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छठ महापर्व की तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार: तोरवा छठ घाट बनेगा आस्था का केंद्र, 60 हजार श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना — कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह ने ली तैयारी की कमान

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मो इसराइल बबलू

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बिलासपुर दीपावली के समापन के साथ ही अब बिलासपुर में आस्था और उत्साह का सबसे बड़ा पर्व — छठ महापर्व — पूरी तैयारी के साथ दस्तक दे रहा है। बिलासपुर का ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध तोरवा छठ घाट, जो पिछले 25 वर्षों से श्रद्धा का केंद्र रहा है, एक बार फिर हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ से गूंजने जा रहा है। प्रशासनिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर तैयारी तेज हो गई है। कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह के नेतृत्व में हुई अहम बैठक में सुरक्षा, स्वच्छता, पार्किंग और प्रकाश व्यवस्था सहित सभी बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।तोरवा घाट: आस्था का केंद्र, विश्व का सबसे बड़ा स्थायी छठ घाटप्रशासन की तैयारियाँ चरम परपार्किंग और यातायात व्यवस्था सुदृढ़स्थायी प्रकाश व्यवस्था और जलकुंड निर्माण की योजनासुरक्षा व्यवस्था अभेद होगीप्रशासन और समिति में समन्वयछठ महापर्व का विस्तृत कार्यक्रमबैठक में शामिल अधिकारी और पदाधिकारीछठ घाट पर भव्य आयोजन की तैयारी पूरी

बिलासपुर दीपावली के समापन के साथ ही अब बिलासपुर में आस्था और उत्साह का सबसे बड़ा पर्व — छठ महापर्व — पूरी तैयारी के साथ दस्तक दे रहा है। बिलासपुर का ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध तोरवा छठ घाट, जो पिछले 25 वर्षों से श्रद्धा का केंद्र रहा है, एक बार फिर हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ से गूंजने जा रहा है। प्रशासनिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर तैयारी तेज हो गई है। कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह के नेतृत्व में हुई अहम बैठक में सुरक्षा, स्वच्छता, पार्किंग और प्रकाश व्यवस्था सहित सभी बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।


तोरवा घाट: आस्था का केंद्र, विश्व का सबसे बड़ा स्थायी छठ घाट

पाटलिपुत्र संस्कृति विकास मंच, भोजपुरी समाज और सहजानंद समाज के संयुक्त तत्वावधान में पिछले 25 वर्षों से आयोजित हो रहा तोरवा छठ महापर्व अब केवल बिलासपुर ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की पहचान बन चुका है। समिति का दावा है कि यह विश्व का सबसे बड़ा स्थायी छठ घाट है। लगभग एक किलोमीटर लंबे घाट पर इस वर्ष 27 और 28 अक्टूबर को व्रती श्रद्धालु सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करेंगे।


प्रशासन की तैयारियाँ चरम पर

इस वर्ष भी तोरवा घाट पर 50 से 60 हजार श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। इस विशाल आयोजन की तैयारियों को लेकर प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। बुधवार को कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह की अध्यक्षता में छठ पूजा समिति और विभिन्न विभागों के अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में सुरक्षा, स्वच्छता, पार्किंग, बिजली, जल व्यवस्था और मार्ग सुधार जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

कलेक्टर अग्रवाल ने कहा —

“बिलासपुर का छठ पर्व अब शहर की पहचान बन चुका है। प्रशासन हर वर्ष की तरह इस बार भी पूरे समर्पण से आयोजन को सफल बनाने के लिए तत्पर है।”

उन्होंने अधिकारियों के साथ तोरवा घाट का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और सभी विभागों को निर्धारित समय सीमा में तैयारी पूर्ण करने के निर्देश दिए।


पार्किंग और यातायात व्यवस्था सुदृढ़

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने बिलासा उपवन में दो और चार पहिया वाहनों के लिए अलग-अलग पार्किंग क्षेत्र निर्धारित किए हैं। प्रवेश और निकास मार्ग अलग-अलग रखे जा रहे हैं ताकि जाम की स्थिति न बने। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी मुख्य और उपमार्गों की मरम्मत एवं डामरीकरण शीघ्र पूर्ण हो और रात में पर्याप्त रोशनी सुनिश्चित की जाए।

नगर निगम आयुक्त अमित कुमार ने बताया कि घाट की सफाई लगभग पूरी हो चुकी है और बिजली विभाग की मदद से प्रकाश व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके अलावा गुरुनानक चौक से छठ घाट तक का मार्ग डामरीकरण किया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं को सुगमता रहे।


स्थायी प्रकाश व्यवस्था और जलकुंड निर्माण की योजना

बैठक में छठ पूजा समिति ने घाट पर हर वर्ष अस्थायी रूप से लगाई जाने वाली लाइटों को स्थायी प्रकाश व्यवस्था में बदलने की मांग रखी। इस पर कलेक्टर और निगम आयुक्त ने सहमति जताई और शीघ्र कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

साथ ही, देवी प्रतिमाओं के विसर्जन से नदी की स्वच्छता पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए प्रशासन ने घाट के अंतिम छोर, उदासीन आश्रम के पीछे एक विशेष रैंप और स्थायी जलकुंड निर्माण योजना पर भी सहमति दी, ताकि भविष्य में प्रतिमाओं का विसर्जन वहीं किया जा सके और अरपा नदी की सफाई बनी रहे।


सुरक्षा व्यवस्था अभेद होगी

एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि छठ महापर्व के दौरान सुरक्षा में कोई समझौता नहीं होगा। पूरे क्षेत्र में 300 से अधिक पुलिस जवानों की तैनाती की जाएगी जो घाट, सड़कों और पार्किंग स्थलों पर निगरानी रखेंगे।

पूरे घाट क्षेत्र को सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन कैमरों से कवर किया जाएगा। एक पुलिस कंट्रोल रूम भी घाट परिसर में स्थापित होगा। आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ टीम और स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीमें मौके पर मौजूद रहेंगी ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।


प्रशासन और समिति में समन्वय

बैठक में जिला प्रशासन और छठ पूजा समिति के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी। समिति ने कुछ स्थायी सुविधाओं की मांग रखी जिन पर प्रशासन ने उदार रुख दिखाया।

कलेक्टर अग्रवाल ने कहा —

“तोरवा छठ घाट न केवल धार्मिक स्थल है बल्कि यह एक सुंदर पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित हो सकता है। यहां वर्षभर सांस्कृतिक एवं सामाजिक आयोजन होने चाहिए ताकि इस स्थान का सदुपयोग हो सके।”


छठ महापर्व का विस्तृत कार्यक्रम

छठ पूजा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष का पर्व 25 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक आयोजित होगा —
🔹 25 अक्टूबर: नहाय-खाय से शुभारंभ एवं संध्या में अरपा मैया की महाआरती।
🔹 26 अक्टूबर: खरना का प्रसाद तैयार किया जाएगा।
🔹 27 अक्टूबर: संध्या अर्घ्य (सूर्यास्त के समय अर्घ्यदान)।
🔹 28 अक्टूबर: प्रातः अर्घ्य (सूर्योदय के समय अर्घ्यदान)।


बैठक में शामिल अधिकारी और पदाधिकारी

बैठक में कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह, डिप्टी कलेक्टर शिव बनर्जी, नगर निगम आयुक्त अमित कुमार, एसडीएम मनीष साहू, एडिशनल एसपी राजेंद्र जयसवाल, सीएमएचओ डॉ. शोभा गढ़ेवाल सहित पुलिस विभाग, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, जल संसाधन विभाग, सीएसईबी, खनिज विभाग, होमगार्ड और अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

समिति की ओर से प्रवीण झा, डॉ. धर्मेंद्र कुमार दास, अभय नारायण राय, सुधीर झा, बी.एन. ओझा, राम प्रताप सिंह, रौशन सिंह, विजय ओझा, दिलीप चौधरी, धनंजय झा, पंकज सिंह, कुमुद रंजन सिंह, अमरेंद्र कंठ, पीसी झा, चंद्र किशोर प्रसाद, हरिशंकर कुशवाहा, सतीश सिंह, धीरज झा, प्रभात चौधरी, प्रशांत सिंह, रामसखा चौधरी, रविंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, शैलेंद्र सिंह, रुपेश कुशवाह सहित पाटलिपुत्र संस्कृति विकास मंच, भोजपुरी समाज और सहजानंद समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे।


छठ घाट पर भव्य आयोजन की तैयारी पूरी

तोरवा छठ घाट इस वर्ष फिर श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का केंद्र बनने जा रहा है। जिला प्रशासन और छठ पूजा समिति के संयुक्त प्रयासों से इस वर्ष का आयोजन न केवल भव्य और शांतिपूर्ण होगा बल्कि भविष्य में भी आदर्श उदाहरण के रूप में देखा जाएगा।

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