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मां के दूध में यूरेनियम…  नवजातों पर कैंसर का साया, वैज्ञानिक स्टडी से देशभर में हड़कंप

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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नई दिल्ली / पटना।
देश को झकझोर देने वाली एक वैज्ञानिक स्टडी ने चिंताओं की नई लकीर खींच दी है। दुनिया की प्रतिष्ठित साइंस जर्नल Nature में प्रकाशित शोध रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बिहार के 6 जिलों में 40 स्तनपान कराने वाली महिलाओं के दूध में यूरेनियम (U-238) की खतरनाक मात्रा मिली है। यह वही तत्व है जिसका उपयोग न्यूक्लियर रिएक्टर, हथियार और रेडियोएक्टिव रिसर्च में होता है।
रिपोर्ट के सामने आने के बाद चिकित्सा, पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों में गहरी चिंता पाई जा रही है, क्योंकि यह मामला सिर्फ प्रदूषण का नहीं — नवजात पीढ़ी के डीएनए तक खतरे की घंटी है।
प्रभावित जिले
जिलास्थितिखगड़ियासबसे उच्च यूरेनियम स्तरकटिहारगंभीर स्तरबेगूसरायउच्च जोखिमभोजपुरसंदिग्ध स्रोतसमस्तीपुरगंभीर संकेतनालंदाउच्च निगरानी क्षेत्र
शोध की मुख्य बातें
महावीर कैंसर संस्थान, एम्स दिल्ली और अन्य संस्थानों की संयुक्त रिसर्च
परीक्षण किए गए सभी सैंपलों में रेडियोधर्मी तत्व मौजूद
70% नवजातों में Non-Carcinogenic Health Risk का अंदेशा
U-238 की मात्रा WHO और ICRP के मानकों से कई गुना अधिक
अध्ययन में क्या मिला?
शोधकर्ताओं के अनुसार, कई नमूनों में यूरेनियम की मात्रा उस स्तर से ऊपर मिली जो कैंसर, DNA mutation, हड्डियों की बढ़त, न्यूरो डैमेज और किडनी फेलियर की स्थिति पैदा कर सकती है।
एक शोधकर्ता के हवाले से यह वाक्य सामने आया —
“यह मामला सिर्फ स्वास्थ्य नहीं — पर्यावरणिक आपदा की चेतावनी है।”
कैसे पहुंचा यूरेनियम मां के दूध तक?
संभावित कारणों पर जांच के प्रमुख एंगल:
भूजल में रेडियोधर्मी तत्वों की मात्रा
पुराने भूगर्भीय संरचनाओं में यूरेनियम मौजूदगी
बोरवेल आधारित पीने के पानी का इस्तेमाल
आसपास खनन, औद्योगिक कचरा या सैन्य गतिविधियों के संभावित संकेत
नदी तलछट में यूरेनियम की मौजूदगी
फील्ड रिपोर्ट: पानी भी खतरे में
स्थानीय स्तर पर पानी के कई नमूनों में भी रेडियोएक्टिव तत्वों की पुष्टि हुई है, जो बताता है कि समस्या अस्थाई नहीं — स्रोत स्तर पर स्थायी प्रदूषण मौजूद हो सकता है।
शिशुओं पर खतरे के संकेत
संभावित स्वास्थ्य प्रभाव:
रक्त कैंसर और बोन कैंसर का बढ़ा जोखिम
मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा
प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर
जन्मजात विकारों की आशंका
भविष्य में फर्टिलिटी पर प्रभाव
बिहार से देशव्यापी बहस की शुरुआत
यह खुलासा ऐसे समय आया है जब देश में:
ग्राउंडवॉटर क्राइसिस
भूजल प्रदूषण
अनियंत्रित बोरवेल उपयोग
औद्योगिक रेडियोधर्मी कचरे की निगरानी
जैसे विषय पहले से विवाद और चिंता के दायरे में हैं।
1: अंतरराष्ट्रीय तुलना
देशस्थितिभारत (बिहार)यूरेनियम मिला — मानव दूध में उच्च स्तरकनाडाकुछ क्षेत्रों में भूजल पर अलर्टपाकिस्तानबलूचिस्तान में भूजल संदूषण दर्जUSAन्यू मैक्सिको में नवाज़ो जनजाति प्रभावित
2: वैज्ञानिक चेतावनी
“रेडियोधर्मी तत्वों का प्रभाव पीढ़ियों तक चलता है — यह सिर्फ 40 केस नहीं, भविष्य की आबादी पर जैविक हमला जैसा मामला है।”
— शोध से जुड़ा वैज्ञानिक (नाम गोपनीय)
अगला सवाल — अब क्या?
रिसर्च टीम ने सुझावों की सूची भेजी है, लेकिन अब फैसलों की घड़ी सरकार, स्वास्थ्य एजेंसियों और पर्यावरण विभाग के सामने है।
यह मामला सिर्फ बिहार का नहीं — भारत के वॉटर और हेल्थ सिक्योरिटी मॉडल पर बड़ा सवालचिह्न है।

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