गर्मी में पानी ने बढ़ाई बीमारी की दहशत, बिजली कटौती ने लोगों की रातें छीनीं, डॉग बाइट के 7 हजार से ज्यादा केस ने डराया; शहर की आम जनता तीन मोर्चों पर जूझ रही जंग
बिलासपुर। स्मार्ट सिटी बनने के दावों और विकास के बड़े-बड़े वादों के बीच बिलासपुर इन दिनों बुनियादी समस्याओं के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। शहर का एक हिस्सा गंदे और बदबूदार पानी से परेशान है, दूसरा हिस्सा घंटों बिजली कटौती से त्रस्त है, तो वहीं सड़कों और मोहल्लों में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहा है।
भीषण गर्मी के बीच हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग पीने के पानी के लिए टैंकरों और निजी बोर पर निर्भर हैं, रातें अंधेरे और उमस में कट रही हैं और अस्पतालों में रोज डॉग बाइट के मरीजों की कतार लग रही है। शहर की जनता अब पूछ रही है कि आखिर लगातार बढ़ती समस्याओं के बीच जिम्मेदार व्यवस्था कहां है।

6 दिन से गंदे पानी का संकट: पाइपलाइन बंद करनी पड़ी, लोग टैंकरों के भरोसे
सरकंडा क्षेत्र में गंदे पानी की समस्या गुरुवार को भी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी। लगातार शिकायतों के बाद नगर निगम के जल विभाग को नूतन चौक और अशोक नगर की ओर जाने वाली पाइप लाइन अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ी। वहीं मेलापारा-चांटीडीह लाइन की सप्लाई भी रोककर जांच शुरू की गई।
गुरुवार सुबह कई इलाकों में फिर मटमैला और बदबूदार पानी पहुंचा। हालांकि बाद में पानी कुछ हद तक साफ हुआ, लेकिन लोगों का कहना है कि अब भी पानी पूरी तरह स्वच्छ नहीं है। इससे लोगों में बीमारी फैलने का डर बना हुआ है।
सबसे ज्यादा परेशानी नेपाली मोहल्ला, ग्लैमरस ब्यूटी पार्लर गली और अग्रवाल किराना स्टोर इलाके में देखने को मिली। यहां नगर निगम को दो टैंकर लगाकर पानी सप्लाई करनी पड़ी। दिनभर लोग बाल्टी, डिब्बे और बर्तनों के साथ पानी भरने के लिए लाइन में लगे रहे। कई परिवारों ने निजी बोरिंग और खरीदे गए पानी के सहारे दिन बिताया।
जल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मेलापारा लाइन से शुक्रवार को दोबारा पानी छोड़ा जाएगा, जिसके बाद स्थिति का आकलन किया जाएगा। फिलहाल पाइप लाइनों की फ्लशिंग और जांच जारी है।
इधर वार्ड 60 और 62 कपिल नगर सरकंडा में गंदे पानी की शिकायत पर मेयर पूजा विधानी ने जल विभाग के इंजीनियरों के साथ मौके पर निरीक्षण किया। स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले की तुलना में पानी कुछ साफ आया है, लेकिन पूरी तरह भरोसेमंद स्थिति अब भी नहीं

बनी बिजली गुल: गर्मी में तड़पा शहर, ऊपर से भारी भरकम बिल
बिलासपुर में बिजली व्यवस्था भीषण गर्मी के बीच चरमरा गई है। 27 अप्रैल से 21 मई के बीच शहर में कुल 184 घंटे बिजली बंद रहने का आंकड़ा सामने आया है। इसमें 122 घंटे मेंटेनेंस कार्य और 62 घंटे आंधी-तूफान, ट्रांसफार्मर फेल और तकनीकी कारण शामिल बताए गए हैं।

औसतन देखें तो शहर के लोगों ने रोज करीब 7.30 घंटे तक बिजली कटौती झेली। हालांकि उपभोक्ताओं का दावा है कि वास्तविक स्थिति इससे कहीं ज्यादा खराब रही, क्योंकि छोटी-छोटी ट्रिपिंग और फॉल्ट को आधिकारिक आंकड़ों में शामिल ही नहीं किया जाता।
लोगों का कहना है कि 27 अप्रैल से 5 मई के बीच कई इलाकों में रोज 12 से 13 घंटे तक बिजली बंद रही। भीषण गर्मी में लोगों की रातें जागकर गुजरीं। पंखे, कूलर और एसी बंद होने से घर भट्टी जैसे बन गए। पानी की सप्लाई प्रभावित हुई और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खराब होने की शिकायतें भी बढ़ीं।
“बिजली कम मिली, बिल ज्यादा आया”
कटौती के बीच भारी भरकम बिजली बिलों ने लोगों का गुस्सा और बढ़ा दिया है। कई उपभोक्ताओं का आरोप है कि मई महीने में बिल दो से तीन गुना तक बढ़ गए। लोगों का सवाल है कि जब बिजली मिल ही नहीं रही थी तो खपत इतनी ज्यादा कैसे बढ़ गई।
वहीं बिजली विभाग का तर्क है कि गर्मी बढ़ने से एसी, कूलर और पंखों का इस्तेमाल ज्यादा हुआ, जिससे बिजली खपत और बिल दोनों बढ़े हैं।
सकरी बिजली उपसंभाग में 3 दिन में 2 अफसर बदले, प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल
बिजली संकट के बीच सकरी उपसंभाग में प्रशासनिक अस्थिरता भी सामने आई है। महज तीन दिनों में यहां दो बार प्रभारी अधिकारी बदल दिए गए।
नियमित सहायक अभियंता प्रमोद चौबे शिकायतों के बीच मेडिकल लीव पर चले गए। इसके बाद एसटीएम के एई जितेश दिव्य को अतिरिक्त प्रभार दिया गया, लेकिन अधिक कार्यभार का हवाला देकर उन्होंने जिम्मेदारी संभालने में असमर्थता जताई।
इसके बाद 21 मई को नया आदेश जारी कर एई सौरभ विश्वकर्मा को सकरी उपसंभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। लगातार हो रहे बदलावों से विभागीय समन्वय और कामकाज प्रभावित होने की चर्चा तेज है।


अब आवारा कुत्तों का आतंक: रोज 20 से 25 लोग पहुंच रहे अस्पताल
शहर में आवारा कुत्तों का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। सिम्स अस्पताल में रोज 20 से 25 डॉग बाइट के मरीज पहुंच रहे हैं। यानी हर महीने करीब 600 मामले सामने आ रहे हैं। जिला अस्पताल में भी रोज 3 से 4 लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जबकि निजी अस्पतालों में भी एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक साल में सिर्फ सिम्स में ही 7 हजार से ज्यादा डॉग बाइट केस दर्ज किए गए। पिछले तीन महीनों में जानवरों के काटने के 1700 से ज्यादा मामले सामने आए, जिनमें 1625 मामले केवल कुत्तों के हैं।
इसके अलावा बिल्लियों ने 106 लोगों और बंदरों ने 23 लोगों को घायल किया। चूहों के काटने के मामले भी सामने आए हैं।
7300 वैक्सीन डोज लगीं, 1000 और मंगानी पड़ीं
बढ़ते मामलों को देखते हुए सिम्स अस्पताल में पिछले तीन महीनों में 7300 से ज्यादा एंटी रेबीज वैक्सीन डोज लगाई गई हैं। लगातार बढ़ती जरूरत के कारण अस्पताल प्रबंधन को 1000 अतिरिक्त डोज का ऑर्डर देना पड़ा है।
पानी, बिजली और सुरक्षा… तीन मोर्चों पर जूझता शहर
एक तरफ लोग गंदे पानी से बीमारी का खतरा झेल रहे हैं, दूसरी तरफ बिजली संकट से बेहाल हैं और अब आवारा कुत्तों का बढ़ता हमला नई चिंता बन गया है। भीषण गर्मी के बीच बिलासपुर की बड़ी आबादी रोजमर्रा की मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करती नजर आ रही है। शहर के अलग-अलग हिस्सों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं और जनता में नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है।

