मोहम्मद इसराइल बबलू
बिलासपुर,रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में तैनात एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पर यौन शोषण, मानसिक उत्पीड़न और धमकी जैसे गंभीर आरोपों ने पुलिस महकमे में भूचाल ला दिया है। एक सब-इंस्पेक्टर की पत्नी ने शिकायत में दावा किया है कि आईपीएस अफसर पिछले 7 सालों से उसका शारीरिक और मानसिक शोषण करते आ रहे हैं। वहीं आरोपी अधिकारी ने इन आरोपों को ब्लैकमेलिंग की साजिश बताया है। दोनों के बीच चल रहे इस विवाद ने अब पूरे पुलिस तंत्र को हिला दिया है।
महिला का आरोप — “सात साल से उत्पीड़न, न आने पर धमकियां”

बिलासपुर में पदस्थ सब-इंस्पेक्टर की पत्नी ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को लिखे शिकायत पत्र में बताया कि साल 2017 में कोरबा में हुई पहली मुलाकात के बाद आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी ने सोशल मीडिया पर संपर्क बढ़ाया। महिला ने आरोप लगाया कि शुरू में बातचीत योग सिखाने के बहाने से शुरू हुई, लेकिन बाद में यह संबंध जबरन शारीरिक और मानसिक शोषण में बदल गया।
शिकायत के मुताबिक, आईपीएस अधिकारी ने उसे सात वर्षों तक संबंध बनाए रखने के लिए मजबूर किया। जब उसने दूर होने की कोशिश की, तो उसे और उसके पति को तबादले की धमकी दी गई। महिला का कहना है कि डांगी अपनी पत्नी की गैरमौजूदगी में उसे सरकारी बंगले पर बुलाते थे और न आने पर दबाव बनाते थे।
महिला का आरोप है कि अधिकारी ने उसके पति की नौकरी और पदस्थापना को हथियार बनाकर उसे अपनी शर्तों पर जीने को विवश कर दिया।
“वीडियो कॉल से निगरानी, सुबह 5 से रात 10 तक नजर”
शिकायत में महिला ने लिखा है कि डांगी रोजाना सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक वीडियो कॉल पर नजर रखने का दबाव डालते थे। जब महिला ने विरोध किया, तो उसे धमकियां दी गईं कि उसके पति को नक्सल क्षेत्र में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
महिला ने दावा किया है कि उसके पास कई डिजिटल और वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं, जो उसकी बात को साबित करते हैं। 15 अक्टूबर को उसने औपचारिक रूप से पुलिस मुख्यालय पहुंचकर DGP अरुणदेव गौतम को लिखित शिकायत सौंपी।
डांगी का पलटवार — “यह ब्लैकमेलिंग है, मुझे फंसाया जा रहा”
दूसरी ओर, आईपीएस रतनलाल डांगी ने सभी आरोपों को नकारते हुए खुद DGP को एक विस्तृत शिकायत सौंपी है। डांगी का कहना है कि महिला उन्हें लंबे समय से ब्लैकमेल कर रही है और झूठे आरोपों के जरिए उनकी छवि धूमिल कर रही है।
अपने पत्र में डांगी ने महिला के कथित “मानसिक दबाव और ब्लैकमेलिंग” के कई घटनाक्रमों का जिक्र किया —
– महिला एक बार जहर की शीशी लेकर उनके दफ्तर पहुंची और उनसे कहा कि वे अपनी पत्नी से कोई संबंध न रखें।
– उसने शर्त रखी कि अधिकारी अपनी पत्नी से बात नहीं करेंगे, फोटो नहीं खिंचवाएंगे, जन्मदिन और सालगिरह नहीं मनाएंगे।
– हर रात बालकनी में सोने और 8 घंटे तक लाइव लोकेशन चालू रखने का दबाव डाला गया।
– स्नान, व्यायाम और वाशरूम तक वीडियो कॉल चालू रखने की मांग की गई।
– महिला ने वाशरूम में उनकी तस्वीरें खींचीं और वायरल करने की धमकी दी।
– एक बार विरोध करने पर उसने ब्लेड से खुद का हाथ काट लिया और आत्महत्या का नाटक किया।
– उसने उनकी पत्नी और बेटों से संबंध तोड़वाने की कोशिश की, यहां तक कि करवा चौथ के दिन पूजा में शामिल न होने की धमकी दी।
– कई बार जहर की शीशी लेकर दफ्तर पहुंची और कहा कि “अगर बात नहीं मानी तो यहीं मर जाऊंगी और तुम्हें फंसा दूंगी।”
पुलिस मुख्यालय ने जांच सौंपी, महिला अफसर भी टीम में शामिल
DGP के निर्देश पर मामले की जांच आईजी रैंक के अधिकारी को सौंपी गई है। जांच टीम में महिला अफसरों को भी शामिल किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, जांच की शुरुआत महिला के बयान और उसके द्वारा प्रस्तुत डिजिटल साक्ष्यों से होगी। इसके बाद आईपीएस रतनलाल डांगी का बयान रिकॉर्ड किया जाएगा।
कौन हैं रतनलाल डांगी
रतनलाल डांगी 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वे बीजापुर, कांकेर, कोरबा और बिलासपुर में एसपी रह चुके हैं। सरगुजा, दुर्ग और बिलासपुर रेंज में आईजी पद पर भी कार्य कर चुके हैं। फिलहाल वे चंद्रखुरी स्थित पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में निदेशक के रूप में पदस्थ हैं।
दोनों पक्षों के आरोपों के बीच सुलगता सवाल
एक ओर सब-इंस्पेक्टर की पत्नी का आरोप है कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने वर्दी की आड़ में सात साल तक उसका शोषण किया, जबकि दूसरी ओर खुद अधिकारी का दावा है कि वही महिला वर्षों से उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही है और अब ब्लैकमेलिंग की हद तक पहुंच चुकी है।
फिलहाल दोनों पक्षों के आरोपों की जांच पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जारी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने छत्तीसगढ़ पुलिस प्रशासन के भीतर की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।



