मो इसराइल बबलू
भाजपा में बवाल — थाना प्रभारी पर कार्रवाई की मांग, पुलिस प्रशासन जांच में जुटा
बिलासपुर/सीपत | न्यूज डॉन छत्तीसगढ़ विशेष रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर ज़िले के सीपत थाना गहरे विवाद में घिर गया है। कारण — थाने परिसर स्थित सार्वजनिक शौचालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का पोस्टर दरवाजे के रूप में इस्तेमाल किया जाना।
यह पोस्टर “सुशासन पखवाड़ा” के तहत लगाया गया था, लेकिन थाने के शौचालय का दरवाजा टूटने के बाद पुलिसकर्मियों ने इसे अस्थायी तौर पर दरवाजे के रूप में टांग दिया। जैसे ही यह दृश्य भाजपा कार्यकर्ताओं की नज़र में आया, थाने में हड़कंप मच गया और मामला सियासी रंग ले बैठा।
थाने में भाजपा का घेराव — कार्यकर्ताओं ने लगाया गंभीर आरोप








घटना की जानकारी मिलते ही भाजपा जिला ग्रामीण उपाध्यक्ष राज्यवर्धन कौशिक, मंडल अध्यक्ष दीपक शर्मा, उपाध्यक्ष अभिलेष यादव, वरिष्ठ नेता मन्नू ठाकुर, मदनलाल पाटनवार, बसंत साहू, भाजयुमो अध्यक्ष तुषार चंद्राकर समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता थाने पहुंच गए।
थाने में पूछताछ के दौरान जब कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो कार्यकर्ताओं ने थाना प्रभारी गोपाल सतपथी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि थाना प्रभारी के संरक्षण में क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार और आपराधिक गतिविधियाँ फल-फूल रही हैं। इतना ही नहीं, कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि थाना परिसर में ही बंद कमरों में बाहरी लोगों को बुलाकर शराबखोरी की जा रही है।
डीएसपी पहुँचे मौके पर — कार्यकर्ताओं ने की एफआईआर की मांग
मामले की सूचना मिलते ही डीएसपी निमितेश सिंह थाने पहुंचे और भाजपा नेताओं से चर्चा की। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के पोस्टर को शौचालय में लगाने वाले जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने और सस्पेंशन की कार्रवाई की मांग की।
डीएसपी ने स्थिति को संभालते हुए मामले की जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। तब जाकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपना प्रदर्शन समाप्त किया।
भाजपा की कड़ी प्रतिक्रिया — “थाना प्रभारी हटे बिना शांत नहीं बैठेंगे”
भाजपा नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक थाना प्रभारी को हटाकर जिम्मेदारों पर कार्यवाही नहीं की जाती, तब तक पार्टी शांत नहीं बैठेगी।
भाजपा मंडल अध्यक्ष दीपक शर्मा ने बताया कि थाने के लोकार्पण के समय लगाया गया शिलालेख भी अब हटा दिया गया है, जिसे लेकर पहले भी आपत्ति दर्ज कराई गई थी, लेकिन उच्च अधिकारियों ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की।
पुलिस प्रशासन जांच में — शासन की छवि पर सवाल
डीएसपी निमितेश सिंह ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रारंभ कर दी गई है। दोषी पाए जाने पर संबंधितों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि यह घटना प्रशासनिक सतर्कता पर सवाल खड़े करती है — जहां “सुशासन” का प्रतीकात्मक बैनर ही शौचालय का गेट बन गया, वहीं शासन की छवि को गहरा धक्का पहुंचा है।
घटना के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा — भाजपा कार्यकर्ता लामबंद
मौके पर मौजूद प्रमुख भाजपा कार्यकर्ताओं में —
उर्विजेश कौशिक, नारायण साहू, अनिल साहू, ललित यादव, वैभव तंबोली, विशाल तंबोली, पुष्पेंद्र दास, रिंकू शर्मा, विक्रम राजपूत, जयशंकर साहू, मनीष जायसवाल, दिनेश विजय, परमेश्वर साहू, परमेश्वर रजक, प्रमोद शर्मा, कुलदीप यादव, शुभम यादव, सोनू रजक, जीतू यादव, गौतम राजपूत, दीपक वैष्णव, एजाज खान, नवल कश्यप, अनिल रजक सहित कई अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
मेरी भी सुनिए…
प्रतीक की मर्यादा और जिम्मेदारी का सवाल
“जब किसी शासन या नेता की तस्वीर जनसुविधा के प्रतीक के रूप में लगाई जाती है, तो उसकी मर्यादा का ध्यान रखना उतना ही आवश्यक होता है। यह घटना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सुशासन की भावना पर भी एक सवाल है — क्या मर्यादा और प्रबंधन दोनों एक साथ संभव हैं?”
Mohammed israil



