कहीं चाकू से काटा गया कारोबारी, कहीं महिलाओं को पीटा गया… हर केस में एक सवाल- आखिर पुलिस किसे बचा रही है?
बिलासपुर जिले में सामने आए तीन अलग-अलग मामलों ने पुलिस की कार्रवाई पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक तरफ कारोबारी पर जानलेवा हमला हुआ, दूसरी तरफ महिलाओं से मारपीट और जान से मारने की धमकी के आरोप लगे, लेकिन हर मामले में पीड़ित पक्ष पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट नजर आ रहा है।

कहीं आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, कहीं पीड़ित परिवारों का आरोप है कि गंभीर मामलों को हल्का बनाकर पेश किया जा रहा है। तीनों केसों में पीड़ित अब थाने से ऊपर के अफसरों के दरवाजे खटखटा रहे हैं।
केस-1 : “गले पर वार चूका तो पेट में घोंपा चाकू”… कारोबारी खून से लथपथ, आरोपी अब भी फरार
मंगेतर के सामने हमला, 3 इंच गहरा जख्म… फिर भी हत्या के प्रयास में ढील पर सवाल
सिरगिट्टी में कारोबारी और सरस्वती स्टील संचालक पशुपतिनाथ मिश्रा पर हुए जानलेवा हमले ने पुलिस कार्रवाई को कटघरे में ला खड़ा किया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि हमला सुनियोजित था, लेकिन पुलिस अब भी मामले को उसी गंभीरता से नहीं देख रही जिसकी जरूरत थी।
घायल पशुपतिनाथ मिश्रा के मुताबिक घनश्याम धनकर, पीयूष रजक और अन्य युवक हत्या की नीयत से उनके घर पहुंचे थे। दरवाजा खुलते ही गले पर हमला किया गया। वार बचने पर पेट को निशाना बनाया गया और बचाव में पैर आगे आते ही चाकू जांघ में धंस गया।
परिजनों का कहना है कि कुछ सेकंड की देरी जान ले सकती थी। घटना के बाद घर खून से भर गया, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक अधूरी है।
“नस तक कट गई… फिर भी पुलिस की रफ्तार सुस्त”
मेडिकल रिपोर्ट में जांघ पर 3 इंच गहरा घाव बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार धारदार हथियार का वार इतना गंभीर था कि नस तक कट गई। इसके बावजूद पीड़ित परिवार पुलिस पर हत्या के प्रयास की धाराओं में नरमी बरतने का आरोप लगा रहा है।
शुक्रवार को घायल कारोबारी अपनी एडवोकेट बेटी और परिजनों के साथ रामगोपाल गर्ग से मिले। इसके बाद निमितेश सिंह को भी शिकायत देकर सख्त कार्रवाई की मांग की गई।
परिवार का आरोप है कि मुख्य आरोपी सोशल मीडिया के जरिए धमकी दे रहा है, लेकिन पुलिस अब तक उसे पकड़ नहीं सकी। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर इतने गंभीर हमले के बाद भी आरोपी बेखौफ कैसे घूम रहे हैं?
केस-2 : “रात में घर घुसकर पीटा, सुबह फिर धमकाने पहुंचे”… सीपत में महिलाओं से मारपीट पर उबाल
पीड़ित परिवार बोला- “जान से मारने की धमकी मिली, पुलिस ने मामूली केस बना दिया”


सीपत में दर्ज मारपीट के मामले में भी पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 17 मई की रात चतुर राम और उसका बेटा अभिषेक पुराने विवाद को लेकर घर पहुंचे और गाली-गलौज शुरू कर दी।
विरोध करने पर दोनों ने हाथ-मुक्कों से हमला किया। शिकायतकर्ता के मुताबिक उसके गले में चोट आई। बीच-बचाव करने पहुंची पत्नी ज्योति सूर्यवंशी और साली प्रियंका सूर्यवंशी को भी नहीं छोड़ा गया। आरोप है कि महिलाओं के बाल पकड़कर बेरहमी से मारपीट की गई।
इतना ही नहीं, अगले दिन सुबह फिर आरोपी पहुंचे और दोबारा धमकी दी। इस मामले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण मधुलिका सिंह ठाकुर का कहना है कि सभी शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
“धमकी, मारपीट, महिलाओं पर हमला… फिर भी कार्रवाई हल्की?”
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि शिकायत में साफ तौर पर जान से मारने की धमकी और महिलाओं के साथ मारपीट का जिक्र होने के बावजूद पुलिस ने सख्त कार्रवाई नहीं की। परिवार का कहना है कि उन्हें लगातार डराया जा रहा है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रही है।
घटना के गवाहों में रानी वर्मा, बीरू सूर्यवंशी समेत अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं, लेकिन पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस अब तक मामले की गंभीरता के अनुरूप दबाव नहीं बना सकी है।
केस-3 : “लड़की को ले जाओ, नहीं तो मार डालूंगा”… मल्हार में महिला की चीखें और पुलिस पर सवाल
पति पर दूसरी महिला से संबंध का आरोप, विरोध किया तो पत्नी-पिता-भाई तक को पीटा


मल्हार में सामने आए घरेलू हिंसा के मामले ने भी पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया कि उसका पति शंकर मिर्झा दूसरी लड़की से बातचीत करता था। विरोध करने पर वह लगातार गाली-गलौज और मारपीट करता था।
महिला के अनुसार 3 अप्रैल को उसके पिता राम कुमार और भाई यशवंत समझाने पहुंचे थे। इसी दौरान आरोपी भड़क गया और अश्लील गालियां देते हुए मारपीट शुरू कर दी।
महिला का आरोप है कि उसे थप्पड़ और मुक्कों से पीटा गया। बीच-बचाव करने आए भाई यशवंत के साथ भी मारपीट की गई। इसके बाद आरोपी घर से डंडा निकाल लाया और धमकी दी कि “लड़की को यहां से ले जाओ, नहीं तो जान से मार दूंगा।”
पीड़ित महिलाओं का आरोप- “शिकायत दी, लेकिन संवेदनशीलता नहीं दिखी”
मामले में पीड़ित महिलाओं ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि घरेलू हिंसा और जान से मारने की धमकी जैसे आरोपों के बावजूद पुलिस ने अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई।
तीन केस… एक जैसी नाराजगी: “थानों में सुनवाई नहीं, इसलिए अफसरों तक पहुंच रहे लोग”
तीनों मामलों में पीड़ित परिवारों की नाराजगी अब खुलकर सामने आ रही है। कहीं लोग आईजी ऑफिस पहुंच रहे हैं तो कहीं पुलिस पर आरोपियों को बचाने के आरोप लग रहे हैं।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या गंभीर अपराधों में भी पुलिस कार्रवाई अब सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है? वहीं दूसरी ओर पीड़ित परिवार अब थानों से ज्यादा भरोसा वरिष्ठ अधिकारियों पर जताते दिखाई दे रहे हैं।

