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“गर्भवती महिला को रोककर काटा चालान?”… वायरल वीडियो पर ट्रैफिक पुलिस का पलटवार, कहा- ‘न महिला थी, न इलाज का मामला’; भ्रामक कहानी गढ़कर फैलाया गया वीडियो

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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सोशल मीडिया पर फैले दावे को पुलिस ने बताया पूरी तरह झूठा, कहा- हेलमेट चेकिंग के दौरान बनाई गई थी वीडियो; अफवाह फैलाने वालों की जांच की मांग तेज


बिलासपुर। सोशल मीडिया पर वायरल हुए उस वीडियो को लेकर नया मोड़ आ गया है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि ट्रैफिक पुलिस ने गर्भवती महिला को अस्पताल ले जा रहे वाहन को रोककर कार्रवाई की। अब ट्रैफिक पुलिस ने आधिकारिक वीडियो और स्पष्टीकरण जारी कर इन दावों को पूरी तरह भ्रामक, तथ्यहीन और मनगढ़ंत बताया है। पुलिस का कहना है कि जिस बाइक को रोका गया था, उसमें कोई गर्भवती महिला सवार ही नहीं थी और न ही मामला किसी मेडिकल इमरजेंसी या इलाज से जुड़ा था।
पुलिस के मुताबिक 12 मई 2026 को सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण और यातायात सुरक्षा नियमों के पालन के लिए सकरी क्षेत्र में विशेष चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान दो युवक बिना हेलमेट बाइक पर सवार होकर सकरी से मुंगेली की ओर जाते मिले। नियम उल्लंघन पाए जाने पर हेलमेट एक्ट के तहत सामान्य चालानी कार्रवाई की गई।
वीडियो बनाकर वायरल किया, फिर गढ़ दी ‘गर्भवती महिला’ वाली कहानी
ट्रैफिक विभाग का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान एक व्यक्ति ने अनावश्यक रूप से वीडियो रिकॉर्ड किया और बाद में उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने वाले व्यक्ति तक पहुंचा दिया। इसके बाद वीडियो को इस तरह पेश किया गया मानो पुलिस ने गर्भवती महिला को परेशान किया हो।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो में दिखाई जा रही कहानी पूरी तरह काल्पनिक है और इससे जनता को भ्रमित करने की कोशिश की गई। विभाग का मानना है कि इस तरह की भ्रामक सामग्री न केवल पुलिस की छवि खराब करती है, बल्कि भीषण गर्मी और तेज धूप में ड्यूटी कर रहे जवानों का मनोबल भी गिराती है।
“बिना तथ्य जांचे वीडियो वायरल करना खतरनाक”
यातायात विभाग ने साफ कहा है कि सड़क सुरक्षा के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है ताकि दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके और लोगों की जान बचाई जा सके। ऐसे में बिना अधिकृत जानकारी के वीडियो वायरल करना गैर-जिम्मेदाराना कदम है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर किसी भी संवेदनशील मामले को वायरल करने से पहले तथ्यात्मक पुष्टि जरूरी है, क्योंकि झूठे नैरेटिव से कानून व्यवस्था और जनविश्वास दोनों प्रभावित होते हैं।


फिर भी उठे संवेदनशीलता पर सवाल, जांच की मांग
हालांकि मामले में यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि यदि वास्तव में वाहन में कोई गर्भवती महिला या इलाज के लिए ले जाया जा रहा मरीज होता, तो क्या उस स्थिति में चालान किया जाना उचित होता? कई लोगों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में पुलिस को अधिक संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए।
इसी को लेकर मांग उठी है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि मौके पर वास्तविक स्थिति क्या थी। साथ ही यह भी सार्वजनिक किया जाए कि वीडियो किसने बनाया, किसने भ्रामक दावे के साथ वायरल किया और इसके पीछे उद्देश्य क्या था।
पुलिस स्टैंड साफ- ‘तथ्यों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’
ट्रैफिक पुलिस ने अपने आधिकारिक स्टैंड में दो टूक कहा है कि वायरल वीडियो में किए गए दावे झूठे हैं और पूरे घटनाक्रम को गलत तरीके से पेश किया गया। विभाग अब इस बात की भी जांच चाहता है कि आखिर सोशल मीडिया पर इस तरह की भ्रामक जानकारी किसने और क्यों फैलाई।
पुलिस का कहना है कि यातायात नियमों का पालन करवाना जनहित से जुड़ा काम है और ऐसे अभियानों को बदनाम करने की कोशिश करने वालों पर निगरानी रखी जाएगी।

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