मो इसराइल बबलू
बिलासपुर/बीजापुर |
त्योहार की खुशियां मातम में बदलीं
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में दीपावली के दूसरे ही दिन एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। ग्राम पंचायत पदेडा के हिरोलीपारा में तीन स्कूली बच्चों की तालाब में डूबने से मौत हो गई। रविवार तक घरों में दीपों की रौशनी थी, सोमवार को वही घर सिसकियों से भर गए।
नहाने गए थे तालाब, फिर नहीं लौटे घर
मिली जानकारी के मुताबिक, तीनों बच्चे दोपहर में नहाने के लिए गांव के पास बने तालाब में गए थे। कुछ ही देर में हादसा हो गया। जब वे देर तक घर नहीं लौटे तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। ग्रामीणों ने तालाब में उतरकर तलाश की तो तीनों के शव पानी में तैरते मिले।
घटना की सूचना स्थानीय पटवारी को दी गई। प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंचने की तैयारी में है। देर शाम तक बच्चों की पहचान नहीं हो सकी थी।
गांव में मातम का माहौल
हिरोलीपारा गांव में दीपावली की रौनक अब मातम में बदल गई है। हर घर से विलाप की आवाजें सुनाई दे रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब गहरा है और किनारे पर कोई सुरक्षा घेरा या चेतावनी पट्ट नहीं है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि गांव के सभी जलस्रोतों के आसपास सुरक्षा दीवार और संकेतक बोर्ड लगाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।
बार-बार दोहराती त्रासदी — फिर भी लापरवाही बरकरार
राज्य में यह कोई पहली घटना नहीं है। कुछ हफ्ते पहले कोरबा में तीन पुलिसकर्मियों के बच्चे और धमतरी में एक चार वर्षीय बालक तालाब में डूबकर अपनी जान गंवा चुके हैं।
हर बार सवाल उठते हैं, जांच होती है, लेकिन न तो चेतावनी बोर्ड लगते हैं, न सुरक्षा के इंतजाम।
जल विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में जलस्रोतों की सुरक्षा को लेकर जनजागरूकता अभियान शुरू करना जरूरी है। स्कूलों में “वाटर सेफ्टी एजुकेशन” शामिल की जानी चाहिए और पंचायतों को तालाबों की निगरानी की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
“तीन दीप बुझ गए — गांव का उजाला चला गया”
स्थानीय निवासी एक स्वर में कहते हैं — “त्योहार के बाद ऐसी मौतें दिल तोड़ देती हैं। अगर समय पर चेतावनी या सुरक्षा होती तो शायद तीनों बच्चे आज ज़िंदा होते।”
इस हादसे ने एक बार फिर याद दिला दिया कि विकास योजनाओं के बीच सुरक्षा और संवेदनशीलता को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता।



