Mohammed israil

बिलासपुर, रायपुर।
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में मासूमियत पर ऐसा कहर ढाया गया कि पूरे देश की रूह कांप गई। शिक्षा देने के नाम पर स्कूल में जो हुआ, उसने सभ्यता और इंसानियत दोनों पर सवाल खड़े कर दिए। महज़ 4 साल के LKG छात्र को होमवर्क नहीं करने की वजह पर कपड़े उतरवाकर रस्सी से बांधा गया और पेड़ पर लटका दिया गया। घटना का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया में वायरल हुआ, भारत भर में आक्रोश की हवा फैल गई और स्कूल में शिक्षा नहीं, क्रूरता की यह तस्वीर जांच के कटघरे में जा पहुंची।
घटना: स्कूल बना सज़ा घर
सूरजपुर जिले के नारायणपुर गांव स्थित हंस वाहिनी विद्या मंदिर में LKG का एक बच्चा रोज स्कूल खेलने जाता था, सीखने जाता था—but उस दिन उसे ऐसी सज़ा मिली जिसने हर पैरेंट, हर नागरिक, हर शिक्षक की सोच को झकझोर दिया।
वीडियो में साफ दिखा—बच्चे के कपड़े उतरवाए गए, उसकी शर्ट से रस्सी बांधकर स्कूल परिसर में मौजूद पेड़ पर उसे झुलाया गया। वो डर से चीखता रहा, लेकिन दो महिला शिक्षिकाएं — काजल साहू और अनुराधा देवांगन — उसे सबक सिखाने पर अड़ी रहीं।
वीडियो वायरल… सिस्टम में हलचल
पास की छत से यह दृश्य जब मोबाइल कैमरे में कैद हुआ और सोशल मीडिया पर पहुंचा, तभी प्रशासन में हड़कंप मचा। लोगों में सवाल उभरे —
ये शिक्षा है या प्रताड़ना?
चार साल के बच्चे को ऐसी सज़ा देने का अधिकार किसने दिया?
अगर बच्चा गिर जाता या रस्सी टूट जाती तो?
स्कूल प्रबंधन और विभाग की खामोशी टूटी
वीडियो सामने आने के बाद शिक्षकों की गलती पर स्कूल प्रबंधन ने मानो मजबूरी में सिर झुका दिया। संचालिका ने गलती स्वीकार की, सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगी और आरोपी शिक्षिकाओं ने इसे ‘पहली बार की गलती’ बताया — मगर सवाल वहीं का वहीं है।
जांच शुरू — कार्रवाई की आहट
जिला शिक्षा विभाग ने जांच अधिकारी संकुल प्रभारी मनोज यादव को मौके पर भेजा। जांच रिपोर्ट जमा कर दी गई है और इस घटना पर उच्च अधिकारी कार्रवाई की तैयारी में हैं।
खड़े सवाल — देश पूछ रहा है
अगर वीडियो सामने नहीं आता तो क्या यह क्रूरता शिक्षा के नाम पर जारी रहती?
स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा कितनी सुरक्षित है?
क्या मासूम बच्चों की कक्षा अब डर का कारागार बनती जा रही है?
सोशल मीडिया पर देश भर में नाराज़गी
घटना के उजागर होते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर देशभर में प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई—
अभिभावक स्तब्ध
शिक्षक समुदाय शर्मिंदा
लोग आक्रोशित
और सिस्टम सवालों के घेरे में



