैयारी पर खड़े हुए सवाल
बाजार विस्थापन और निर्माण में लगातार हो रही देरी अब प्रशासन की कार्यशैली पर सीधे सवाल खड़े कर रही है। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि योजना को लागू करने में गंभीर स्तर की लापरवाही और असमंजस बना रहा।
एक तरफ शहर को आधुनिक बाजार देने के बड़े दावे किए जा रहे हैं, दूसरी तरफ जमीन पर अब तक न निर्माण शुरू हो पाया और न ही व्यवस्थित वैकल्पिक व्यवस्था पूरी तरह तैयार दिखाई दे रही है।

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