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अब हर ब्लॉक में डायलिसिस यूनिट: छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को मिशन मोड में विस्तार

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल बोले— दूरस्थ और जनजातीय इलाकों तक गुणवत्तापूर्ण इलाज सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
रायपुर, 30 जनवरी 2026।
छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में बड़ा फोकस हर ब्लॉक स्तर पर डायलिसिस यूनिट की स्थापना पर किया जा रहा है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम को महत्वाकांक्षी बताते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि किडनी रोगियों को इलाज के लिए जिला या बड़े शहरों तक भटकना न पड़े, इसके लिए प्रदेशभर में डायलिसिस सुविधाओं का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है।


नवा रायपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में आयोजित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और सिविल सर्जन की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक के दूसरे दिन मंत्री जायसवाल ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की वर्तमान स्थिति, उपलब्ध संसाधनों और सेवाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बीते दो वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है, लेकिन सरकार की प्राथमिकता अब भी यही है कि दूरस्थ, वनांचल और जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले अंतिम व्यक्ति तक समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण इलाज पहुँचे।
दुर्गम इलाकों में मोबाइल मेडिकल यूनिट से इलाज
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से निरंतर स्वास्थ्य सेवाएँ दी जा रही हैं। इन यूनिटों के जरिए नियमित जांच, उपचार और आवश्यक दवाओं की सुविधा ग्रामीण और जनजातीय अंचलों तक पहुँचाई जा रही है।
जनजातीय क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की मासिक समीक्षा और जमीनी स्तर पर स्थिति की निगरानी पर भी चर्चा हुई।
102, 108 और 1099 से जुड़ी सेवाओं पर फोकस
आपातकालीन सेवाओं को लेकर 102 महतारी एक्सप्रेस, 108 संजीवनी एक्सप्रेस और 1099 से संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। आपात स्थिति में समय पर एंबुलेंस और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने को लेकर फीडबैक और शिकायतों की स्थिति पर भी चर्चा हुई।
5 हजार से ज्यादा आयुष्मान आरोग्य मंदिर होंगे पूरी तरह क्रियाशील
प्रदेश में संचालित 5,000 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर (उप-स्वास्थ्य केंद्र) को पूरी तरह क्रियाशील बनाने को लेकर मानव संसाधन, अधोसंरचना और आवश्यक व्यवस्थाओं की स्थिति पर मंथन हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्तर पर इलाज को मजबूत करने की दिशा में इन केंद्रों की भूमिका पर जोर दिया गया।
डायग्नोस्टिक सेवाओं के विस्तार की तैयारी
राज्य के शासकीय अस्पतालों में डायग्नोस्टिक सेवाओं को सुदृढ़ करने पर विशेष चर्चा हुई। लैब टेक्नीशियन की उपलब्धता, जांच की गुणवत्ता और सटीकता को लेकर स्थिति की समीक्षा की गई।
साथ ही यह भी बताया गया कि नए जांच उपकरणों की खरीदी कर अस्पतालों में जांच सुविधाओं का दायरा बढ़ाया जाएगा। बाहर की दवाएँ लिखने की शिकायतों से जुड़े मामलों पर भी नियमों के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया पर चर्चा हुई।
मानव संसाधन को लेकर समीक्षा
स्वास्थ्य व्यवस्था में मानव संसाधन को अहम मानते हुए नए जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और सिविल सर्जन पदों से संबंधित भर्ती प्रक्रिया पर भी बैठक में चर्चा हुई।
इसके साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक जन औषधि केंद्रों के विस्तार और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता की स्थिति पर भी जानकारी साझा की गई।
शासकीय अस्पतालों की छवि पर जोर
बैठक में यह बात सामने आई कि प्रदेश के शासकीय अस्पताल उपचार की दृष्टि से किसी भी तरह निजी अस्पतालों से कम नहीं हैं। जिला अस्पतालों में बेहतर उपचार सुविधाओं के साथ-साथ उच्च स्तरीय स्वच्छता व्यवस्था और मरीजों के अनुकूल वातावरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
साथ ही सभी जिला अस्पतालों में ब्लड बैंक की उपलब्धता को लेकर भी स्थिति की समीक्षा की गई।

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