बिलासपुर।
बिलासपुर के Lingyadih वार्ड में प्रस्तावित गार्डन निर्माण योजना ने हालात को विस्फोटक मोड़ पर खड़ा कर दिया है। नगर निगम की कार्रवाई से 113 परिवारों पर बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है, और विरोध अब इतना तीखा हो चुका है कि कई लोग खुलेआम कह रहे हैं—
“घर टूटेगा तो हम जिंदा नहीं बचेंगे… मांगे नहीं, हक चाहिए — चाहे इसके लिए जहर क्यों न पीना पड़े।”
Lingyadih में यह संघर्ष अब सिर्फ भूमि विवाद नहीं — अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है।
चौक बना संघर्ष स्थल, महिलाओं का मोर्चा — बच्चे गवाह बनकर बैठे


नगर निगम की कार्रवाई के विरोध में महिलाएं चौक पर बैठ गईं। विरोध स्थल पर बैनर, तख्तियां, रोष और भय — माहौल साफ बता रहा है कि प्रशासन का फैसला लोगों की नसों तक पहुंच चुका है।
धरने पर मौजूद बच्चे स्कूल बैग और किताबें गोद में रखे बैठे थे। दृश्य सवाल बनकर सामने था —
“पढ़ाई, भविष्य, सुरक्षा — सब कुछ तबाह कर नगर निगम किसका गार्डन उगाना चाहता है?”
पार्षद भी दबाव में, लेकिन जनता के साथ — निगम पर गंभीर आरोप
वार्ड के कांग्रेस पार्षद दिलीप पाटिल खुद इस स्थिति में आक्रोशित हैं। उनकी छवि सादगी और सार्वजनिक सेवा वाली मानी जाती है, लेकिन इस बार लहजा तल्ख है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निगम का उद्देश्य विकास नहीं, बल्कि कमजोर तबके को हटाने की नीति है।
लोगों के सवाल तेज हो रहे हैं —
“क्या छत्तीसगढ़ में विकास का पहला चरण गरीबों की छत तोड़कर ही शुरू होता है?”
कांग्रेस नेताओं की कलेक्टर से चर्चा भी बेअसर — आश्वासन से लोगों में और गुस्सा
कुछ दिन पहले कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव और कांग्रेस नेताओं ने इस मसले पर कलेक्टर से चर्चा की थी। बड़ी उम्मीदों के बावजूद परिणाम सिर्फ—
✔️ आश्वासन
❌ कोई निर्णय नहीं
❌ कोई रोक नहीं
अब स्थिति यह है कि Lingyadih में विरोध केवल प्रशासन के खिलाफ नहीं, बल्कि भाजपा सरकार के खिलाफ राजनीतिक स्वरूप ले चुका है।
नाला निर्माण या विस्थापन की राह?
निगम वर्तमान में क्षेत्र में नाला निर्माण कार्य कर रहा है। निवासियों का आरोप है कि यह सिर्फ बहाना है — इसके बाद घरों पर बुलडोज़र चलाया जाएगा, और फिर क्षेत्र “ग्रीन ज़ोन” घोषित कर दिया जाएगा।
लोगों में यह डर लगातार बढ़ रहा है कि उनका नाम, पता और घर जल्द ही फाइलों में मिटा दिया जाएगा।
सवाल भारी है — विकास या विस्थापन? अधिकार या आदेश?
Lingyadih में एक बात अब साफ सुनाई दे रही है—
“हम हटेंगे नहीं… चाहे आंदोलन सड़कों से विधानसभा के दरवाजे तक क्यों न पहुंच जाए।”
स्थिति लगातार गर्म हो रही है, और संकेत साफ हैं —
अगर निर्णय नहीं बदला, तो Lingyadih प्रदेश-व्यापी विरोध का केंद्र बन सकता है।



