मो इसराइल बबलू
बिलासपुर।रोशनी और खुशियों के पर्व दीपावली की रात बिलासपुर शहर दो हिंसक वारदातों से दहल उठा। कोनी और सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में एक ही रात अपराधियों ने सरेआम चाकू से हमला कर दो लोगों को घायल कर दिया — पहला मामला पैसों के विवाद से उपजा तो दूसरा महज़ राह चलते मजदूरों पर नकाबपोश हमलावरों का। दोनों घटनाओं ने सवाल खड़ा किया है कि आखिर त्योहारी रात्रि में पुलिस की गश्त और कानून-व्यवस्था कहाँ सोई हुई थी?
1 : पैसों के लेन-देन में खून तक पहुंचा विवाद
कोनी थाना क्षेत्र के बड़े कोनी स्थित साईं मंदिर इलाके में रहने वाले सुरेश यादव ने अपने भाई मुकेश यादव पर हुए जानलेवा हमले की शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत के अनुसार, 20 अक्टूबर की रात करीब 11.10 बजे मंदिर के पास झगड़े की आवाज सुनकर सुरेश मौके पर पहुंचे तो देखा कि उनके बड़े भाई मुकेश से लल्ला उर्फ हेमसिंह ठाकुर पैसों की लेन-देन को लेकर बहस कर रहा था। मना करने के बावजूद हेमसिंह गाली-गलौच पर उतर आया और अचानक जेब से निकली धारदार वस्तु से मुकेश के पेट में वार कर दिया।
खून से लथपथ मुकेश को परिजनों ने अस्पताल पहुंचाया, जबकि आरोपी फरार हो गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन अब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
2 : दीपावली मनाने जा रहे मजदूरों पर चाकू से हमला, लूटपाट भी की
दूसरा मामला सिरगिट्टी थाना क्षेत्र के शारदा मंदिर के पास का है, जहाँ राजश्री फैक्ट्री में काम करने वाला मजदूर मनोज अगरिया अपने साथियों के साथ दीपावली मनाने के बाद पैदल रेलवे स्टेशन की ओर जा रहा था।
रात करीब 12 बजे तीन अज्ञात युवक रास्ते में मिले और बिना कारण गाली-गलौच शुरू कर दी।
जब मजदूर राजेश सिंह श्याम ने विरोध किया, तो दो युवकों ने उस पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिए — एक वार उसकी छाती में और दूसरा कुल्हे में।
बीच-बचाव करने आए मनोज अगरिया के हाथ की हथेली पर भी हमला किया गया।
इतना ही नहीं, हमलावरों ने उसके जेब से 6 हजार रुपये और मोबाइल छीन लिया और अंधेरे में फरार हो गए।
घायल मजदूरों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
थाना पुलिस की भूमिका पर सवाल
त्योहारों के दौरान अपराध की यह दोहरी वारदात बिलासपुर पुलिस की “रात्रि गश्त और निवारक कार्रवाई” पर गहरे सवाल खड़े करती है।
शहर के दो थाना क्षेत्रों — कोनी और सिरगिट्टी — में एक ही रात खून बहा, और दोनों जगह पुलिस मौके पर देर से पहुंची।
यह दर्शाता है कि दीपावली जैसी संवेदनशील रात में भी पुलिस गश्त महज़ कागजों पर थी।
सवाल यह भी उठता है कि क्या पुलिस ने पहले से किसी प्रकार की विशेष पेट्रोलिंग योजना बनाई थी या अपराधियों ने इसकी कमी का फायदा उठाया?
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि देर रात तक कई जगह युवकों का झुंड सड़कों पर घूमता रहा, मगर कोई पुलिसकर्मी नहीं दिखा।
बिलासपुर जैसी न्यायधानी में यह स्थिति प्रशासन की तैयारी और अपराध-नियंत्रण प्रणाली की कमजोरी उजागर करती है।
सुरक्षा का वादा या दिखावा?
त्योहारों पर हर साल “अलर्ट मोड” में होने का दावा करने वाली कोनी और सिरगिट्टी पुलिस इस बार भी नाकाम दिखी।
शहर के बीचों-बीच हुए चाकूबाजी और लूट के मामले यह बताते हैं कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं और पुलिस का भय कितना कम।
शहर की सड़कों पर मौजूद सीसीटीवी कैमरे भी कई जगह खराब पाए गए।
यह प्रशासन और पुलिस दोनों के लिए चेतावनी है कि दिवाली की लाइट के बीच शहर में कानून की लाइट बुझ चुकी थी।
मेरी भी सुनिए
दीपावली की रात बिलासपुर ने देखा — एक तरफ घरों में पूजा की घंटियां बज रही थीं, दूसरी ओर सड़क पर खून टपक रहा था।
दो थाना क्षेत्रों में हुए दो हमलों ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी।
शहर अब जवाब मांग रहा है — आखिर कब तक त्योहारों की रातें अपराधियों के जश्न में तब्दील होती रहेंगी?
Mohammed israil



