पीडब्ल्यूडी सचिव ने अफसरों को दिए “तेजी और गुणवत्ता” के मंत्र, लेकिन बिलासपुर की सड़कों पर हकीकत ने खोली विभागीय दावों की पोल

बिलासपुर ,रायपुर, छत्तीसगढ़।
रायपुर में वातानुकूलित सभागार के भीतर लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल अधिकारियों को “गुणवत्ता”, “तकनीकी दक्षता”, “पारदर्शिता” और “तेजी” का पाठ पढ़ा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ बिलासपुर की सड़कें इन दावों का मजाक उड़ाती नजर आ रही हैं। राजधानी में बैठकों और प्रेजेंटेशन के जरिए विकास का दावा करने वाला विभाग जरा बिलासपुर की सड़कों पर उतरकर देख ले कि जमीन पर उसकी “गुणवत्ता” किस हाल में दम तोड़ रही है।
बैठक में अधिकारियों ने डिजिटल मॉनिटरिंग, जियो-इन्फॉर्मेटिक्स और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल का लंबा-चौड़ा बखान किया, लेकिन सवाल यह है कि अगर तकनीक इतनी मजबूत है तो फिर बिलासपुर की कई नई सड़कें कुछ महीनों में ही क्यों उखड़ रही हैं? आखिर क्यों धूल उड़ाती सड़कों, धंसते डामर और गड्ढों से जनता रोज जूझ रही है?
फाइलों में चमक, सड़कों पर बदहाली
लोक निर्माण विभाग की बैठकों में “गुणवत्ता नियंत्रण” सबसे बड़ा शब्द बन चुका है, लेकिन बिलासपुर में सड़क निर्माण की वास्तविक तस्वीर इसके ठीक उलट दिखाई देती है। कई इलाकों में सड़कें बनते ही टूटने लगती हैं। कहीं डामर बह जाता है, कहीं किनारे धंस जाते हैं, तो कहीं बारिश से पहले ही गड्ढे उभर आते हैं।
जनता पूछ रही है कि आखिर विभाग की मॉनिटरिंग सिर्फ प्रेजेंटेशन तक सीमित है या कभी फील्ड निरीक्षण भी होगा? क्या अफसरों की जिम्मेदारी सिर्फ बैठक लेना और निर्देश जारी करना भर रह गई है?
“तेजी” का मतलब क्या… जल्दी बनाओ और जल्दी टूटने दो?
बैठक में सचिव ने निर्माण कार्यों में तेजी लाने की बात कही। लेकिन बिलासपुर में लोग तंज कस रहे हैं कि यहां तो कई परियोजनाओं में “तेजी” का मतलब गुणवत्ता से समझौता कर जल्दबाजी में काम निपटाना बन चुका है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई निर्माण कार्यों में मानकों का पालन नहीं होता, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस और कागजी खानापूर्ति दिखाई देती है। ठेकेदारों पर सख्ती के दावे भी जमीन पर कमजोर नजर आते हैं।
कचना ओवरब्रिज की चिंता, बिलासपुर की टूटी सड़कें किसके भरोसे?
बैठक में रायपुर के कचना रेलवे ओवरब्रिज की जानकारी ली गई, लेकिन बिलासपुर की उन सड़कों की हालत पर कौन जवाब देगा जहां रोज लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं? शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह सड़कें बदहाल हैं। धूल और गड्ढों से लोग परेशान हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागीय अमला निरीक्षण के बजाय बैठकों में व्यस्त दिखाई देता है।
जनता कह रही— एक दिन बिना प्रोटोकॉल बिलासपुर घूम लीजिए
लोगों का कहना है कि अगर विभागीय सचिव और वरिष्ठ अधिकारी वास्तव में गुणवत्ता देखना चाहते हैं तो उन्हें बिना सूचना, बिना प्रोटोकॉल और बिना विभागीय चमक-दमक के बिलासपुर की सड़कों पर निकलना चाहिए। तब समझ आएगा कि फाइलों में दिखाई जा रही “उत्कृष्ट गुणवत्ता” और जमीन की वास्तविकता में कितना बड़ा अंतर है।

